AI निगरानी, एंटी‑ड्रोन सिस्टम, 1047 CISF जवान...नोएडा एयरपोर्ट की सुरक्षा को कैसे बनाया जा रहा अभेध

यूपी के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को हाईटेक सुरक्षा किले के रूप में तैयार किया जा रहा है. मल्टी‑लेयर सिक्योरिटी, AI आधारित निगरानी, एंटी‑ड्रोन सिस्टम और CISF के 1047 जवानों के साथ जेवर एयरपोर्ट की सुरक्षा चाक‑चौबंद होगी.

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
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  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को सौंपी गई है
  • एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए मल्टी‑लेयर सिस्टम में हाई‑सिक्योरिटी फेंसिंग, ग्राउंड सेंसर और मोशन डिटेक्टर
  • पूरे परिसर में हजारों AI‑आधारित CCTV कैमरे लगाए जाएंगे जो फेस रिकग्निशन और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करेंगे
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यूपी के जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ देश का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने की ओर नहीं बढ़ रहा, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी इसे बेहद मजबूत और हाईटेक किले के तौर पर तैयार किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को सौंपी जाएगी. कुल 1047 CISF जवान नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे. इसे देश के सबसे सुरक्षित एयरपोर्ट्स में शामिल करने की तैयारी की जा रही है.

मल्टी‑लेयर सिक्योरिटी सिस्टम से लैस एयरपोर्ट

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा को मल्टी‑लेयर सिस्टम पर डिजाइन किया गया है. सबसे बाहरी घेरे में स्मार्ट परिधि सुरक्षा के तहत हाई‑सिक्योरिटी फेंसिंग, ग्राउंड सेंसर, मोशन डिटेक्टर और इंट्रूजन अलार्म सिस्टम लगाए जा रहे हैं. ताकि ये सिस्टम किसी भी घुसपैठ की कोशिश को तुरंत पहचान कर कंट्रोल रूम तक अलर्ट भेजेंगे. इससे एयरपोर्ट के बाहरी और अंदरूनी क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी.

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AI‑आधारित CCTV और एडवांस स्कैनिंग सिस्टम

पूरे एयरपोर्ट परिसर में हजारों AI‑आधारित CCTV कैमरे लगाए जाएंगे. ये कैमरे न केवल रियल‑टाइम मॉनिटरिंग करेंगे, बल्कि फेस रिकग्निशन, बिहेवियर एनालिसिस और संदिग्ध गतिविधियों की ऑटो डिटेक्शन करने में भी सक्षम होंगे. यात्रियों और उनके सामान की जांच के लिए अत्याधुनिक स्कैनर, 3D एक्स‑रे बैगेज स्कैनर, विस्फोटक पहचान प्रणाली (EDS) और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम लगाए जा रहे हैं. इससे सुरक्षा जांच तेज और सटीक होगी.

CISF के साथ पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियां भी अलर्ट

इस एयरपोर्ट की मुख्य सुरक्षा जिम्मेदारी CISF के पास होगी, जो देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स की सुरक्षा संभालती है. इसके साथ ही स्थानीय पुलिस, इंटेलिजेंस एजेंसियां और क्विक रिएक्शन टीमें भी हर समय अलर्ट मोड में मौजूद रहेंगी. किसी भी संदिग्ध गतिविधि या खतरे से निपटने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय रखा जाएगा. सुरक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर मजबूत किया जा रहा है.

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एंटी‑ड्रोन सिस्टम और आपातकालीन तैयारी

आधुनिक खतरों को ध्यान में रखते हुए ड्रोन गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय करने के लिए एडवांस एंटी‑ड्रोन सिस्टम लगाया जा रहा है. यह सिस्टम खासतौर पर VIP मूवमेंट और हाई‑सिक्योरिटी अलर्ट के वक्त अहम भूमिका निभाएगा. इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एयरपोर्ट पर फायर फाइटिंग यूनिट, मेडिकल इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम और विस्तृत डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान भी तैयार किया गया है.

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साइबर सिक्योरिटी और कमांड CISF के हाथ में

इसके साथ ही साइबर खतरों को देखते हुए एयरपोर्ट के पूरे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत साइबर सिक्योरिटी नेटवर्क से सुरक्षित किया जा रहा है. इसका मकसद डेटा चोरी, हैकिंग या सिस्टम में सेंध जैसी घटनाओं को रोकना है. CISF सूत्रों के मुताबिक, जेवर एयरपोर्ट की सुरक्षा देश के अन्य एयरपोर्ट्स की तुलना में और भी कहीं ज्यादा हाईटेक होगी. CISF के जवानों के साथ आधुनिक हथियारों से लैस कमांडो भी तैनात रहेंगे. एयरपोर्ट की सुरक्षा की कमान CISF के कमांडेंट के हाथ में होगी और क्विक रिएक्शन टीमें हर आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहेंगी.
 

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