- पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल की अवधि बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया
- सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा द्वारा गलत आधार कार्ड दस्तावेज़ प्रस्तुत करने पर कड़ी फटकार लगाई
- पवन खेड़ा के वकील ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की वजह उनकी ससुराल का हैदराबाद होना बताया
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के वकीलों द्वारा दी गई कोई दलील सुप्रीम कोर्ट में काम नहीं आई. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आरोप लगाने के चलते एफआईआर झेल रहे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांजिट बेल की अवधि मंगलवार तक बढाने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पवन खेड़ा गुवाहाटी हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करें. पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के बुधवार को दिए उस आदेश को वापस लेने की मांग की थी, जिसमें कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा को फटकार भी लगाई. जानिए कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं.
सुप्रीम कोर्ट ने गलत डॉक्यूमेंट्स पर खेड़ा को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट अग्रिम जमानत की सुनवाई मे सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित ना हो. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में गलत डॉक्यूमेंट्स (आधार कार्ड ) दाखिल करने पर पवन खेड़ा को फटकार भी लगाई. पवन खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बिना मुझे सुने एकतरफा आदेश बुधवार को पारित कर दिया. इस पर कोर्ट ने सिंघवी से कहा कि आप अपना डॉक्यूमेंट्स देखिए, जिस आधार कार्ड के आधार पर आपका पता अलग है. उसके जरिए आपने मिसलीड किया है. आपने तेलंगाना में याचिका दाखिल क्यों की, असम क्यों नहीं गए?
सिंघवी : हैदराबाद में खेड़ा की ससुराल, इसलिए...
सिंघवी ने कहा कि खेड़ा को मंगलवार तक ट्रांजिट बेल चाहिए, ताकि वो असम जा सकें. तेलंगाना पिटीशन जल्दबाजी में फाइल की गई थी. कोर्ट में यह बताया गया था और एक सही डॉक्यूमेंट फाइल किया गया था. पवन खेड़ा की पत्नी तेलंगाना में MLA कैंडिडेट रही हैं. उनका एफिडेविट उसी दिन फाइल किया गया था. सिंघवी ने कहा कि जब सीबीआई ने कहा, इस डाक्यूमेंट्स के बारे में, तब सही फाइल कर दिया गया. ये डाक्यूमेंट्स जल्दबाजी में याचिका में दाखिल किया गया था, इसलिए ऐसा हो गया. मैं मंगलवार तक ही ट्रांजिट बेल बढ़ाने की मांग कर रहा हूं. सिंघवी ने कहा कि हैदराबाद में उनकी ससुराल है, वो हमेशा वहां जाते रहते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो आपने ट्रांजिट बेल पिटीशन हाई कोर्ट में फाइल की है. उसमें आपने ये सब बातें कहां बताई हैं कि आधार पर गलत पता लगा है. सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट में करेक्शन किया गया था. डॉक्यूमेंट सौंप दिया गया था और जज ने इसे रिकॉर्ड किया. कोर्ट ने कहा कि ऐसा तब नहीं हो सकता, जब आपने जाली और बनावटी डॉक्यूमेंट फाइल किए हों. हमने इसकी भी जांच की है. हम कह रहे हैं कि कंडक्ट आप कह रहे हैं कि आप फेयर रहे हैं. हम कह रहे हैं कि नहीं है.
सिंघवी: क्या पवन खेडा कोई बड़ा क्रिमिनल है?
पवन खेड़ा की ओर से वकील सिंघवी ने कहा कि आज शुक्रवार है, हम सोमवार को (असम में) याचिका फाइल कर रहे हैं. कोर्ट क्या मंगलवार तक प्रोटेक्शन नहीं दे सकती? क्या पवन खेडा कोई बड़ा क्रिमिनल है? अगर आप मानते है कि आपको गुमराह किया गया. मैंने गलत डॉक्यूमेंट फाइल करके एक छोटी सी गलती की. कोर्ट ने कहा कि आप कैसे कह सकते हैं कि यह एक छोटी सी गलती है? सिंघवी ने कहा- क्योंकि उसी दिन, उसी सुनवाई में, हमने सही डॉक्यूमेंट फाइल किया था.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: यह प्रक्रिया का पूर्ण दुरुपयोग
असम सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह क्षेत्राधिकार की कमी का मामला है और खेड़ा की याचिका में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि उन्होंने तेलंगाना उच्च न्यायालय में याचिका क्यों दायर की. मेहता ने कहा, "अपराध असम में हुआ है. प्राथमिकी असम में दर्ज की गई है. यह अपनी सुविधा के हिसाब से 'अनुकूल मंच चुनने' का मामला प्रतीत होता है.' उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक का अनुरोध करते हुए कहा, "यह प्रक्रिया का पूर्ण दुरुपयोग है. उन्होंने (खेड़ा ने) यह नहीं बताया कि वह असम क्यों नहीं जा रहे और असम क्यों नहीं जा सकते." मेहता ने कहा कि हाई कोर्ट इस बात को नजरअंदाज कर गया कि खेड़ा के खिलाफ लगाए गए आरोपों में से एक अपराध के लिए 10 साल तक की सजा हो सकती है. आधार कार्ड के पते के मुताबिक, उनकी पत्नी दिल्ली में रहती हैं.
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यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए, जिसको लेकर असम में खेडा के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट में ट्रांजिट अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें कुछ राहत दी थी. हालांकि, इस फैसले पर असम सरकार ने आपत्ति जताई और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद सर्बेच्च नयायलय ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी.
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