₹2 करोड़ नगद, 5 आलीशान बंगले, 13 कीमती प्लॉट... AEE की संपत्ति देख विजिलेंस भी हैरान

ओडिशा में AEE बैकुंठनाथ बेहरा के ठिकानों पर विजिलेंस की छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है. बैंक लॉकर से करीब 2 करोड़ रुपये नकद, 5 आलीशान मकान और 13 कीमती प्लॉट मिले हैं.

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ओडिशा में एक सरकारी अफसर की कमाई और संपत्ति में फर्क देखकर विजिलेंस विभाग के अधिकारी भी हैरान हो गए. महज 6 हजार रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत करने वाले सहायक कार्यपालक अभियंता (AEE) के पास करोड़ों की संपत्ति मिली है. छापेमारी के दौरान एईई के बैंक लॉकरों से करीब 2 करोड़ रुपये नगद बरामद हुए हैं.

9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

दरअसल, शनिवार को ओडिशा विजिलेंस ने कंधमाल जिले के बलिगुड़ा स्थित आईटीडीए में पदस्थ AEE बैकुंठनाथ बेहरा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की. टीम ने भुवनेश्वर, जाजपुर, बारिपदा और बलिगुड़ा में उनके कुल 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. इस अभियान में कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे.

5 आलीशान मकानों का हुआ खुलासा

जांच के दौरान अधिकारियों को कई बड़े और महंगे मकानों की जानकारी मिली. अब तक पांच बहुमंजिला भवनों का खुलासा हुआ है. इनमें भुवनेश्वर के नीलाद्रि विहार में करीब 10,500 वर्गफुट में फैला चार मंजिला घर भी शामिल है. इसके अलावा सैलाश्री विहार, कानन विहार, चंद्रशेखरपुर और जाजपुर के धर्मशाला इलाके में भी मकान पाए गए.

13 कीमती प्लॉट भी मिले

सिर्फ मकान ही नहीं, बल्कि जांच में 13 अलग-अलग प्लॉटों का भी पता चला है. इनमें से सात प्लॉट भुवनेश्वर के प्रमुख इलाकों में हैं. सभी संपत्तियों का बाजार मूल्य काफी ज्यादा बताया जा रहा है और इनका आकलन किया जा रहा है.

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बैंक लॉकर से निकले 2 करोड़ रुपये नकद

छापेमारी की शुरुआत में पहले करीब 2 लाख 66 हजार रुपये नकद मिले थे, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर तस्वीर और साफ हुई. बैंक लॉकरों की तलाशी में करीब 2 करोड़ रुपये नकद मिलने की पुष्टि हुई है. फिलहाल दो और लॉकरों की जांच जारी है.

विजिलेंस सिर्फ नकदी तक ही सीमित नहीं है. अधिकारियों की टीम सोने के आभूषण, बैंक जमा राशि, पोस्ट ऑफिस निवेश और अन्य वित्तीय निवेशों की भी जांच कर रही है. तकनीकी टीम इन सभी संपत्तियों का कुल मूल्य निकालने में जुटी हुई है.

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6 हजार की नौकरी से करोड़ों का सफर

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बैकुंठनाथ बेहरा ने साल 1999 में जूनियर इंजीनियर के रूप में नौकरी शुरू की थी, तब उनका वेतन करीब 6 हजार रुपये था. समय के साथ पदोन्नति पाकर वे AEE बने, लेकिन उनकी संपत्ति में हुए भारी इजाफे ने जांच एजेंसियों को शक में डाल दिया है. 

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