नीतीश कटारा मर्डरः पहले मां बीमार, अब शादी की चाहिए 'छुट्टी'! बेल पर बाहर विकास यादव की कोर्ट में अर्जी

Nitish Katara Murder Case: इससे पहले विकास यादव ने मां की देखभाल करने का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत ले ली थी. अब जेल से बाहर आने के बाद उसके वकीलों ने हाईकोर्ट में स्थायी रिहाई की मांग की है.

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नीतीश कटारा की हत्या के मामले में सजा काट रहा है विकास यादव
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  • नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी विकास यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट से शादी के बहाने स्थायी रिहाई की मांग की है
  • विकास यादव की शादी पांच सितंबर को होनी है और उसने इसके लिए जमानत की मांग की है
  • हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, दिल्ली सरकार और पीड़िता की मां को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है
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Nitish Katara Murder Case: नीतीश कटारा हत्याकांड के मामले में सजा काट रहे दोषी विकास यादव ने बेल मिलने के बाद स्थायी रिहाई की गुहार लगाई है, इस बार उसने दिल्ली हाईकोर्ट से शादी करने के बहाने रिहाई मांगी है. उसका कहना है कि उसकी शादी 5 सितंबर को होनी है और इस आधार पर उसे जमानत मिलनी चाहिए. इसके अलावा विकास यादव ने बाहर निकलकर 54 लाख रुपये जुटाने की भी बात कही है, जो सजा सुनाए जाने के वक्त उस पर जुर्माना लगाया गया था. इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है. इससे पहले विकास यादव ने मां की देखभाल का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली थी.

क्या है नीतीश कटारा हत्याकांड?

सबसे पहले आपको इस हत्याकांड के बारे में बताते हैं. ये पूरी कहानी साल 2002 की है, जब परिवार की शान के लिए नीतीश की बेरहमी से हत्या कर दी गई. 1998 में नीतीश कटारा ने गाजियाबाद के एक कॉलेज में एमबीए के लिए एडमिशन लिया, इसी कॉलेज में उसकी दोस्ती भारती नाम की लड़की से हो गई. भारती उस वक्त के राज्यसभा सांसद डीपी यादव की बेटी थी और काफी संपन्न परिवार से आती थीं. कॉलेज के दिनों में दोनों अच्छे दोस्त थे और फिर ये दोस्ती प्यार में बदल गई. 

साल 2001 तक भारती और नीतीश का प्यार काफी गहरा हो चुका था और दोनों एक दूसरे से शादी का प्लान भी बना चुके थे. हालांकि भारती के भाई विकास और चचेरे भाई विशाल को इस रिश्ते से परेशानी थी और वो किसी भी हाल में अपनी बहन को एक मिडिल क्लास लड़के के साथ नहीं देख सकते थे. 

16 फरवरी 2002 को भारती की बचपन की दोस्त की शादी थी, जिसमें उसने नीतीश को भी आने के लिए कहा. दोनों शादी समारोह में पहुंचे, लेकिन रात करीब 12 बजे के बाद से नीतीश गायब हो गया. उसे विकास यादव और विशाल यादव के साथ आखिरी बार देखा गया था. अगली सुबह 80 किमी दूर खुर्जा के पास एक जला हुआ शव मिला, जिसकी बेरहमी से हत्या की गई थी. ये नीतीश कटारा की ही लाश थी, जिसे विकास और विशाल ने मौत के घाट उतार दिया था. 

मां की बीमारी का दिया था हवाला

इससे पहले विकास यादव ने मां की देखभाल करने का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत ले ली थी. अब जेल से बाहर आने के बाद उसके वकीलों ने हाईकोर्ट में स्थायी रिहाई की मांग की है. कोर्ट में शादी का कार्ड भी लगाया गया है, जिसमें शादी की तारीख 5 सितंबर बताई गई है. उसने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई अंतरिम जमानत को दो महीने और बढ़ाने की मांग की है.

कोर्ट ने विकास यादव को पहले सरेंडर करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि यादव 26 अगस्त तक जेल में सरेंडर करे. इसके अलावा हाईकोर्ट ने साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई अंतरिम जमानत और इस नई याचिका के बीच कोई लिंक नहीं है. 

कोर्ट ने जारी किया नोटिस

विकास यादव की उम्र अब 54 साल हो चुकी है और वो पिछले 23 साल से अधिक समय से जेल में है और फिलहाल जमानत पर बाहर है. जस्टिस रवींद्र डुडेजा ने यादव की याचिका पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, दिल्ली सरकार और नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा को नोटिस जारी किया. यादव की शादी के कारण जल्दी सुनवाई की अपील के चलते कोर्ट ने मामले की सुनवाई दो सितंबर के लिए तय की है.

आर्टिकल 21 का किया जिक्र

यादव के वकील ने कहा कि उसने 25 साल की निर्धारित सजा में से 23 साल से ज्यादा की सजा पहले ही काट ली है और किसी दोषी को छूट का लाभ देना अदालत की सजा देने की शक्तियों के अंतर्गत नहीं आता है. याचिका में कहा गया है, ‘निश्चित अवधि की सजा के दौरान छूट से इनकार करना, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त याचिकाकर्ता के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है, क्योंकि यह दोषी को छूट के लिए आवेदन करने या उसके लिए अपील करने के अधिकार से वंचित करता है.'

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घर बसाने का आखिरी मौका

यादव के वकील ने हाईकोर्ट में कहा, ‘मेरे पास आय का कोई स्रोत नहीं है, मैं 54 साल का हूं. अगर मैं अभी शादी नहीं करता और घर नहीं बसाता, तो समय निकल जाएगा. घर बसाने का यही मेरा एकमात्र मौका है.' इस याचिका का नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा के वकील ने विरोध किया और दलील दी कि किसी दोषी के लिए अंतरिम जमानत का कोई प्रावधान नहीं है. वकील ने कहा कि एक दोषी या तो पैरोल या फर्लो का हकदार होता है. 

कोर्ट ने कहा कि किसी दोषी को अंतरिम जमानत देने का प्रावधान "पूरी तरह से अनसुना" है. जज ने उसके वकील से कहा, ‘क्या हाईकोर्ट के पास दोष साबित होने के बाद और पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद अंतरिम जमानत देने का अधिकार है? आप इस पर विचार कर सकते हैं. मैं इसे लंबित रख रहा हूं.' 

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तीन दोषियों को हुई थी सजा

इस मामले में विकास यादव के चचेरे भाई विशाल यादव को भी सजा सुनाई गई थी. इनके अलावा हत्या में साथ देने वाले एक अन्य दोषी सुखदेव पहलवान को बिना किसी छूट के 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. 29 जुलाई को, हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिया कि उसने अपनी 20 साल की सजा इस साल मार्च में पूरी कर ली है.

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