- केरल में सीपीएम के नेतृत्व वाली सरकार में व्यापक भ्रष्टाचार और बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न हो गई है.
- दिसंबर के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने 38.81% वोट प्राप्त कर बेहतर प्रदर्शन किया.
- 2021 के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ और एलडीएफ के वोट शेयर में केवल थोड़ा अंतर था.
NDTV PowerPlay Keralam : अप्रैल–मई में होने वाले केरल विधानसभा चुनाव से पहले NDTV Summit में कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि केरल में सीपीएम के नेतृत्व वाली सरकार में “व्यापक भ्रष्टाचार” फैला हुआ है. उन्होंने विश्वास जताया कि दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन से उत्साहित कांग्रेस इस बार राज्य में सत्ता में वापसी करेगी.
वेणुगोपाल ने बताया कि भले ही 2021 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन दोनों गठबंधन के वोट शेयर में अंतर बहुत कम था. पिछले चुनाव में यूडीएफ को 25.12% और एलडीएफ को 25.38% वोट मिले थे. यूडीएफ के वोटों में 0.66% और एलडीएफ के वोटों में 1.95% की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि एनडीए के वोटों में 2.55% की गिरावट आई, हालांकि भाजपा को 0.77% अधिक वोट मिले थे.
उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव की हार महामारी जैसे कुछ कारणों से हुई थी. वेणुगोपाल के अनुसार अब एलडीएफ सरकार के 10 साल बाद केरल की जनता बदलाव चाहती है. उन्होंने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार, अहंकार और बेरोजगारी अपने चरम पर हैं, और सरकारी परीक्षाओं में शीर्ष पर आने वालों को भी नौकरी नहीं मिल रही. यहां तक कि कम्युनिस्ट समर्थकों में भी यह भावना है कि मौजूदा सरकार उनकी नहीं लगती.
वेणुगोपाल ने बताया कि यही असंतोष दिसंबर के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस के शानदार प्रदर्शन का कारण बना, जिसमें पार्टी और सहयोगियों को 38.81% वोट मिले और पंचायतों से लेकर नगर निगमों तक अधिकांश स्थानों पर बढ़त मिली. तीन बार सांसद और तीन बार विधायक रहे वेणुगोपाल ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि पद उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनकी प्राथमिकता पार्टी और गठबंधन को चुनाव जिताना है.
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