महिला आरक्षण को लागू करने की कवायद तेज, संसद के विशेष सत्र से पहले पीएम मोदी का बड़ा संदेश

सीटों के परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर उठ रही आशंकाओं को खारिज करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि केरलम और तमिलनाडु की एक भी लोकसभा सीट कम नहीं की जाएगी. उन्होंने इसे अफवाह बताते हुए कहा कि लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है.

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पीएम मोदी ने कहा कि माताओं बहनों का हक 40 साल से लटका हुआ है
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  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला उनकी सरकार का है
  • संसद का विशेष सत्र महिला आरक्षण से जुड़े कानूनों को पूरा करने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा
  • महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अतिरिक्त होंगी जिससे खासकर दक्षिण भारत के राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा
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पीएम मोदी ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला उनकी ही सरकार ने किया है. उन्होंने बताया कि इसी मकसद से बजट सत्र को पूरा करने के बजाय उसका विस्तार किया गया है और संसद 16, 17 और 18 अप्रैल को तीन दिनों के लिए फिर से बैठेगी. इस विशेष सत्र का मकसद महिला आरक्षण से जुड़े कानूनों को लेकर जरूरी प्रक्रिया पूरी करना है, ताकि इसका लाभ तय समय पर मिल सके.

2029 से लागू होगा 33% महिला आरक्षण

प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए कानून बनाया गया है, ताकि साल 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव से इसका लाभ मिलना शुरू हो जाए. उनका कहना था कि 33 प्रतिशत बहनें संसद में पहुंचें और जनप्रतिनिधि बनें, इसके लिए कानूनी प्रावधान जरूरी है. इसी वजह से संसद का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है, ताकि महिला आरक्षण से जुड़े कानूनों को आगे बढ़ाया जा सके.

दक्षिणी राज्यों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केरल, तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह झूठ फैला रहे हैं कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम करने वाले राज्यों की लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी. सरकार चाहती है कि संसद में कानून के जरिए यह सुनिश्चित किया जाए कि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा और तेलंगाना समेत किसी भी राज्य की लोकसभा सीटें कम न हों.

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महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटों का प्रावधान

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए जो सीटें तय की जाएंगी, वे अतिरिक्त सीटें होंगी. उन्होंने कहा कि इससे खासतौर पर दक्षिण भारत के राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा. इसी उद्देश्य से कानून में संशोधन के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है. सरकार चाहती है कि महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधान पूरी तरह स्पष्ट और मजबूत हों, ताकि किसी भी राज्य को नुकसान न हो.

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विपक्ष से सहयोग की अपील

प्रधानमंत्री ने बताया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं से इस मुद्दे पर बातचीत की गई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्षी दल इस विषय पर सरकार का साथ देंगे. उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे कांग्रेस, एलडीएफ और अन्य दलों पर दबाव बनाएं, ताकि महिलाओं के अधिकार से जुड़ा यह कानून निर्विरोध पारित हो सके. प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं का यह अधिकार पिछले 40 साल से लटका हुआ है और अब इसे 2029 के चुनाव से आगे नहीं बढ़ने देना चाहिए.

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सर्वसम्मति से कानून पास कराने पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जरूरी है कि महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन सर्वसम्मति से पारित हो, ताकि 2029 के चुनाव में ही माताओं और बहनों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाए. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि यह नारी शक्ति के हित से जुड़ा विषय है और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हिसाब‑किताब नहीं होना चाहिए. उन्होंने अपील की कि सभी दल खुलकर समर्थन करें और महिलाओं का विश्वास जीतने में भागीदार बनें.

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