चार दिनों में ही इतना ज्यादा महंगा हो चुका है डीजल, पेट्रोल के भी बढ़े दाम, क्या है वजह?

Fuel Price Hike : अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल बाजार में जो हो रहा है, उसके चलते अब घरेलू बाजारों में भी ईंधन तेल ने रुलाना शुरू कर दिया है. अभी आज मंगलवार को ही डीजल 25 से 27 पैसे महंगा हुआ है. पिछले पांच दिनों में आज डीजल में चौथी बार बढ़ोतरी की गई है.

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Crude Price : कच्चा तेल 3 सालों के रिकॉर्ड हाई पर, पेट्रोल-डीजल पर असर.
नई दिल्ली:

दो महीनों की शांति देखने के बाद एक बार फिर देश में पेट्रोल-डीजल के दामों (Petrol-Diesel Price) में बढ़ोतरी शुरू हो गई. इस साल मार्च-अप्रैल में ऐतिहासिक वृद्धि देख चुके ईंधन तेल के दामों में अभी अगस्त में कुछ राहत मिली थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल बाजार में जो हो रहा है, उसके चलते अब घरेलू बाजारों में भी ईंधन तेल ने रुलाना शुरू कर दिया है. अभी आज मंगलवार को ही डीजल 25 से 27 पैसे महंगा हुआ है. पिछले पांच दिनों में आज डीजल में चौथी बार बढ़ोतरी की गई है. इसके पहले 24, 26 और 27 को भी डीजल महंगा हुआ था. इन चार दिनों की बढ़ोतरी में ही डीजल लगभग 1 रुपये महंगा हो चुका है. वहीं, आज पेट्रोल के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं.

आज देश में पेट्रोल 20-22 पैसे प्रति लीटर तक महंगा हुआ है. पेट्रोल में 17 जुलाई, 2021 के बाद से अब जाकर बढ़ोतरी की गई है. ऊपर से दामों में और बढ़ोतरी की उम्मीद की सकती है. आने वाले दिनों में डीजल, पेट्रोल दोनों के दाम और बढ़ सकते हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत तीन साल के उच्चस्तर पर पहुंच गई है.

अब तक हुई कटौती का बढ़ोतरी से हिसाब बराबर

24 सितंबर से सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने तीन हफ्ते बाद कीमतों में वृद्धि का सिलसिला फिर शुरू किया है. उसके बाद से कुल मिलाकर, डीजल कीमतों में 1.45 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है, जबकि 18 जुलाई से पांच सितंबर के बीच कीमतों में कुल 1.25 रुपये प्रति लीटर की कमी हुई थी. उससे पहले आखिरी बार 15 जुलाई को डीजल के दाम बढ़े थे.

इस वजह से बढ़ सकते हैं और दाम

उद्योग सूत्रों का कहना है कि आगामी दिनों में डीजल के साथ पेट्रोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं. 24 सितंबर से ब्रेंट वायदा का दाम 78 डॉलर प्रति बैरल से अधिक चल रहा है. कच्चे तेल के दाम करीब तीन साल के उच्चस्तर पर हैं. इसकी वजह यह है कि वैश्विक स्तर पर उत्पादन प्रभावित होने से ऊर्जा कंपनियों को अपने भंडार से अधिक कच्चा तेल निकालना पड़ रहा है.

एक सूत्र ने कहा, ‘महामारी अंकुशों में ढील और टीकाकरण तेज होने के बाद कच्चे तेल की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है. जहां तक सप्लाई की बात है, तो ओपेक प्लस गठजोड़ उत्पादन अंकुशों को हटाने में जल्दबाजी नहीं दिखा रहा है. इससे बाजार में सप्लाई की स्थिति ठीक नहीं है.'

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