- बीजेपी ने कांग्रेस के प्रधानमंत्री मोदी पर लगाए गए दबाव और अंतरिम टैरिफ डील आरोपों का कड़ा जवाब दिया
- पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नेहरू‑गांधी परिवार पर हमेशा अपने हितों को बचाने का आरोप लगाया
- उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर चीन के साथ मिलीभगत और विदेशी ताकतों की कठपुतली होने का आरोप लगाया
बीजेपी ने बुधवार को कांग्रेस के ‘कम्प्रमाइज्ड PM' वाले तंज का कड़ा जवाब दिया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव था और उन्हें भारत‑अमेरिका अंतरिम टैरिफ डील पर हस्ताक्षर करने पड़े. बीजेपी ने पलटवार करते हुए नेहरू‑गांधी परिवार के सत्ता में रहने के दौरान हुई समझौतों को लेकर हमला बोला. पार्टी अध्यक्ष नितिन नबिन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नेहरू‑गांधी परिवार ने “हमेशा अपने हितों को बचाने के लिए काम किया है.” उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर चीन के साथ “मिलीभगत” का आरोप भी लगाया.
इंदिरा गांधी पर भी साधा निशाना
नवीन ने पंडित नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि उनका प्रशासन “CIA के लिए ओपन बुक” था, और दावा किया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने “इंदिरा गांधी को प्रोपेगैंडा मनी” भी दी थी. नवीन ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी यूपीए सरकार के दौरान “सुपर पीएम” की तरह काम करती थीं, वही राहुल गांधी पर हमला करते हुए “विदेशी ताकतों की कठपुतली” बताया. नवीन ने कहा कि मैं आपके सामने यह बता रहा हूं कि गांधी परिवार ने कैसे समझौते किए हैं. यह पूरा परिवार हमेशा देश के लोगों के साथ समझौता करके अपने हितों को बचाता आया है.
नेहरू ने कहा था कि 45 करोड़ लोग मेरे लिए बोझ हैं: नितिन नवीन
उन्होंने दावा किया कि एक समय था जब नेहरू ने ही कहा था कि 45 करोड़ लोग मेरे लिए बोझ हैं. हम सब जानते हैं कि उनकी विदेशी ताकतों से कैसी नज़दीकी थी. हमने देखा कि उन्होंने 1954 में तिब्बत पर भारत के अधिकार चीन को कैसे सौंप दिए. उन्होंने आगे कहा कि “इंदिरा गांधी के समय में CIA ने कांग्रेस को प्रोपेगैंडा मनी दी थी.
नवीन ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि 2004 से 2014 के बीच सोनिया गांधी ‘सुपर पीएम' थीं. इसी दौरान राजीव गांधी फ़ाउंडेशन को चीनी सरकार से फंडिंग मिली… यह सब ‘कम्प्रोमाइज़ मिशन' का हिस्सा था.
राहुल गांधी को नकारात्मक राजनीति का पोस्टर बॉय बताते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को सूचना नहीं देते. उनकी पूरी राजनीति ‘कम्प्रोमाइज़ पॉलिटिक्स' से भरी है. अपनी राजनीति के लिए ये लोग देश के हितों से भी समझौता करने को तैयार हैं.
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