- कानपुर के कारोबारी शुभम द्विवेदी पहलगाम में आतंकियों के हमले में मारे गए 26 लोगों में शामिल थे
- उनकी पत्नी ऐशन्या द्विवेदी इस दर्दनाक घटना को कभी भुला नहीं पाईं और भावुक हो जाती हैं
- ऐशन्या ने मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा देने की मांग की है और सम्मान की बात कही
कानपुर के कारोबारी शुभम द्विवेदी उन 26 लोगों में थे, जिनकी ठीक एक साल पहले पहलगाम में आतंकी हमले में मौत हो गई थी. पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों ने 22 अप्रैल की दोपहर को कत्लेआम मचाया था और 26 लोगों की बर्बरता से हत्या कर दी थी. शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी आज भी उन पलों को याद करके भावुक हो उठती हैं. ऐशान्या ने कहा कि यह घटना हमारी जिंदगी की ऐसी घटना है जिससे न कभी बाहर निकला जा सकता है, न ही कभी भी भूला जा सकता है और न ही कभी भी समय के साथ इसका दर्द कम हो सकता है.
NDTV से बात करते हुए ऐशान्या ने पहलगाम आतंकी हमले को याद करते हुए उस मंजर का भी जिक्र किया, जब गोली खाने के बाद उनके पति शुभम उनकी ही गोद में खून से लथपथ हालत में गिरे थे. उन्होंने यह भी कहा कि इस हमले में मारे गए लोगों को सम्मान देने के लिए इन्हें शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए.
ऐशान्या ने कहा, 'ये जिंदगी को पलट देने वाली घटना है. इससे न तो बाहर निकला जा सकता है, न भूला जा सकता है और न कभी भी समय के साथ इसका दर्द कम हो सकता है.' उन्होंने कहा कि 'उस दिन हम भी हो सकते थे. लेकिन भगवान ने हमें छोड़ा है तो किसी कारण से छोड़ा होगा. अब बस लाइफ को जीना है. भगवान जो करवा रहे हैं वो करती जा रही हूं. लोगों की जितनी मदद हो पा रही है, कर रही हूं'
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'हर हिंदुस्तान को याद रखना चाहिए'
ऐशान्या ने पहलगाम अटैक को हिंदू नरसंहार बताया है. उन्होंने कहा कि 'पहलगाम में हुए उस हिंदू नरसंहार को याद दिलाने के लिए मुझे किसी से भी बात करनी पड़ी, तो मैं हर बार करूंगी. क्योंकि ये भूल जाना बहुत आसान है और याद करवाते रहना बहुत मुश्किल है. सभी लोगों को उन 26 लोगों को याद रखना चाहिए. खासकर वो लोग जिन्होंने हिंदू बोलकर अपने शरीर पर गोलियां खाई हैं, हर हिंदुस्तानी को ये याद रखना चाहिए.'
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कैसा था उस वक्त का मंजर?
उस भयानक मंजर को याद करते-करते आज भी ऐशान्या की आंखें भर आती हैं. उन्होंने कहा कि 'शुभम का आखिरी जो चेहरा था, वो मेरे दिमाग से नहीं गया है. गोली मारी थी तो आधा फेस नहीं था. मेरे सामने वो चीज हुई. और शुभम मेरे बगल में बैठे थे और मेरे ऊपर ही गिरे थे. मैं उनके खून से सन गई थी. मैंने इतना खून देखा है, वो मैं कभी नहीं भूल सकती.'
उन्होंने कहा कि 'अब हो गया है एक साल, उस बारे में बात करते-करते आंख में आंसू नहीं आते, लेकिन मुझे पता है जब मैं अकेले बैठकर सोचती हूं न तो मेरी रूह कांप जाती है.'
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पहलगाम में मारे गए लोगों को मिले शहीद का दर्जा
पहलगाम अटैक की बरसी पर ऐशान्या द्विवेदी बुधवार को कानपुर में एक प्रोग्राम भी करने जा रही हैं. यह प्रोग्राम उन सभी 26 लोगों की याद में किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि अभी तक मेरी एक ही मांग रही है कि उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए. उन्होंने साफ किया कि कि उनका मतलब आर्मी या डिफेंस के लोगों को जो शहीद का दर्जा मिलता है, वैसा नहींहै.
ऐशान्या ने कहा, 'एक आपके देश के वासी किसी को धर्म टारगेट करके मारा जा रहा है और कहा जा रहा है कि जाओ जाकर मोदी को बता दो तो वो हमारे प्रधानमंत्री पर अटैक था, जो मासूमों ने अपने ऊपर लिया है.' उन्होंने कहा कि इस हमले में मारे गए लोगों को सही सम्मान देकर हिंदुस्तान दुनिया में एक मिसाल पेश कर सकता है.













