क्या चुनाव खत्म होने के बाद बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम, पेट्रोलियम मंत्रालय ने जारी किया स्पष्टीकरण!

पेट्रोल‑डीजल की कीमतों को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और खुदरा कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण मध्य‑पूर्व संकट और कच्चे तेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच जारी किया है.

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मिडिल ईस्ट संकट से तेल और गैस सप्लाई प्रभावित
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  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश के सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन का पर्याप्त भंडार होने की पुष्टि की
  • सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों की खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी तक स्थिर हैं और नहीं बढ़ाई गई
  • सरकार ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर दस रुपये की कटौती की है
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पेट्रोल‑डीजल की कीमतों को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है. मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMC) की खुदरा दुकानों पर ईंधन की नियमित खुदरा कीमतें अपरिवर्तित हैं.

मंत्रालय की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे समय पर सामने आया है, जब सोशल मीडिया पर यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं. इन अफवाहों के चलते कुछ इलाकों में खुदरा दुकानों पर अफरा‑तफरी का माहौल देखा गया और लोगों ने बड़ी मात्रा में पेट्रोल‑डीजल की खरीद शुरू कर दी थी.

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उत्पाद शुल्क में कटौती, कीमतें स्थिर

बुधवार को जारी बयान में पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा, “मध्य‑पूर्व संकट के कारण कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में असामान्य वृद्धि हुई है, लेकिन उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है.”
मंत्रालय ने बताया कि घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 11 अप्रैल 2026 की राजपत्र अधिसूचना के तहत डीजल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 55.50 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.

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मध्य‑पूर्व संकट से वैश्विक सप्लाई प्रभावित

मध्य‑पूर्व एशिया में जारी युद्ध और तनाव के कारण सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से तेल कार्गो जहाजों की आवाजाही बाधित हो रही है. इस समुद्री मार्ग से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है. आवाजाही पर असर पड़ने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके कारण कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. भारत अपनी कुल आवश्यकता का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का तेल आयात खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है.

कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड 63% उछाल

पेट्रोलियम मंत्रालय की Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य‑पूर्व एशिया में जारी अनिश्चितता के चलते 28 अप्रैल 2026 को भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 112.83 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ऊँचे स्तर पर पहुंच गई. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी. यानी 28 अप्रैल 2026 तक कच्चा तेल 43.82 डॉलर प्रति बैरल महंगा, यानी करीब 63.49 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

इसके अलावा, अप्रैल 2026 के दौरान 28 अप्रैल तक कच्चे तेल की औसत कीमत 114.13 डॉलर प्रति बैरल रही है। वहीं, मार्च 2026 में भी कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 113 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई थी.

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