साहित्य जगत के एक युग का अंत: विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति.

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नई दिल्ली:

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हिंदी साहित्य के प्रख्यात विद्वान और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर दुख जताया है. उन्होंने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति हुई है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि दी.

राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अपनी सहज और सशक्त रचनाओं से गद्य और पद्य को अत्यंत समृद्ध करने वाले रचनाकार विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति हुई है. पीछे छूट गए तथा हताश हो रहे समुदायों और व्यक्तियों के प्रति संवेदना एवं चिंता का भाव उनके लेखन को विशेष अर्थवत्ता प्रदान करता है. उनके परिवारजन और असंख्य प्रशंसकों के लिए मैं हार्दिक शोक संवेदना व्यक्त करती हूं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति.

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्ल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार, भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल जी का निधन साहित्य जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है. सादगीपूर्ण लेखन और सरल व्यक्तित्व के लिए प्रसिद्ध विनोद कुमार शुक्ल जी अपनी विशिष्ट लेखन कला के लिए सदैव याद किए जाएँगे. मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों, प्रशंसकों और असंख्य पाठकों के साथ हैं. ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें. ॐ शांति शांति शांति

बता दें कि विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार को रायपुर स्थित एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया. वह 89 वर्ष के थे. शुक्ल अपनी-अपनी प्रयोगात्मक लेकिन सरल लेखन शैली के लिए प्रसिद्ध थे. वह काफी समय से कई अंगों में संक्रमण से जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्होंने शाम 4:48 बजे अंतिम सांस ली.

जानकारी के अनुसार सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें 2 दिसंबर को एम्स में भर्ती कराया गया था और उन्हें ऑक्सीजन और वेंटिलेटर पर रखा गया था.

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