ओडिशा के कंधमाल बर्बरता की ऐसी घटना सामने आई है जिसे सुनकर आप दहल जाएंगे. दरअसल, बिजली के झटके से मरने वाले एक जंगली हाथी के शव को 32 टुकड़ों में काटकर ओडिशा के कंधमाल और कालाहांडी जिलों में अलग-अलग स्थानों पर दफना दिया गया. अधिकारियों के अनुसार, कंधमाल जिले के बालिगुडा वन प्रभाग में एक जंगली हाथी की मौत के बाद विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए, वन अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को बिना किसी सूचना या अनुमोदन के शव को दफना दिया.
शव को 32 टुकड़ों में काट दिया
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि शव को आसानी से ले जाने के लिए 32 टुकड़ों में काटा गया था. बरहामपुर के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक विश्वनाथ नीलन्नवर ने बताया कि वन अधिकारियों ने कालाहांडी जिले के तहनसिर और कंधमाल जिले के झिरीपानी से ये टुकड़े बरामद किए हैं.
अधिकारी बिशी को किया गया निलंबित
अनुशासनात्मक कार्यवाई के डर से, अधिकारी ने कथित तौर पर हाथी के शरीर को कई हिस्सों में काटकर अलग-अलग स्थानों पर दफनाने का आदेश दिया ताकि सबूतों को छिपाया जा सके. बिशी को निलंबित कर दिया गया है. हालांकि, वह फरार है. बिशी पर वन्यजीव अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और उसे गिरफ्तार करने के लिए तलाशी अभियान जारी है. चालक, हृषिकेश पांडा को स्थानीय अदालत में पेश किया गया है, और अपराध में इस्तेमाल किए गए तीन वाहनों को जब्त कर लिया गया है. इन वाहनों में शव के टुकड़ों को स्थानांतरित करने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया एक जमीन खोदने की एक मशीन भी शामिल है. वाहन मालिकों में से एक, हृषिकेश पांडा को गिरफ्तार कर लिया गया है.
मंत्री का आया बयान
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने कहा कि हमारा विभाग इस अपराध में शामिल पाए जाने वाले वन अधिकारियों और अन्य सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा. टीम गठित किया गया है. यह घटना तब सामने आई जब संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) बालिगुडा घनश्याम महंत ने एसीएफ को 14 जनवरी को एक हाथी की मौत और उसके शव को गुपचुप तरीके से स्थानांतरित करने की अफवाहों की जांच करने का निर्देश दिया.
ऐसे खुला राज
हालांकि, स्थानीय सरपंच संजुक्ता मल्लिक द्वारा 17 जनवरी को हाथी की मौत के संबंध में शिकायत दर्ज कराने के बाद, डीएफओ ने एक बार फिर एसीएफ बालिगुडा मनोरंजन बाघा को घटना की जांच करने का जिम्मा सौंपा था. आरसीसीएफ और डीएफओ ने 19 जनवरी को इलाके का दौरा किया और बिशी को निलंबित कर दिया.














