प्रियंका गांधी का जन्मदिन मना कर क्या यूपी कांग्रेस राज्य में उनकी वापसी का संकेत दे रही है?

प्रियंका गांधी की यूपी में वापसी को लेकर सवाल पूछे जाने पर यूपी कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि वो गई ही कब थीं! वो तो हमेशा हम लोगों के साथ ही हैं और यूपी को प्राथमिकता देती हैं.

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  • यूपी कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के 54वें जन्मदिन पर प्रदेश भर में केक काटने का कार्यक्रम आयोजित किया
  • प्रियंका गांधी को जनवरी 2019 में यूपी कांग्रेस का प्रभार मिला था
  • दिसंबर 2023 में प्रियंका गांधी की जगह अविनाश पांडे को यूपी कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया था
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नई दिल्ली:

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के 54 वें जन्मदिन को यूपी में कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर मनाया. सोमवार को लखनऊ प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में केक काटने से लेकर गोरखपुर से गाजियाबाद तक सभी बड़े शहरों में यूपी से जुड़े कांग्रेस के बड़े नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई जिसमें अगले सौ दिनों का एजेंडा पेश किया गया. सवाल उठता है कि यूपी कांग्रेस ने सौ दिनों का एजेंडा पेश करने के लिए प्रियंका गांधी के जन्मदिन को क्यों चुना? 

क्या यह यूपी विधानसभा चुनाव से पहले प्रियंका गांधी की प्रदेश की राजनीति में वापसी के संकेत हैं? क्या बीते विधानसभा चुनाव की तरह ही प्रियंका गांधी एक बार फिर यूपी कांग्रेस की कमान संभालने वाली हैं? जनवरी 2019 में प्रियंका गांधी को कांग्रेस महासचिव बना कर यूपी का प्रभार दिया गया था. तब से बीते विधानसभा चुनाव तक प्रियंका गांधी ने धरना–प्रदर्शन और चुनाव प्रचार में दिन–रात एक कर यूपी कांग्रेस का नेतृत्व किया. विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने पूरी ताकत झोंक दी. चालीस फ़ीसदी टिकट महिलाओं को दी और आधी आबादी को साधने के लिए नारा दिया “लड़की हूं, लड़ सकती हूं! लेकिन जहाँ 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष रहते राहुल गांधी अमेठी से हार गए वहीं 2022 यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महज दो सीट और दो प्रतिशत वोट पर सिमट गई. 

इसके बाद मानों प्रियंका गांधी का यूपी से मोहभंग हो गया. दिसंबर 2023 में प्रियंका गांधी की जगह अविनाश पांडे को यूपी कांग्रेस का प्रभारी बना दिया गया. हालांकि बीते लोकसभा चुनाव में देश भर में चुनाव प्रचार करने के अलावा प्रियंका गांधी ने रायबरेली में कैंप कर राहुल गांधी और अमेठी में केएल शर्मा की जीत सुनिश्चित की. बहरहाल कुछ महीनों बाद प्रियंका गांधी ख़ुद केरल के वायनाड से लोकसभा उपचुनाव जीत कर सांसद बन गईं. महज़ साल भर में सांसद के तौर पर उन्हें अपनी दमदार छाप छोड़ी है. 

अब कांग्रेस पार्टी चाहती है यूपी विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी अहम भूमिका निभाएँ. बतौर राष्ट्रीय महासचिव यूपी का प्रभार छोड़ने के बावजूद उन्होंने कोई और ज़िम्मेदारी नहीं ली है. हाल में ही उन्हें असम विधानसभा चुनाव के लिए स्क्रीनिंग कमिटी का प्रमुख बनाया गया है जो महज दो महीने का काम है. पूरे देश में चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी अहम भूमिका निभाती ही हैं. चर्चा है कि जल्द उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी ज़िम्मेदारी मिल सकती है. 

ऐसे में यूपी में प्रियंका गांधी कि भूमिका क्या होगी यह अभी साफ़ नहीं है. लेकिन उनके जन्मदिन के मौके पर यूपी कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि प्रियंका गांधी का यूपी से कनेक्शन बना हुआ है और वही प्रदेश में कांग्रेस का चेहरा हैं. दरअसल यूपी में कांग्रेस के पास गांधी परिवार के बाहर योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव और मायावती की टक्कर का कोई बड़ा चेहरा नहीं है. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी रायबरेली से ही सांसद हैं लेकिन वो राष्ट्रीय नेता हैं और कांग्रेस उन्हें राज्य की राजनीति में नहीं उलझाना चाहती. 

ज़ाहिर है कि प्रियंका गांधी के अलावा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास कोई विकल्प नहीं है. कांग्रेस सूत्रों का मानना है कि भले ही पिछले विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी कोई  करिश्मा नहीं कर पाईं लेकिन यूपी गांधी परिवार का “घर” है और प्रियंका यूपी को अच्छे से समझती हैं. प्रियंका गांधी 1998 से अमेठी–रायबरेली के चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाती आई हैं जब सोनिया गांधी पहली बार चुनावी मैदान में उतरी थीं. उनके चेहरे से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ता है. 

अभी से प्रियंका गांधी का नाम आगे कर कांग्रेस दो निशाने लगाने की कोशिश कर रही है. पहला संगठन में जान फूँकने की कवायद है और दूसरा समय रहते समाजवादी पार्टी को संदेश कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव को लेकर बेहद गंभीर है. बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में अच्छा प्रदर्शन किया था. आगामी विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस इस गठबंधन को बरकरार रखते हुए करीब सौ सीटों पर लड़ना चाहती है. कांग्रेस को भरोसा है कि प्रियंका गांधी केंद्रीय भूमिका में रहीं तो सीटें कम नहीं होंगी. अगर बात नहीं बनी तो कांग्रेस के पास अकेले जाने या नया प्रयोग करने का विकल्प भी होगा. 

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प्रियंका गांधी की यूपी में वापसी को लेकर सवाल पूछे जाने पर यूपी कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि वो गई ही कब थीं! वो तो हमेशा हम लोगों के साथ ही हैं और यूपी को प्राथमिकता देती हैं. बहरहाल, ख़ुद प्रियंका गांधी फ़िलहाल निजी काम से विदेश में हैं. सूत्रों के मुताबिक उनकी एक परिचित बेहद बीमार हैं, जिन्हें वो देखने गई हैं. 

जहां तक यूपी कांग्रेस में अगले सौ दिनों के एजेंडे का सवाल है तो अगले तीन महीनों में कांग्रेस बड़े पैमाने पर "संविधान–संवाद महापंचायत" के तहत क़रीब तीस सभाएँ आयोजित करने जा रही है. इसका समापन अप्रैल में लखनऊ में एक बड़ी सभा से होगा जिसमें राहुल गांधी के भाग लेने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक संविधान संवाद में कई कार्यक्रमों में प्रियंका गांधी शामिल होंगी. इन सभाओं, असम चुनाव और संसद के बजट सत्र के बाद ही संभवतः साफ होगा कि कांग्रेस के मिशन यूपी में प्रियंका गांधी की क्या भूमिका रहने वाली है. 

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