अभी शादी है, फिर बच्चे होंगे... जमानत बढ़ाने की अर्जी पर SC ने विकास यादव को पढ़ा दिया पाठ

विकास यादव 23 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है, उसने इस आधार पर भी अंतरिम जमानत मांगी कि उसकी शादी पांच सितंबर को तय हुई थी और उसे 54 लाख रुपये का इंतजाम करना है, जो सजा सुनाए जाने के समय उस पर लगाया गया जुर्माना है.

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  • सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश कटारा हत्याकांड में दोषी विकास यादव की अंतरिम ज़मानत बढ़ाने से इंकार किया
  • विकास यादव ने शादी के बाद रस्में निभाने और जुर्माने की रकम की व्यवस्था के लिए जमानत की मांग की थी
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने विकास यादव की अंतरिम ज़मानत बढ़ाने से इनकार कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी
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नई दिल्ली:

साल 2002 के चर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड में दोषी विकास यादव को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है. इस मामले में अदालत ने अंतरिम ज़मानत बढ़ाने की मांग पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने विकास यादव से कहा कि वह इस मामले में उचित कानूनी उपाय ही अपनाए, इसके बाद विकास यादव ने अपनी याचिका वापस ले ली. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ 9 सितंबर के दिल्ली हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश के खिलाफ 54 वर्षीय यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था.

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती

विकास यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उसकी अंतरिम ज़मानत बढ़ाने की मांग को ठुकरा दिया गया था. दिल्ली हाईकोर्ट में यादव ने दलील दी थी कि उसकी शादी 5 सितंबर को हुई है और उसे शादी के बाद की रस्में निभानी हैं.सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 1 सितंबर को विकास यादव की अंतरिम ज़मानत एक हफ्ते के लिए बढ़ाई थी. यादव ने उसी दिन आत्मसमर्पण कर दिया और अपनी शादी के आधार पर और हत्या के मामले में सजा के तहत उस पर लगाए गए जुर्माने के 54 लाख रुपये की व्यवस्था करने के लिए जमानत के वास्ते शीर्ष अदालत का रुख किया था.

अभी शादी है, फिर बच्चे होंगे...

अदालत ने कहा कि अगर यादव की याचिका स्वीकार कर ली जाती है, तो यह “एक अंतहीन प्रक्रिया” होगी. पीठ ने कहा,“अभी शादी है, फिर बच्चे होंगे, यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा.” इस मामले में यादव की ओर से सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्णकुमार ने दलील दी कि हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई दो दिसंबर को करेगा. वकील ने कहा कि यादव को कई व्यवस्थाएं करनी पड़ीं. कृष्णकुमार ने दलील दी, “मेरे पास आधार कार्ड नहीं है और मुझे अपने सभी दस्तावेज जुटाने हैं. मुझे दी गई सजा के तहत 54 लाख रुपये का जुर्माना भरने के लिए धन जुटाना है.” सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि अंतरिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया.

किस आधार पर मांगी अंतरिम जमानत

आपको बता दें कि यादव 23 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है और उसने इस आधार पर भी अंतरिम जमानत मांगी कि उसकी शादी पांच सितंबर को तय हुई थी और उसे 54 लाख रुपये का इंतजाम करना है, जो सजा सुनाए जाने के समय उस पर लगाया गया जुर्माना है. यादव उत्तर प्रदेश के राजनेता डी.पी. यादव का बेटा है. उसके चचेरे भाई विशाल यादव को भी नीतीश कटारा के अपहरण और हत्या के लिए सजा हुई थी. दोनों दोषी अलग-अलग जातियों से होने के कारण विकास की बहन भारती यादव के साथ कटारा के कथित संबंध के खिलाफ थे. एक अन्य सह-दोषी सुखदेव पहलवान को बिना किसी छूट के 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई. सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई को उसे यह देखते हुए जेल से रिहा करने का आदेश दिया कि उसने इस साल मार्च में अपनी 20 साल की सजा पूरी कर ली थी.

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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