ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के प्रतिनिधि अश्विनी वैष्णव से मिले, कई मुद्दों पर चर्चा, जानें सरकार ने दिए क्या निर्देश

बैठक का मकसद स्टेकहोल्डर्स को यह बताना था कि इस कानून में उनके लिए क्या है. जल्द इस कानून से संबंधित नियम बनाए जाएंगे और यह एक सतत प्रक्रिया है. नियमों से ज्यादा, इसका मकसद ऑनलाईन गेमिंग से जुड़े उद्योग को कानून और उसके परिणामों की जानकारी देना था.

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  • केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ ई-स्पोर्ट्स पर चर्चा की.
  • बैठक में उपयोगकर्ताओं की आर्थिक सुरक्षा और उद्योग में व्यवस्थित बदलाव के मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया.
  • सरकार ने उद्योग द्वारा कानून के पालन के लिए उठाए गए ठोस कदमों को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया.
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नई दिल्ली:

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की.इसमें ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को प्रोत्साहन देने पर विशेष रूप से चर्चा हुई. साथ ही, उपयोगकर्ताओं के पैसों की सुरक्षा और उद्योग में व्यवस्थित बदलाव (ऑर्डरली ट्रांज़िशन) जैसे अहम मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया.

सरकारी सूत्रों ने बताया कि बैठक में यह भी नोट किया गया कि उद्योग ने कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं.

इससे पहले शुक्रवार को भी गेमिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय आईटी सचिव के साथ बैठक की थी. शुक्रवार की बैठक में गेमिंग कानून को लेकर नियमों और आगे की दिशा को लेकर चर्चा हुई. सचिव स्तर की इस बैठक में गेमिंग प्लेटफार्म के प्रतिनिधियों के अलावा बैंकिंग और फिनटेक प्रतिनिधि भी शामिल थे.

इस बैठक का मकसद स्टेकहोल्डर्स को यह बताना था कि इस कानून में उनके लिए क्या है. जल्द इस कानून से संबंधित नियम बनाए जाएंगे और यह एक सतत प्रक्रिया है. नियमों से ज्यादा, इसका मकसद ऑनलाईन गेमिंग से जुड़े उद्योग को कानून और उसके परिणामों की जानकारी देना था.

सरकार प्रोग्रेसिव कानून के पक्ष में है, लेकिन उसे ऐसे मुद्दों पर जनभावनाओं के साथ ही स्टेकहोल्डर्स का हित भी ध्यान में रखना है. शुक्रवार की बैठक में आगे का रास्ता क्या होगा, इस पर हितधारकों के साथ चर्चा की गई.

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दरअसल ये एक लगातार चल रही परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है और ई-स्पोर्ट्स को लेकर खेल मंत्रालय के साथ भी परामर्श और चर्चा हुई थी. बैठक का मुख्य उद्देश्य भुगतान मध्यस्थों (payment intermediaries) और बैंकों को नए कानून के साथ जोड़ना था.

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