प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद जल शक्ति मंत्रालय के तहत आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी वापकोस (WAPCOS) और इसकी सहायक इकाई NPCC का कायापलट हो गया है. इन कंपनियों ने घाटे और विवादों से उबरना प्रारंभ कर दिया है. केवल तीन महीनों में ही वित्तीय स्थिति, मानव संसाधन प्रबंधन, कामकाज के क्षेत्र में बदलाव और नए व्यवसाय के मामले में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है. सरकारी सूत्रों के अनुसार कंपनी ने लंबित भुगतानों और बकाया वसूली में बड़ी सफलता हासिल की है जिससे वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है.
यह कंपनी जल संसाधन, बिजली और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में इंजीनियरिंग कंस्लटेंसी, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, खरीद-बिक्री और निर्माण कार्य में लगी है। यह बांध, जलाशय, सिंचाई, जल आपूर्ति, अपशिष्ट जल प्रबंधन और बिजली परियोजनाओं पर विशेषज्ञता रखती है। WAPCOS 75 से अधिक देशों में सक्रिय है. दक्षिण एशिया और अफ्रीका में इसकी महत्वपूर्ण उपस्थिति है जहां यह एशियाई विकास बैंक जैसी संस्थाओं के साथ काम करती है.
पिछले कई वर्षों से यह लालफीताशाही, कुप्रबंधन, अनियमितताओं और घाटे का शिकार थी. बीच में यह प्रस्ताव भी आया कि इसका और एनपीसीसी का विलय कर दिया जाए. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट निर्देश था कि इस कंपनी को घाटे से उबारा जाए ताकि अन्य सरकारी कंपनियों के लिए यह एक मिसाल बन सके. इसके बाद जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने तुरत फैसले करते हुए इसका कायापलट करने का काम शुरू किया. सूत्रों के अनुसार इस काम में वर्तमान सीएमडी शिल्पा शिंदे ने प्रमुख भूमिका अदा की है जिन्हें रजनी कांत अग्रवाल को हटाए जाने के बाद लाया गया था. यह कंपनी अपने पूर्व सीएमडी पर लगे गंभीर आरोपों के चलते विवादों से भी घिरी थी लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशों और निगरानी के बाद इसकी स्थिति में सुधार आना शुरू हुआ है.
हुआ कायापलट
कंपनी ने अब ₹484 करोड़ की वसूली की है और वेतन बिल में 60 करोड़ की वार्षिक बचत हुई. दिसंबर 2025 में दो वर्षों के अंतराल के बाद WAPCOS की वार्षिक रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की गई। कंपनी ने कुल ₹484 करोड़ की बकाया राशि की वसूली की, जबकि MSME वेंडरों सहित विभिन्न देयकों का भुगतान भी पूरा किया गया. इसके अलावा गैर-तकनीकी संविदा कर्मचारियों की सेवाएँ समाप्त करने और बायोमेट्रिक भुगतान प्रणाली लागू करने जैसे कदमों से वेतन बिल में कमी लाकर कुल ₹60 करोड़ की वार्षिक बचत सुनिश्चित हुई.
किराये के दफ्तर खाली, गैर-लाभकारी कार्यालय बंद किए गए। इससे कुल बचत लाखों में पहुंच गई. उदाहरण के तौर पर दिल्ली में किराये के दफ्तर खाली करने से ₹1.14 करोड़, पंचकुला, कंबोडिया और तुर्की स्थित गैर-लाभकारी कार्यालय बंद करने से ₹1.80 करोड़ की बचत की गई। वहीं कर्मचारियों से HRA वसूली के रूप में ₹1.75 करोड़ की बचत दर्ज की गई। थर्ड-पार्टी एजेंसियों के कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर कंपनी ने ₹46 करोड़ की अतिरिक्त वार्षिक बचत दर्ज की। इस तरह साल भर में सौ करोड़ रुपए से भी अधिक की बचत हुई है जिसका उपयोग कंपनी के विस्तार और कर्मचारियों के हित में किया जा रहा है. कंपनी के इतिहास में पहली बार Rotation Policy लागू की गई, जिसके तहत विदेशों में लंबे समय से तैनात 54 कर्मचारियों को वापस बुलाया गया और चयन प्रक्रिया के बाद नई तैनाती की गई. परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने के लिए 200 से अधिक कर्मचारियों को परियोजनाओं पर स्थानांतरित किया गया. हालांकि इस कदम के बाद 52 कर्मचारियों ने इस्तीफा भी दिया. कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 28 तकनीकी इकाइयों का विलय कर उन्हें 6 प्रमुख क्षेत्रों में पुनर्गठित किया है. ये हैं - जल संसाधन, अपशिष्ट जल प्रबंधन, विद्युत, अवसंरचना, तृतीय पक्ष निरीक्षण और निर्माण.
नया काम मिला
पिछले चार महीनों में WAPCOS और NPCC ने मिलकर ₹2114 करोड़ का नया व्यवसाय हासिल किया. 19 जनवरी 2026 तक कंपनी का कुल व्यवसाय बढ़कर ₹11,191 करोड़ हो गया, जो सितंबर 2025 में ₹8,989 करोड़ था.














