- असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा ने 'मियां' को लेकर विवादित बयान दिया, जिससे सियासत गर्मा गई है.
- कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने असम सीएम के बयान को संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला बताया है.
- असम सीएम ने कहा कि उनका बयान नहीं बल्कि कोर्ट के शब्द हैं और अवैध प्रवासियों की समस्या पर आधारित है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के 'मियां' वाले बयान पर सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस, CPM सहित अन्य विपक्षी दल इस बयान के लिए असम सीएम पर हमलावर है. इस बीच असम CM हिमंता बिस्वा सरमा ने विपक्ष के हमले का जवाब देते हुए कहा कि यह मेरे नहीं कोर्ट के शब्द हैं. दरअसल बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य में बांग्लादेशी मियां रहते हैं और बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ऐसे विदेशियों के खिलाफ पांच लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई हैं. मालूम हो कि मियां मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसे अपमानजनक शब्द भी माना जाता है. गैर-बांग्ला भाषी लोग आमतौर पर उन्हें बांग्लादेशी प्रवासी के रूप में पहचानते हैं.
कांग्रेस ने कहा- यह संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला
असम सीएम के इस बयान पर सियासी बयानबाजी शुरू हुई. कांग्रेस ने भी हिमंता बिस्वा सरमा के बयान का विरोध करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, "हिमंता बिस्वा सरमा संविधान की शपथ लेकर संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं और देश में नफरत के बीज बो रहे हैं. ये BJP-RSS की नफरती सोच है. ये बयान न सिर्फ बेहुदा है, बल्कि बाबा साहेब के संविधान और हमारी गंगा-जमुनी तहजीब पर सीधा हमला है, जिसने हर भारतीय को समानता का हक दिया है. हिमंता बिस्वा सरमा की इस शर्मनाक करतूत के लिए भाजपा को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए."
इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष ने भी बोला हमला
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के 'मियां' वाली टिप्पणी पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान गैर-संवैधानिक है. इसलिए उन्हें कुर्सी पर बैठने का अधिकार नहीं है. साजिद रशीदी ने कहा, "हिमंता बिस्वा सरमा एक विवादित नाम और मुख्यमंत्री हैं, जो अक्सर गैर-संवैधानिक बयान देते हैं. देश का संविधान धर्मनिरपेक्ष है और यह अनिवार्य करता है कि कोई भी मुख्यमंत्री या मंत्री किसी के प्रति बिना किसी भेदभाव के काम करने की शपथ ले. लेकिन ये खुलेआम कह रहे हैं कि अगर कोई मुस्लिम रिक्शेवाला हो तो पांच रुपए की जगह चार रुपए दो. उन्हें आर्थिक तौर पर कमजोर करो."
असम सीएम का सोशल मीडिया पोस्ट.
विपक्ष के हमले पर असम सीएम ने क्या कहा?
विपक्ष के हमले के बाद असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट लिखते हुए कहा- यह मेरी भाषा नहीं है, मेरी कल्पना नहीं है, और न ही कोई राजनीतिक बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात है. ये कोर्ट के अपने शब्द हैं. असम पर चुपचाप और धोखे से हो रहा जनसांख्यिकीय हमला निचले असम के भू-रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों के नुकसान का कारण बन सकता है."
हमारा प्रयास किसी धर्म या भारतीय नागरिक के खिलाफ नहींः हिमंता
असम सीएम ने आगे लिखा- अवैध प्रवासियों की आमद इन जिलों को मुस्लिम बहुल क्षेत्र में बदल रही है. तब यह सिर्फ समय की बात होगी जब बांग्लादेश के साथ उनके विलय की मांग की जा सकती है. निचले असम के नुकसान से पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का बाकी भारत से संपर्क टूट जाएगा और उस क्षेत्र के समृद्ध प्राकृतिक संसाधन देश के हाथ से निकल जाएंगे. हमारा प्रयास किसी धर्म या किसी भारतीय नागरिक के खिलाफ नहीं है. हमारा प्रयास असम की पहचान, सुरक्षा और भविष्य की रक्षा करना है.
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