ओपन एआई सीईओ सैम अल्टमैन ने कहा कि एआई ने एक साल से थोड़े ही समय में हाई स्कूल के मैथ्स से लेकर रिसर्च स्तर के मैथ्स और फिजिक्स के नए प्रश्नों को हल करने तक का सफर तय कर लिया है. एआई कोडिंग और एप्लिकेशन निर्माण के तरीके को पूरी तरह से बदल रहा है.
भारतीय आईटी पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा
सैम अल्टमैन ने कहा कि भारत कोडेक्स के लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार है. भारत एआई का कंज्युमर होने से आगे बढ़कर अब निर्माण के क्षेत्र में अभूतपूर्व ऊर्जा का प्रदर्शन कर रहा है. भारत द्वारा बनाए जा रहे छोटे मॉडल काफी बेहतरीन हैं. इसका भारतीय आईटी पर बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है, लेकिन लोग उच्च स्तर पर अब काम करेंगे. आईटी से अपेक्षाएं बढ़ेंगी, और प्रतिभाओं को इसके अनुरूप ढलना होगा. बुनियादी ढांचा, रोजगार, लाभों का उचित वितरण और सुरक्षा प्रत्येक देश के लिए महत्वपूर्ण हैं.
सरकारी समर्थन आवश्यक
ओपन एआई सीईओ ने आगे कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र एआई के नेतृत्व में आगे बढ़े. भारत को एआई के सभी पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए. वर्टिकल एकीकरण का लाभ उठाना चाहिए. यह दुनिया की अब तक की सबसे जटिल और महंगा इंफ्रा प्रोजेक्ट है. एआई को सही मायने में लोकतांत्रिक बनाने के लिए सरकारी समर्थन आवश्यक है. मुझे नहीं लगता कि मैं (ओपन एआई) बड़ी टेक कंपनियों का हिस्सा हूं. एआई दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों में से एक बन जाएगा.
चीन आगे पर बहुत नहीं
सैम अल्टमैन ने कहा कि रोबोट जैसे कुछ क्षेत्रों में चीन काफी आगे है, लेकिन कुछ में नहीं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का लोकतांत्रिक संस्करण संभव है, जिससे आर्थिक शक्ति का विकेंद्रीकरण हो सकता है. यह पहले से ही छोटे-छोटे स्टार्टअप्स की बढ़ती ताकत में दिखाई दे रहा है. इस मॉडल को व्यापक बनाने के लिए गूगल के अथक प्रयासों की सराहना करते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हमें परमाणु और सौर ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना होगा. मगर उन्होंने अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने को बेवकूफी बताया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कुछ बच्चों को कम बुद्धिमान बना रहा है. उनका मानना है चीन से असली डर इंटरनेट पर एक नए प्रकार के युद्ध का है.














