पटना NEET छात्रा मौत केस : पीड़िता के वकील का दावा- खुल रही है सिस्टम की पोल, क्यों अहम है 12 मार्च का दिन

चर्चित नीट छात्रा मामले में वकील ने कहा कि परत‑दर‑परत जांच करने वाले अधिकारियों की वास्तविकता कोर्ट में उजागर हो रही है.

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  • नीट छात्रा मामले में आरोपी मनीष रंजन की जमानत पर अदालत ने सुनवाई की और अगली तारीख तय की.
  • पीड़ित पक्ष के वकील एस.के. पांडेय ने जांच अधिकारियों की रिपोर्ट को आत्महत्या मानने पर सवाल उठाए.
  • छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गुप्तांगों पर चोट और शरीर पर नाखूनों से खरोंच के निशान पाए गए.
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चर्चित नीट छात्रा मामले में आरोपी मनीष रंजन की जमानत पर बुधवार को अदालत में सुनवाई हुई. पीड़ित पक्ष के वकील एस.के. पांडेय ने कोर्ट में अपना पक्ष विस्तार से रखा. मामले की पहले भी सुनवाई हो चुकी है, लेकिन कुछ कानूनी प्रक्रियाओं और आवश्यक दस्तावेजों के अधूरे होने के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी. अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी.

वकील पांडेय ने कहा कि परत‑दर‑परत जांच करने वाले अधिकारियों की वास्तविकता कोर्ट में उजागर हो रही है. उन्होंने बताया कि जांच अधिकारी इस मामले को आत्महत्या मानकर प्रस्तुत कर रहे थे, जबकि आज कोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई और पीड़ित पक्ष ने अपनी दलीलें मजबूती से रखीं. अदालत अब 12 मार्च को आगे की सुनवाई करेगी, जो मामले के लिए अहम मानी जा रही है.

क्या है पूरा मामला?

NEET छात्रा परीक्षा की तैयारी के लिए निजी हॉस्टल में रह रही थी. कई दिनों तक कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई. उसके परिवार ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा था कि अधिकारी मामले को दबा रहे हैं. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, 'छात्रा के उन कपड़ों की फॉरेंसिक रिपोर्ट में वीर्य के अंश पाए गए हैं, जो उसने अस्पताल में भर्ती होने के समय पहने थे. ये कपड़े छात्रा के परिवार वालों ने 10 जनवरी को उपलब्ध कराए थे और पुलिस ने इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा था.

शरीर पर नाखूनों से खरोंच के निशान

छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके गुप्तांगों पर चोट के निशान और शरीर पर नाखूनों से खरोंच के निशान पाए गए थे. उसकी मौत के बाद पटना में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद पुलिस ने हॉस्टल के मालिक को गिरफ्तार कर लिया. डॉक्‍टरों की शुरुआती जांच में यह निष्कर्ष निकला कि उसकी मौत नींद की गोलियों के अत्यधिक सेवन के कारण हुई और वह टाइफाइड से भी पीड़ित थी. हालांकि, छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह निष्कर्ष भी निकाला गया कि घटना के पीछे ‘यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.'

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