2 टन का झूमर और छत पर लेदर पेंटिंग... जानिए कितने खूबसूरत हैं राष्ट्रपति भवन वो दो हॉल, जिनके बदल गए नाम

राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन में कुल 350 कमरे हैं. यहां 18 सीढ़ियां और 74 बरामदे बने हैं. इस बिल्डिंग में 227 पिलर्स, 14 लिफ्ट और 37 फाउंटेन हैं.

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नई दिल्ली:

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में राष्ट्रपति (President of India) को प्रथम नागरिक कहा जाता है. उनका सरकारी आवास राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) भारत की शक्ति, लोकतांत्रिक परंपराओं और पंथनिरपेक्ष स्वरूप का प्रतीक है. सरकार ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन के दो हॉल- अशोक हॉल (Ashok Hall) और दरबार हॉल (Darwar Hall) के नाम बदल दिए हैं. अब राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल 'गणतंत्र मंडप' और अशोक हॉल को 'अशोक मंडप' कहा जाएगा. दरबार हॉल में राष्ट्रीय पुरस्कारों वाले समारोह आयोजित किए जाते हैं. अशोक हॉल मूल रूप से एक बॉलरूम है.

आइए जानते हैं कितना भव्य है राष्ट्रपति भवन? इसमें कौन सी है सुविधाएं और दरबार हॉल, अशोक हॉल की क्या है खासियत:- 

राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में रायसीना हिल पर राजपथ के पश्चिमी किनारे पर है. ये 330 एकड़ में फैला हुआ है. राष्ट्रपति भवन की गैलरी की कुल लंबाई 2.5 किलोमीटर है. यहां 9 टेनिस कोर्ट, एक पोलो ग्राउंड, गोल्फ ग्राउंड्स और एक खूबसूरत मुगल गार्डन भी है.

कुल 350 कमरे और 74 बरामदे
राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन में कुल 350 कमरे हैं. यहां 18 सीढ़ियां और 74 बरामदे बने हैं. इस बिल्डिंग में 227 पिलर्स, 14 लिफ्ट और 37 फाउंटेन हैं.

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2.5 किलोमीटर के कॉरिडोर वाले राष्ट्रपति भवन में 15 एकड़ का गार्डन है.

15 एकड़ में फैला है अमृत उद्यान
2.5 किलोमीटर के कॉरिडोर वाले राष्ट्रपति भवन में 15 एकड़ का गार्डन है. इसे पहले 'मुगल गार्डन' कहा जाता था. सरकार ने इस गार्डन का नाम बदलकर 'अमृत उद्यान' कर दिया गया है. 'अमृत उद्यान' में फिलहाल 138 तरह के गुलाब, 10,000 से ज्यादा ट्यूलिप (कंद-पुष्प) और 70 प्रजातियों के लगभग 5,000 मौसमी फूल हैं. सभी फूलों का यूनिक क्यू आर कोड लगा है जिसे स्कैन करने पर आपको सारी जानकारी मिल जाएगी.

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कैसा है राष्ट्रपति भवन का दरबार हॉल?
राष्ट्रपति भवन के गुबंद, जिसपर तिरंगा लहराता रहता है, पूरी बिल्डिंग की ऊंचाई से दोगुनी हाइट का है. इसे सेंट्रल डोम कहा जाता है. सेंट्रल डोम के नीचे जो हॉल है, वही दरबार हॉल है. इसे अब से गणतंत्र हॉल कहा जाएगा. इस हॉल में घुसते ही आपको एक रॉयल फीलिंग आती है. 42 फीट ऊंची संगमरमर की दीवारों वाले इस गोलाकार हॉल की खूबसूरती देखते बनी है. ब्रिटिश वास्तुकला के एक्सपर्ट क्रिस्टोफर हसी ने 1953 में अपनी किताब 'द लाइफ ऑफ सर एडविन लुटियंस' में लिखा, "दरबार हॉल का प्रभाव चाहे जिस भी तरह से देखा जाए, ये आपको पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर देता है. इसकी खूबसूरती बयां करने के लिए आपके पास शब्द ही नहीं होते."

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दरबार हॉल में 2 टन के वजन वाला बेल्जियम ग्लास का झूमर लगा है, इससे पत्थर चमकते हैं.

दरबार हॉल में लगा है 2 टन का झूमर
दरबार हॉल खास जैसलमेर के पीले संगमरमर (यलो मार्बल) के पिलर्स से घिरा है. 12 संगमरमर के पत्थरों की जालियों का रोशनदान बना है, जिससे सूरज की किरणें आती हैं. इस हॉल का फर्श मकराना और अलवर के सफेद संगमरमर और इटली से लाए गए डार्क चॉकलेटी रंग के संगमरमर से बनाए गए हैं. दरबार हॉल में 2 टन के वजन वाला बेल्जियम ग्लास का झूमर लगा है, इससे पत्थर चमकते हैं. दरबार हॉल में चार हाफ सर्कल झरोखे हैं. दो झरोखे दक्षिण की ओर और दो झरोखे पूरब की ओ खुलते हैं.

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यहां लगी है गौतम बुद्ध की मूर्ति 
दरबार हॉल की 42 फुट ऊंची दीवारें सफेद संगमरमर से सजी हुई है. यहां अंग्रेजों के समय में वायसराय और वायसरीन के बैठने की जगह थी. अब यहां राष्ट्रपति के लिए एक कुर्सी लगी रहती है. पीछे की तरफ पांचवी शताब्दी के गुप्त काल की एक बुद्ध की मूर्ति लगी हैं. इसका बैकग्राउंड रेड वेलवेट का है. इस हॉल में मार्बल की दीवारों पर वेंकटेश डी की बनाई महात्मा गांधी का विशाल पोर्ट्रेट लगा है. इसके अलावा सी. राजगोपालाचारी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की पेंटिंग भी लगी हैं. 

देश के पहले पीएम और उनकी कैबिनेट ने यहीं ली शपथ
दरबार हॉल को पहले 'थ्रोन रूम' के नाम से जाना जाता था. यहां पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की पहली सरकार ने 15 अगस्त 1947 को शपथ ली थी. 1948 में सी. राजगोपालाचारी ने भी भारत के गवर्नर जनरल के रूप में दरबार हॉल में ही शपथ ली थी. इसके बाद 1977 में राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद के निधन पर दरबार हॉल में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. अब इस हॉल में राष्ट्रपति की ओर से असैन्य और सैन्य सम्मान दिए जाते हैं. साथ ही नई सरकार के शपथ समारोह दरबार हॉल में ही आयोजित किए जाते हैं.

अशोक हॉल की छत पर बनी चमड़े की पेंटिंग फारस के शासक फत अली शाह की है.

कैसा है अशोक हॉल?
राष्ट्रपति भवन का अशोक हॉल और भी शानदार है. अशोक हॉल को विदेशी अतिथियों का परिचय जानने और राजकीय भोज के शुरू होने से पहले आने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का परिचय जानने के लिए किया जाता है. रॉयल लुक वाले इस हॉल की छत और फर्श दोनों का ही अपना आकर्षण है. इसकी फर्श लकड़ी से बनी है. इसकी सतह के नीचे स्प्रिंग लगे हुए हैं. जबकि अशोक हॉल की छत के बीचों बीच चमड़े की एक पेंटिंग बनी है. चारों तरफ ऑयल पेंटिंग की गई है. 

अशोक हॉल की छत पर बनी चमड़े की पेंटिंग फारस के शासक फत अली शाह की है. पेंटिंग में इसे घुड़सवारी करते दिखाया गया है. इस पेंटिग में वो अपने 22 बच्चों के साथ शिकार कर रहे हैं. पेंटिंग की खासियत यह है कि इसे कमरे के अंदर कहीं से भी अगर राजा की आंख में देखा जाए, तो लगता है कि वो आई कॉन्टैक्ट कर रहे हैं. 5.20 मीटर लंबी और 3.56 मीटर चौड़ी इस पेंटिंग को फतह शाह ने खुद इंग्लैंड के राजा जार्ज IV को गिफ्ट की थी. इरविन के कार्यकाल के दौरान तोहफे में दी गई इस पेंटिंग को लंदन के भारत ऑफिस लाइब्रेरी से मंगाया गया था और यहां लगाया गया था.

अशोक हॉल में लगे हैं बेल्जियम कांच के झूमर
अशोक हॉल में भी छह बेल्जियम कांच के झूमर लगाए गए हैं. ऑर्केस्ट्रा के लिए यहां एक स्टेज भी बना हुआ है. अब इस हॉल में ऑर्केस्ट्रा तो नहीं होता. इसलिए स्टेज का इस्तेमाल किसी समारोह के दौरान राष्ट्रगान बजाने के लिए होता है. अशोक हॉल के फ्रेंच विंडो से मुगल गॉर्डन का शानदार नजारा दिखता है. इस हॉल की दीवारें और पिलर्स पीले ग्रे मार्बल से बनाए गए हैं. 

हर पेंटिंग की अलग कहानी
अशोक हॉल की दीवारों पर शानदार पेंटिंग लगाई गई हैं. हर पेंटिंग की अलग कहानी है. यहां 12वीं सदी के फारसी कवि निजामी गंजवी की एक ऑयल कैनवास पेंटिंग लगी है. एक तरफ फारसी महिला की भी पेंटिंग है. पेंटिंग में महिला के बर्तन पकड़े हुए है. दोनों पेंटिंग के चित्रकार के बारे में जानकारी नहीं है.

अशोक हॉल में दिखेगी पेंडुलम वाली घड़ी
अशोक हॉल में एक पेंडुलम वाली विशाल घड़ी भी है. राष्ट्रपति भवन की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, ये घड़ी इंग्लैंड से लाई गई थी. अशोक हॉल में फारसी शैली का 32 मीटर लंबा और 20 मीटर चौड़ा कालीन बिछा हुआ है, जो इस हॉल की भव्यता को दिखाता है. 

राष्ट्रपति भवन में एक विशाल डाइनिंग हॉल है. यहां एक साथ 104 लोगों के बैठने का इंतजाम है.

डायनिंग रूम में एक साथ खाना खा सकते हैं 104 मेहमान
राष्ट्रपति भवन में एक विशाल डाइनिंग हॉल है. यहां एक साथ 104 लोगों के बैठने का इंतजाम है. इसे बैंक्वेट हॉल भी कहा जाता है. इसी कमरे में भारत के सभी पूर्व राष्ट्रपतियों की तस्वीरें लगाई गई हैं. बैंक्वेट हॉल की दीवारों को बर्मा के टीक तख्तों से सजाया गया है. यहां चार झूमर हैं, जो डाइनिंग टेबल के ठीक ऊपर लगे हैं. इस हॉल में एक तरफ बैंड गैलरी है. इस गैलरी को पहले म्यूजिशियन गैलरी कहा जाता था. अब यहां राष्ट्रपति के डिनर के समय लाइव म्यूजिक बजाया जाता है.


 

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