- दक्षिण कोरिया के जेजू आइलैंड में भारतीय कंटेंट क्रिएटर सचिन अवस्थी को 38 घंटे हिरासत में रखा गया.
- भारतीय दूतावास ने जेजू वीजा वेवर स्कीम के तहत एंट्री न मिलने की शिकायतों के चलते सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी की.
- जेजू वीजा फ्री एंट्री केवल शॉर्ट‑टर्म टूरिज्म के लिए है और अंतिम निर्णय इमिग्रेशन अधिकारियों का होता है.
दक्षिण कोरिया के जेज़ू आइलैंड में भारतीय कंटेंट क्रिएटर सचिन अवस्थी की 38 घंटे तक हिरासत और एंट्री डिनायल के बाद, सियोल स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय यात्रियों के लिए सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है. दूतावास ने कहा कि समय‑समय पर भारतीय यात्रियों को जेज़ू के वीजा वेवर स्कीम के तहत एंट्री न मिलने या डिपोर्ट किए जाने की शिकायतें मिलती रही हैं.
वीजा वेवर स्कीम का मतलब ‘गारंटीड एंट्री' नहीं
एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया कि जेजू का वीजा‑फ्री एंट्री प्रोग्राम सिर्फ शॉर्ट‑टर्म टूरिज्म के लिए है. अंतिम निर्णय पूरी तरह जेज़ू एयरपोर्ट के इमिग्रेशन अधिकारियों का होता है और वीजा वेवर स्कीम एंट्री की गारंटी नहीं देती.
दूतावास ने दोहराया कि इस स्कीम के तहत आने वाले यात्री दक्षिण कोरिया के मुख्य भूभाग (Mainland Korea) में नहीं जा सकते. ऐसा करना अवैध है और भविष्य में ट्रैवल बैन लग सकता है.
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यात्रियों के लिए अनिवार्य दस्तावेज
इमिग्रेशन पर पूछताछ और संभावित एंट्री डिनायल को देखते हुए, भारतीय यात्रियों को ये दस्तावेज प्रिंटेड कॉपी के रूप में साथ रखना अनिवार्य बताया गया है:
- रिटर्न एयर टिकट
- पूरे ठहराव की होटल बुकिंग
- डे‑वाइज यात्रा कार्यक्रम
- पर्याप्त फंड का प्रमाण (बैंक स्टेटमेंट/अंतरराष्ट्रीय कार्ड/फॉरेक्स)
- कम से कम 6 महीने वैधता वाला पासपोर्ट
- ट्रैवल इंश्योरेंस (अनुशंसित)
- होटल/आवास का कॉन्टैक्ट विवरण
दूतावास ने चेतावनी दी कि यात्रा योजना स्पष्ट रूप से न बता पाने वाले यात्रियों को एंट्री डिनायल का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही, वित्तीय क्षमता साबित करना भी जरूरी है.
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सचिन अवस्थी का अनुभव: ‘क्रिमिनल जैसा व्यवहार'
सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर सचिन अवस्थी ने बताया कि उन्हें और उनकी पत्नी को जेज़ू पहुंचते ही हिरासत में ले लिया गया. 38 घंटे रोके रखा गया और वापस लौटने के लिए महंगा टिकट खरीदने को मजबूर किया गया. उन्होंने दावा किया कि उन्हें जेल जैसे कमरे में रखा गया, जहां न धूप थी न बाहर जाने की अनुमति. उनका कहना था, 'इमिग्रेशन का अधिकार है, लेकिन हमें अपराधी जैसा ट्रीट करने का हक उन्हें नहीं था.'
अगर एंट्री से इनकार हो जाए...
दूतावास ने स्पष्ट किया कि एंट्री न मिलने पर यात्री को अगली उपलब्ध फ्लाइट से वापस भेज दिया जाएगा और उड़ान समय के अनुसार डिटेंशन/होल्डिंग सेंटर में ठहराया जा सकता है.













