माघ मेले में करोड़ों की पोर्श कारों का काफिला... आखिर कौन हैं ये 'सतुआ बाबा' जो सोशल मीडिया पर छाए हैं?

सतुआ बाबा उर्फ संतोष दास जी महाराज. ये वो संत जो हमेशा पीला कपड़े में दिखाई देते हैं, अक्सर सीएम योगी आदित्यनाथ के अगल बगल दिखाई देते हैं और आजकल महंगी कारों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया में छाए हुए हैं.

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  • सतुआ बाबा उर्फ संतोष दास काशी के मणिकर्णिका घाट पर स्थापित सनातन पीठ के वर्तमान महामंडलेश्वर हैं.
  • बाबा के पास महंगी पोर्श कार, डिफेंडर, प्राइवेट जेट और करोड़ों की कीमत वाली क्रूज़ जैसी संपत्तियां हैं.
  • बाबा का आश्रम बटुकों को वैदिक शिक्षा देता है और गंगा पार गौशाला सहित धार्मिक सेवा कार्यों में भी सक्रिय है.
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प्रयागराज:

प्रयागराज के माघ मेले में जिस सतुआ बाबा की जमकर चर्चा हो रही है, उनको लेकर अगर आपको लगता है कि उनके पास सिर्फ डिफेंडर या पोर्श कार है तो ज़रा ठहरिये. सनातन के वैभव की कहानी सिर्फ़ यहीं तक सीमित नहीं है. सतुआ बाबा के पास कई ऐसी चीज़ें हैं, जो उन्हें सबसे अलग बनाती हैं. उनकी तस्वीरें आप कभी प्राइवेट जेट में देखेंगे तो कभी महंगी गाड़ियों में. कौन हैं सतुआ बाबा और क्या क्या चीज़ें उनके पास हैं, चलिए आपको बताते हैं. 

पीले कपड़े वाले सतुआ बाबा 

सतुआ बाबा उर्फ संतोष दास जी महाराज. ये वो संत जो हमेशा पीला कपड़े में दिखाई देते हैं, अक्सर सीएम योगी आदित्यनाथ के अगल बगल दिखाई देते हैं और आजकल महंगी कारों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया में छाए हुए हैं. बहुत से लोग सतुआ बाबा के बारे में ये जानते हैं कि वो काशी के रहने वाले सीएम योगी के क़रीबी संत हैं. लेकिन सतुआ बाबा की कहानी सिर्फ़ यहीं तक सीमित नहीं है. 

सतुआ बाबा पीठ का इतिहास क्या है? 

काशी के मणिकर्णिका घाट पर दूर से दिखने वाली एक इमारत सतुआ बाबा का स्थायी आश्रम है. इस पीठ की स्थापना साल 1803 में हुई थी. ये पीठ गुजरात के रहने वाले संत जेठा पटेल ने की थी. जेठा पटेल संत बन गए थे और काशी आकर उन्होंने जिस आश्रम की स्थापना की, उस आश्रम के मुखिया को सतुआ बाबा कहते हैं. इस आश्रम में बटुकों को वैदिक शिक्षा दी जाती है. आज उसी पीठ के मुखिया संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा हैं. 

बाबा का इतिहास क्या है? 

संतोष दास यूपी के सीमावर्ती ललितपुर ज़िले के साधारण ब्राह्मण परिवार से आते हैं. मात्र 11 साल की उम्र में परिवार छोड़ वो काशी आ गए. काशी में उनका जुड़ाव सतुआ बाबा से हो गए. वैष्णव संप्रदाय के निर्मोही अखाड़े से जुड़े इस पीठ के मुखिया ने संतोष दास की प्रतिभा देख उन्हें अपना उत्तराधिकारी बना दिया. संतोष दास मात्र 19 साल की उम्र में महामंडलेश्वर बन गए. ये अबतक के इतिहास में सबसे कम उम्र में दी गई महामंडलेश्वर की उपाधि थी. 

सबसे कम उम्र में बड़े पद मिले 

सबसे कम उम्र में महामंडलेश्वर बनने वाले संतोष दास के गुरु के साकेतवासी होने के बाद उनके उत्तराधिकारी संतोष दास जी महाराज सतुआ बाबा बन गए. इसके बाद संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा के सामने अपनी पीठ को बचाने और बढ़ाने की महती ज़िम्मेदारी थी. उस ज़िम्मेदारी को निभाते हुए उन्होंने ना सिर्फ़ सनातन के कामों को आगे बढ़ाया बल्कि बीते महाकुंभ में सबसे कम उम्र में जगतगुरु की पदवी भी हासिल कर ली. अब सतुआ बाबा सिर्फ़ सतुआ बाबा नहीं बल्कि जगतगुरु सतुआ बाबा हैं. 

कैसे चर्चा शुरू हुई? 

प्रयागराज में माघ मेले की तैयारी चल रही थी. प्रयागराज के ज़िलाधिकारी सतुआ बाबा के आश्रम पहुंचे और बाबा के लिए रोटी सेंकने लगे. वीडियो आग की तरह वायरल हो गया. दो दिन बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या माघ मेले में पहुंचे तो डीएम को हिदायत देते हुए कहा कि सतुआ बाबा की रोटी के चक्कर में पड़ने की जगह काम करें. इसके बाद सीएम योगी जब माघ मेले में पहुंचे तो उन्होंने मंच से जो कहा उसने सबको हैरान कर दिया. सीएम ने कहा कि आप सभी लोग सतुआ बाबा से जुड़ जाइए. जो नहीं जुड़ेगा, उसे भी आख़िरी में वहीं जाना है, जहां सतुआ बाबा रहते हैं. यानी काशी की मणिकर्णिका घाट. 

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अब कहानी बाबा के वैभव की 

सतुआ बाबा के पास सिर्फ़ डिफेंडर या पोर्श नहीं बल्कि एक क्रूज़ भी है. डिफेंडर की क़ीमत लगभग साढ़े तीन करोड़ है. जब सोशल मीडिया ने डिफेंडर को लेकर सवाल शुरू किए तो लगा जैसे बाबा बैकफुट पर आ जायेंगे. लेकिन हुआ इसका उल्टा. बाबा नीले रंग की पोर्श लेकर सबके सामने आ गए. स्पोर्ट सेगमेंट की इस पोर्श कार की क़ीमत क़रीब 5.5 करोड़ बताई जा रही है. वहीं गंगा नदी में खड़ी क्रूज़ की क़ीमत भी कई करोड़ की है. इसके अलावा इनोवा और बड़ी एसयूबी गाड़ियों की कोई गिनती नहीं. 

बाबा ने सोशल मीडिया से दिया विरोधियों को जवाब 

सतुआ बाबा के फेसबुक पेज को फॉलो करने वाले जानते हैं कि बाबा ने खुलकर अपने वैभव का प्रदर्शन किया. आलोचकों ने जैसे ही डिफेंडर पर सवाल किया, वैसे ही बाबा ने प्राइवेट जेट के साथ अपनी तस्वीर और वीडियो शेयर कर दिया. फेसबुक के वीडियो पेज पर जाने पर कई वीडियो में वो हेलीकॉप्टर में घूमते हुए भी दिखाई देते हैं. एक तस्वीर में वो प्राइवेट जेट में आराम कर रहे हैं तो एक में चार्टर प्लेन में पोज़ देते हुए तस्वीर खिंचवा रहे. इसके अलावा वो सीएम योगी के साथ साथ देश की कई बड़ी हस्तियों के साथ भी दिखाई देते हैं. 

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धर्म के काम में भी आगे हैं बाबा 

गाड़ियां, प्राइवेट जेट, हेलीकॉप्टर जैसी चीज़ें एक तरफ़ और सतुआ बाबा के धार्मिक काम एक तरफ़. काशी के मणिकर्णिका घाट पर अपने आश्रम में बटुकों की संस्कृत की शिक्षा दीक्षा से लेकर गंगा पार की गौशाला में गौ-सेवा बाबा का सबसे बड़ा रूप है. महाकुंभ में सबसे बड़ा आश्रम बनाकर श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त रहने और मुफ्त खाने की व्यवस्था करके बाबा ने लाखों श्रद्धालुओं की सेवा की. माघ मेले में भी बाबा के आश्रम में लाखों लोग रहने और भोजन के लिए आ रहे हैं. 

बड़े संतों से सतुआ बाबा का कनेक्ट 

सतुआ बाबा सिर्फ सीएम योगी आदित्यनाथ के ही क़रीबी नहीं हैं. देश में धर्म की दुनिया में कई बड़े संतों के भी क़रीब हैं. मोरारी बापू, बाबा रामदेव और जूना अखाड़े के प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि से उनका बेहतरीन तालमेल है. इसकी बानगी तब भी मिली थी जब 2025 के महाकुंभ में सतुआ बाबा के जगतगुरु बनने के कार्यक्रम में हजारों साधु संतों की मौजूदगी देखी गई. भव्य आयोजन में बाबा को जगतगुरु बनाया गया. 

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नेताओं से सतुआ बाबा के बेहतर संबंध 

सतुआ बाबा सीएम योगी आदित्यनाथ के क़रीबी हैं, ये बात दुनिया जानती है. इसके अलावा पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और निवर्तमान बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ उनकी तस्वीरें उनके राजनेताओं से संबंधों को बयाँ करती हैं. उनके दरबार में कई मंत्रियों के माथा टेकने की तस्वीरें भी सामने आती रहती हैं. हालांकि राजनैतिक संबंध होने के बावजूद अबतक बाबा ने राजनीति में उतारने का कभी कोई संकेत नहीं दिया. सतुआ बाबा संबंध रखते हुए भी धर्म की दुनिया तक सीमित हैं. 

कार विवाद पर क्या बोले सतुआ बाबा 

महंगी कारों को लेकर सोशल मीडिया में निशाने पर आए सतुआ बाबा ने खुलकर कहा कि ये कारें उनकी हैं. उन्होंने इन कारों को सनातन का वैभव बताया. एनडीटीवी से बात करते हुए सतुआ बाबा ने कहा कि उनके भक्तों के चन्दन के पैसों से ये गाड़ियाँ ख़रीदी गई हैं. सभी गाड़ियाँ आश्रम के नाम पर हैं. हर गाड़ी के काग़ज़ मौजूद हैं. ये गाड़ियाँ किसी चोरी के पैसों से नहीं की गईं बल्कि भक्तों के दान की देन हैं. इसलिए जो सवाल उठाते हैं वो दरअसल सनातनियों की ताक़त से चिढ़े बैठे हैं. 

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