चीन के प्यार और गुस्से का नाम है 'पांडा', समझिए ड्रैगन की 'PD' पॉलिटिक्स क्या है

चीन ने जापान से पांडा के दो शावकों को वापस मंगा लिया है. ये दोनों शावक सुरक्षित चीन पहुंच गए हैं. पांडा का चीनी विदेश नीति में एक अहम स्थान है. आइए जानते हैं कि चीन अपने हितों को साधने के लिए पांडा का इस्तेमाल कैसे करता है.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
नई दिल्ली:

जापान ने पांडा के दो जुड़वा शावकों शियाओ शियाओ और लेई लेई को चीन को वापस लौटा दिया है. ये दोनों जापान के टोक्यो के उएनो चिड़ियाघर में रह रहे थे.इनका जन्म भी जून 2021 में जापान में ही हुआ था. शियाओ शियाओ और लेई लेई के माता-पिता का नाम शियाओ शियाओ और लेई लेई है. ये दोनों दोस्ती के दूत के रूप में फरवरी 2011 से सितंबर 2024 तक जापान में रहे. इस पांडा दंपति ने जून 2017 में शियांग शियांग नाम के एक मादा पांडा को जन्म दिया था.चीन यह कदम जापान के साथ बिगड़ते रिश्ते के बीच उठाया है. साल 1972 के बाद से यह पहली बार है कि जापान में इस समय कोई पांडा नहीं है. पांडा केवल चीन में ही पाए जाते हैं. उन्हें दोस्ती का दूत माना जाता है. इसलिए चीन पांडा का इस्तेमाल कूटनीतिक हथियार के रूप में करता है. सभी पांडा पर चीन का अधिकार है. 

चीन में पांडा की आबादी

चीन ने पांडा के संरक्षण के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए. इसकी वजह से अब वो 'लुप्तप्राय' की श्रेणी से निकलकर 'संवेदनशील'श्रेणी में आ गए हैं. चीन सरकार के मुताबिक 1980 के दशक में पांडा की आबादी करीब 11 सौ थी. यह 2025 में बढ़कर 19 सौ हो गई है. इनमें दुनिया के दूसरे देशों के चिड़ियाघरों और प्रजनन केंद्रों में रखे गए 808 पांडा भी शामिल हैं. चीन 1990 के दशक से 20 देशों के 26 संस्थानों से सहयोग बढ़ाया है. इसका परिणाम यह हुआ है कि चीन से बाहर 71 पांडा का जन्म हुआ है.

चीन की पांडा कूटनीति

चीन 1949 में जनवादी गणराज्य की स्थापना के बाद से पांडा का इस्तेमाल कूटनीति के लिए कर रहा है. वह पांडा के जरिए अपनी छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करने की कोशिश करता है. इस नीति के तहत चीन विदेशी चिड़ियाघरों को पांडा उपहार में देता है. सबसे पहले 1957 में चीन के तत्कालीन नेता माओ जेदोंग ने सोवियत संघ को सोवियत क्रांति की 40वीं वर्षगांठ पर 'पिंग पिंग' नाम का पांडा उपहार में दिया था. चीन ने 1959 में एक और पांडा सोवियत संघ भेजा. उसने  1965 से 1980 के बीच उत्तर कोरिया को पांच पांडा उपहार में दिए. इसका मकसद समाजवादी देशों से रिश्तों को मजबूत करना था. 
अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 1972 में चीन की ऐतिहासिक यात्रा की थी. इसके बाद चीन ने लिंग लिंग और हसिंग हसिंग नाम के दो पांडा अमेरिका को उपहार में दिए.चीन-अमेरिका संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना गया था. यह चीन की विदेश नीति की दिशा में भी एक बड़े बदलाव का सूचक था. उसी साल चीन ने पश्चिम जर्मनी को भी पांडा उपहार में दिए थे. चीन ने जापान, फ्रांस, ब्रिटेन और स्पेन जैसे देशों को भी पांडा उपहार में दिए. लेकिन 1984 के बाद पांडा की घटती संख्या को देखते हुए चीन ने पांडा उपहार में देना बंद कर दिया. इसके बाद वो पांडा को उधार देने लगा. 

चीन आमतौर पर पांडा के जोड़े को 10 साल के लिए विदेशी चिड़ियाघरों को देता है. इसके लिए वह सालाना करीब 10 लाख डॉलर तक की फीस भी लेता है. पांडा को रखना महंगा शौक होता है. लेकिन पांडा की लोकप्रियता की वजह से बड़ी संख्या में लोग उसे देखने के लिए लोग चिड़ियाघर आते हैं. इससे चिड़ियाघरों की आमदनी बढ़ती है. उधार की अवधि खत्म होने पर पांडा को चीन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में वापस भेज दिया जाता है. विदेश में पैदा हुए पांडा शावक भी दो से चार साल की उम्र के बाद चीन वापस लौट आते हैं. वहां उन्हें प्रजनन कार्यक्रम में शामिल किया जाता है.जापान से वापस बुलाए गए पांडा की भी उम्र चार साल ही है. 

Advertisement

चीनी पांडा शियाओ शियाओ और लेई लेई को विदा करने के लिए आए जापानी लोग.

व्यापारिक समझौतों का पांडा से रिश्ता

चीन अपने व्यापारिक साझेदारों को पांडा देकर पुरस्कृत करता है.ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की 2013 की एक रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया को पांडा देने का समय इन देशों के साथ हुए यूरेनियम सौदों और बड़े व्यापारिक समझौतों से मेल खाता है. सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों के साथ हुई पांडा कूटनीति भी मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के समय हुए.चीन ने 2009 में पांडा देने की पेशकश ऑस्ट्रेलिया को भी की थी. दरअसल उस साल ऑस्ट्रेलिया चीन को यूरेनियम बेचने पर सहमत हुआ था. 

चीन पांडा का इस्तेमाल अपनी नाराजगी जताने के लिए भी करता है. साल 2010 में चीन ने अमेरिका में जन्मे ताई शान और मेई लान नाम के दो पांडा को वापस बुला लिया था. उस समय चीन ने अमेरिका को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से राष्ट्रपति बराक ओबामा की मुलाकात को लेकर चेतावनी दी थी. इसकी अनदेखी कर ओबामा ने दलाई लामा से मुलाकात की थी. अमेरिका ने अप्रैल 2023 में या या नाम के पांडा को चीन को वापस कर दिया था. या या को चीन ने अमेरिका को 20 साल के लिए उधार पर दिया था. अमेरिका ने नवंबर 2024 में तीन और पांडा को चीन को वापस लौटा दिए. जापान से पांडा के दो शावकों की वापसी भी तनातनी की खबरों के बीच हुई है. दरअसल जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो जापान सैन्य रूप से हस्तक्षेप करेगा. जापान से पांडा चीन पहुंच गए हैं. इसके बाद चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि जापानी लोग पांडा देखने के लिए चीन आ सकते हैं. 

Advertisement

ये भी पढ़ें: SWAT कमांडो क्या होते हैं? जिसमें काम करने वाली काजल की डंबल मारकर हुई हत्या

Featured Video Of The Day
Iran Israel War | इजरायली मिसाइलों और बमों से दहले Gaza और Lebanon | BREAKING NEWS
Topics mentioned in this article