- पंजाब कांग्रेस में चल रहे सियासी घटनाक्रम से 2022 वाली यादें ताजा हो गई हैं. ताजा विवाद कुछ वैसा ही है.
- पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल चंडीगढ़ से वापस लौट चुके हैं. वह पार्टी आलाकमान को रिपोर्ट देंगे.
- भूपेश बघेल ने चरणजीत सिंह चन्नी से भी मुलाकात की थी. पंजाब कांग्रेस में कलह बढ़ रही है.
पंजाब कांग्रेस में पिछले पांच दिनों में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदला है. क्योंकि पंजाब में कांग्रेस की कलह निपटाने गए प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल अब चंडीगढ़ से दिल्ली लौट चुके हैं. इसके पहले बघेल ने पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से भी मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक चन्नी और उनके समर्थकों ने भूपेश बघेल को बता दिया है कि उन्हें किसी भी हालत में पंजाब कांग्रेस के प्रधान के तौर पर अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग मंजूर नहीं है. उधर भूपेश बघेल का कहना है कि वो अपनी रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को सौंपेंगे. वहीं चन्नी कैंप के नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा है कि उन्हें कॉम्प्रोमाइज्ड लीडर नहीं चाहिए उनका इशारा राजा वाडिंग की तरफ है और उनका मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष पंजाब सरकार के खिलाफ उतने सख्त नहीं हैं. लेकिन जिस तरह से पंजाब कांग्रेस में राजनीति बदल रही है. उससे 2022 वाला सियासी घटनाक्रम फिर से ताजा हो गया है.
भूपेश बघेल कांग्रेस आलाकमान को देंगे रिपोर्ट
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल पार्टी आलाकमान को अपनी रिपोर्ट सौंपने वाले हैं. ऐसे में कांग्रेस आलाकमान क्या फैसला लेता है, यह देखना दिलचस्प होगा. लेकिन कई सवाल ऐसे हैं जिसका जबाव कांग्रेस आलाकमान को ढूंढना पड़ेगा. पंजाब के महासचिव भूपेश बघेल की इस रिपोर्ट के अलावा कांग्रेस आलाकमान के पास एक और कमेटी की रिपोर्ट है जो अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजनलाल जाटव ने दी है. उसके पहले राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे पंजाब कांग्रेस के नेताओं से बैठक कर चुके हैं और सबको मिलजुल कर काम करने और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात पंजाब कांग्रेस के नेताओं को बता चुके हैं. लेकिन उसके बाद भी इन नेताओं का झगड़ा खत्म नहीं हो रहा है.
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पंजाब कांग्रेस में 2022 जैसा घटनाक्रम
पंजाब कांग्रेस में फिलहाल जो उठापठक चल रही है. उसकी कहानी समझने के लिए पांच साल पीछे जाना होगा. क्योंकि कांग्रेस अभी 2022 की कहानी दोहराते दिख रही है. तब कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था, उस वक्त भी अजय माकन की कमेटी ने ही रिपोर्ट दी थी. वजह ये थी कि तब नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस में मजबूत होते जा रहे थे और उनकी पहुंच 10 जनपथ तक थी. कांग्रेस को भी लग रहा था कि नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रस को बहुत आगे लेकर जाएंगे. नवजोत सिंह सिद्धू भी पंजाब का मुख्यमंत्री का सपना पाल रहे थे. हालांकि वो बीजेपी में भी रह चुके थे मगर तब कांग्रेस ने ये सब नजरर अंदाज कर दिया था, उनकी पत्नी जरूर कांग्रेस की विधायक थीं.
चरणजीत सिंह चन्नी को सौंपी गई थी कमान
पंजाब में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह सीएम बदलने का फैसला कर लिया था. पार्टी अंबिका सोनी को मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. फिर राहुल गांधी ने तय किया कि किसी दलित को पंजाब की कमान सौंपनी चाहिए और चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया. मगर इससे पंजाब के जट सिख बिदक गए. यही नहीं नवजोत सिंह सिद्धू के साथ सुनील जाखड़ और अन्य नेताओं ने चन्नी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. बाद में जब विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो वह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका थे. पार्टी राज्य की 117 सीटों में 18 सीटों पर सिमट गई. चरणजीत सिंह चन्नी दो सीटों से बतौर मुख्यमंत्री चुनाव लड़े और हार गए. जबकि पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू भी चुनाव हार गए थे.
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इसके बाद पंजाब में कांग्रेस फिर से खड़ी होने में जुटी है. क्योंकि पंजाब में कांग्रेस की जड़ें मौजूद हैं, 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की और 13 लोकसभा सीटों में से 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी. अब कांग्रेस को इसी सिलसिले को जारी रखना चाहती है. लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, मनीष तिवारी और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष राजा बड़िग के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है. चन्नी और रंधावा एक गुट में नजर आ रहे हैं. वहीं चंडीगढ़ से कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी भी सोशल मीडिया पर अपनी अलग भावना जाहिर कर रहे हैं.
कांग्रेस आलाकमान कैसे निकालेगा समाधान
ऐसे में कांग्रेस एक बंटी हुई पार्टी की तरह दिख रही है, जहां चन्नी और रंधावा ने कांग्रेस आलाकमान को आंख दिखा दिया है. 2022 में चरणजीत सिंह चन्नी को नवजोत सिंह सिद्धू, सुनील जाखड़ नीचे खींच रहे थे. बाद में सुनील जाखड़ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. पंजाब में इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है, जब चन्नी अपने ही प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ हैं और ये कहना गलत नहीं होगा कि वो नवजोत सिंह सिद्धू की भूमिका में हैं. राहुल गांधी जो भी फैसला लें मगर मगर पंजाब कांग्रेस के नेता अब अपनी ही कब्र खोदने में लगे हैं, देखना होगा राहुल गांधी क्या निर्णय करते हैं और उससे क्या असर पड़ेगा पंजाब कांग्रेस नेताओं पर. सबसे बड़ा सवाल राहुल के निर्णय को चरणजीत सिंह चन्नी मानते हैं या पंजाब का यह चुनाव भी 2022 के इतिहास को दोहराएगा.
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