बिहार में 'नीतीश युग' का अंत, लोकभवन में राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा

Nitish Kumar Resigns : बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान होने में अब सिर्फ कुछ ही घंटे बचे हैं. इससे पहले नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया है.

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  • नीतीश कुमार ने CM पद से इस्तीफा दे दिया है और अब राज्यसभा सदस्य के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होंगे.
  • राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में जनता दल यूनाइटेड के पचासी और लोक जनशक्ति पार्टी के उन्नीस विधायक शामिल हैं.
  • नीतीश कुमार ने पहली बार 1977 में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन शुरुआत में हार का सामना करना पड़ा था.
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बिहार की सियासत में आज एक बड़े युग का अंत हो गया. 'सुशासन बाबू' के नाम से मशहूर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है.अब नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे. हालांकि, वे पद छोड़ रहे हैं लेकिन बिहार की राजनीति व शासन पर उनका प्रभाव महत्वपूर्ण बना रहने की उम्मीद है.

बिहार विधानसभा में 202 सदस्यीय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में जनता दल (यूनाइटेड) के 85 विधायक, चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के 19 विधायक और जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के पांच विधायक शामिल हैं. इसके अलावा राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पांच विधायक भी राजग का हिस्सा हैं.

नीतीश कुमार ने 1977 में पहली बार लड़ा था विधानसभा चुनाव

नीतीश कुमार ने 1977 में पहली बार हरनौत से बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन तब वो हार गए थे. फिर 1980 में भी उन्हें 5 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़े था. लेकिन 1985 में करो या मरो के मुलाबले में वो 22 हजार वोटों से जीत गए और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा.

2005 में पहली बार बिहार के सीएम बने नीतीश कुमार

नीतीश कुमार ने फिर 1989 में बाढ़ सीट से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा. बाद में जनता दल में बिखराव के बीच उन्होंने शरद यादव और अन्य नेताओं के साथ 2003 में जनता दल यूनाइटेड बनाई. 1998-1999 की केंद्र सरकार में नीतीश कुमार रेल मंत्री बने. फिर वो 2001 से 2004 तक कृषि मंत्री रहे. 2004 में वो नालंदा लोकसभा से चुनाव जीते, लेकिन अटल सरकार सत्ता से चली गई, फिर 2005 में वो पहली बार बिहार के सीएम बने.

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बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बख्तियारपुर से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की, बचपन से ही वो काफी तेज तर्रार छात्र थे और पढ़ाई में काफी अव्वल थे. नीतीश ने श्री गणेश हाई स्कूल से 10वीं की परीक्षा में टॉप किया था, जिसके बाद पटना के साइंस कॉलेज में उनका एडमिशन हुआ और 12वीं की पढ़ाई यहीं से हुई. नीतीश कुमार ने 12वीं पास करने के बाद बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया और यहां से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली. इसी दौरान वो छात्र राजनीति का हिस्सा बने और फिर बिजली विभाग में कुछ दिन नौकरी के बाद राजनीति के मैदान में कूद गए. 

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पिता कांग्रेसी नेता थे 

नीतीश कुमार के पिता राम लखन सिंह एक वैद्य होने के साथ कांग्रेस से जुड़े थे. उनकी मां परमेश्वरी देवी हाउसवाइफ थी और परिवार खेती-किसानी से जुड़ा था.पिता राम लखन सिंह 1952 के पहले आम चुनाव में कांग्रेस से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्होंने टिकट नहीं मिला. फिर कांग्रेस से उनका मोहभंग हो गया.

छात्र यूनियन का गठन किया

नीतीश कुमार ने कॉलेज में छात्रों से जुड़े समस्याओं को लेकर आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. नीतीश ने 1972 में बिहार इंजीनियरिंग कॉलजे स्टूडेंट्स यूनियन गठित कर उसके अध्यक्ष चुने गए.

 जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से लेकर राजनीति के शुरुआती सफर में नीतीश-लालू की जोड़ी छाई रही. उन्होंने लालू यादव के लिए पोस्टर तक लगाए. लालू को बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष बनाने में भी अहम भूमिका रही, लेकिन बात में दूरियां बढ़ती गईं. 2005 के चुनाव में बीजेपी-जेडीयू की जोड़ी ने लालू यादव की पार्टी को बिहार चुनाव में धमाकेदार जीत के साथ हराया और नीतीश पहली बार मुख्यमंत्री बने.

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