पीएम मोदी के बाद अब राष्ट्रपति मुर्मू की चॉकलेट प्रतिमा ! 100 किलोग्राम वजन, 15 कलाकारों ने किया तैयार

Pakhal Diwas Odisha: भुवनेश्वर में 'पाखाल दिवस' के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की 100 किलो चॉकलेट से बनी भव्य मूर्ति चर्चा का केंद्र बनी हुई है. शेफ राकेश साहू और 15 कलाकारों की टीम ने इसे तैयार किया है

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Draupadi Murmu Chocolate Statue: ओडिशा के एक साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर करने वालीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संघर्ष को ओडिशा में अनोखे तरीके से सलामी दी गई. दरअसल यहां भुवनेश्वर में पाखाल दिवस मनाया जा रहा है. इसी आयोजन में  राष्ट्रपति की 100 किलोग्राम वजन वाली एक भव्य चॉकलेट प्रतिमा का अनावरण किया गया है. ये न केवल ओडिया अस्मिता का प्रतीक है बल्कि आधुनिक कौशल और पारंपरिक निष्ठा का एक अद्भुत संगम भी है. 15 कुशल कलाकारों द्वारा तैयार की गई यह आदमकद कृति राष्ट्रपति के लिए एक अनोखा 'मीठा सम्मान' है.

100 किलो चॉकलेट और 15 कलाकारों का जुनून

भुवनेश्वर के बोमीखाल स्थित 'चॉकलेट क्लब' के 15 प्रतिभाशाली कलाकारों ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम दिया है. करीब 100 किलोग्राम वजन वाली इस प्रतिमा को पूरी बारीकी से तराशने के लिए टीम पिछले तीन दिनों से दिन-रात जुटी हुई थी. शेफ राकेश साहू और रंजन परिदा के नेतृत्व में इन कलाकारों का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति मुर्मू के व्यक्तित्व की सादगी और उनकी गरिमा को चॉकलेट की परतों में जीवंत करना था. शेफ राकेश साहू बताते हैं कि इस पूरे प्रोजेक्ट की प्लानिंग पिछले 15 दिनों से चल रही थी, ताकि देश की प्रथम नागरिक को एक यादगार सलमाी दी जा सके.

'चॉकलेट क्लब' के छात्रों का कमाल

दिलचस्प बात यह है कि यह शानदार कलाकृति 'चॉकलेट क्लब' के डिप्लोमा छात्रों की मेहनत का नतीजा है. यह संस्थान बेकिंग और फाइन पेस्ट्री बनाने का एक प्रोफेशनल स्कूल है. राष्ट्रपति मुर्मू की इस प्रतिमा से पहले, इसी टीम ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनकी भी एक बेहद सटीक चॉकलेट प्रतिमा बनाई थी. पीएम मोदी की वह प्रतिमा 70 किलोग्राम की थी, जिसे बनाने में 55 किलो डार्क चॉकलेट और 15 किलो व्हाइट चॉकलेट का इस्तेमाल हुआ था. उस समय 15 छात्रों के ग्रुप को उसे तैयार करने में करीब सात दिन लगे थे.

पाखाल दिवस पर ओडिशा के गौरव को सलाम

ओडिशा में 'पाखाल दिवस' पारंपरिक खान-पान और सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है. ऐसे में राज्य की अपनी बेटी और देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस अंदाज में याद करना बेहद खास संदेश देता है. यह प्रतिमा केवल एक शिल्प नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष और समर्पण को किया गया सच्चा नमन है, जो राष्ट्रपति मुर्मू की पहचान रही है. कलाकारों ने उनकी आदिवासी जड़ों और ओडिया समुदाय के गौरव को इस कलाकृति के जरिए बड़ी खूबसूरती से प्रदर्शित किया है.

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पाक-कला और राष्ट्रीय गौरव का संगम

चॉकलेट से बनी यह प्रतिकृति आज भुवनेश्वर में चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग इस बात से दंग हैं कि कैसे महज चॉकलेट के इस्तेमाल से इतनी सजीव और गरिमामय आकृति तैयार की जा सकती है. यह प्रयास बताता है कि आज का युवा वर्ग न केवल अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है, बल्कि वह अपनी कला के जरिए राष्ट्रीय नायकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के नए और आधुनिक तरीके भी जानता है. राष्ट्रपति मुर्मू की यह प्रतिमा बाद में चॉकलेट म्यूजियम में रखी जाएगी..
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