- ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 247 अचल संपत्तियों को 10,021.46 करोड़ रुपये मूल्य के लिए अस्थायी रूप से अटैच
- इस मामले में अटैच की गई संपत्तियां SAS नगर, रूपनगर, ज़िर्कपुर और मोहाली में हैं
- CBI की FIR 2014 में दर्ज हुई थी जिसमें 33 आरोपियों के खिलाफ अवैध कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाने का आरोप है
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PACL मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 247 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है, जिनकी कीमत 10,021.46 करोड़ रुपये है. मूल्य और संपत्तियों की संख्या, दोनों के लिहाज से इसे अब तक का सबसे बड़ा एकल प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) माना जा रहा है. यह कार्रवाई दिल्ली जोनल ऑफिस‑II ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की. एजेंसी के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियां SAS नगर, रूपनगर, ज़िर्कपुर और मोहाली में हैं और इनका संबंध PACL लिमिटेड और उसकी सहायक इकाइयों द्वारा संचालित कथित कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम से जुड़े बड़े वित्तीय धोखाधड़ी से है.
CBI की FIR और चार्जशीट के आधार पर जांच
जांच 19 फरवरी 2014 को CBI द्वारा दर्ज FIR पर आधारित है, जो BNS की धारा 120‑B और 420 के तहत सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर दर्ज हुई थी. बाद में CBI ने 33 आरोपियों व्यक्ति और कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिन पर अवैध कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम चलाने का आरोप है. जांचकर्ताओं का आरोप है कि 48,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम देशभर के लाखों निवेशकों से कृषि भूमि की बिक्री और विकास के नाम पर जुटाई गई. निवेशकों से कैश डाउन पेमेंट और किस्तों के जरिए निवेश कराया गया और उनसे एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी व अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए. ज्यादातर मामलों में वादा किया गया भूखंड उपलब्ध नहीं कराया गया और लगभग ₹48,000 करोड़ अब भी अदायगी से बकाया हैं.
SEBI की लोढ़ा कमेटी और आगे की विसंगतियां
2 फरवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने सेबी (SEBI) को पूर्व CJI आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का निर्देश दिया, ताकि PACL की भूमि की नीलामी और प्राप्त राशि का निवेशकों को वितरण सुनिश्चित किया जा सके. हालांकि, आगे की जांच में यह सामने आया कि निवेशकों के धन से खरीदी गई भूमि की अवैध बिक्री, अतिक्रमण और दुरुपयोग जारी रहे. अतिरिक्त रूप से पंजाब विजिलेंस ब्यूरो, जवाहर सर्कल थाने (जयपुर) और अत्तिबेले थाने (बेंगलुरु) में तीन FIR दर्ज हुईं. इन मामलों में की गई तलाशी के दौरान ब्लैंक सेल डीड, साइंड चेकबुक्स और पहचान संबंधी दस्तावेज बरामद हुए, जो अपराध से प्राप्त धन को हड़पने/हटाने और संपत्तियों के निस्तारण के प्रयासों की ओर संकेत करते हैं.
ECIR, प्रॉसिक्यूशन कम्प्लेंट और अदालत की संज्ञान
ED ने 2016 में ECIR दर्ज की और 2018 में प्रॉसिक्यूशन कम्प्लेंट दाखिल की. इसके बाद 2022, 2025 और 2026 में सप्लीमेंट्री कम्प्लेंट्स दायर की गईं. स्पेशल PMLA कोर्ट अब तक दाखिल सभी शिकायतों पर संज्ञान ले चुकी है. अटैचमेंट के साथ केस में चल‑अचल संपत्तियों का कुल अटैचमेंट लगभग ₹17,610 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें देश और विदेश की संपत्तियां शामिल हैं, आगे की जांच जारी है.













