पटना हाईकोर्ट ने BPSC परीक्षा दोबारा कराने की मांग खारिज की

BPSC Exam Verdict: बीपीएससी सिविल प्रारंभिक परीक्षा दोबारा कराने की मांग को पटना हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह परीक्षा 13 दिसंबर 2024 को आयोजित की गई थी.

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पटना हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए. (फाइल)

पटना :

BPSC Exam Verdict: पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) ने 70वीं बीपीएससी सिविल प्रारंभिक परीक्षा को लेकर शुक्रवार को बड़ा फैसला दिया है. हाई कोर्ट ने बीपीएससी सिविल प्रारंभिक परीक्षा दोबारा कराए जाने की याचिकाओं को खारिज कर दिया है. यह उन उम्‍मीदवारों के लिए बड़ा झटका है जो परीक्षा दोबारा कराए जाने की मांग कर रहे थे. साथ ही हाई कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार और बीपीएससी को बड़ी राहत मिली है. बीपीएससी सिविल प्रारंभिक परीक्षा दोबारा कराए जाने की मांग पर प्रदेश में छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया था. 

हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई पूरी कर 19 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था.  शुक्रवार को अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि परीक्षा रद्द नहीं होगी. हालांकि, कोर्ट ने निर्देश दिया कि आगे से परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए. इसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी के गठन का भी आदेश दिया गया है. 

हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे: गुरु रहमान

इस आंदोलन की अगुवाई करने वाले शिक्षक नेता गुरु रहमान ने कहा कि हम इसे नहीं मानेंगे और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. साथ ही कई अन्‍य छात्रों ने भी सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख करने की बात कही है. 

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यह परीक्षा 13 दिसंबर 2024 को आयोजित की गई थी और इसे लेकर गड़बड़ी के आरोप लगे थे. अभ्यर्थियों ने इस मामले को हाई कोर्ट में उठाते हुए परीक्षा को रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने की मांग की थी. इसके अलावा, आयोग ने 4 जनवरी 2025 को पटना के बापू परीक्षा केंद्र पर दोबारा परीक्षा कराई थी, जिस पर भी कई उम्मीदवारों ने आपत्ति जताई थी. 

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छात्रों ने किया था जमकर प्रदर्शन

बता दें कि इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था और पटना की सड़कों पर छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने छात्रों का साथ दिया था और कई दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे थे. उनके अलावा कई और नेताओं और बिहार के प्राइवेट संस्थान के शिक्षकों ने अभ्यर्थियों का साथ दिया था और उनके लिए सड़कों पर आंदोलन किए थे. 

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