- राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भारत के खिलाफ बड़ी आतंकी साजिश के तहत सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया
- अमेरिकी नागरिक और 6 यूक्रेनी नागरिकों ने टूरिस्ट वीजा पर भारत आकर म्यांमार का अवैध रास्ता अपनाया
- आरोपी म्यांमार के सशस्त्र समूहों को ड्रोन ऑपरेशन, असेंबली और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग दे रहे थे
भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया है. इस मामले में एक अमेरिकी नागरिक समेत कुल 7 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें 6 यूक्रेन के नागरिक भी शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन सभी पर भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने का आरोप है. इस मामले में नेशनल एनआईए ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 18 के तहत केस दर्ज किया है. यह FIR 13 मार्च को गृह मंत्रालय के निर्देश पर दर्ज की गई थी.
जांच में जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, उनमें अमेरिकी नागरिक Matthew Aaron VanDyke के अलावा 6 यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं,जिनमें हुरबा पेट्रो, स्लिविएक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मरियन, होंचारुक मक्सिम और काम्स्की विक्टर हैं. सूत्रों के मुताबिक, करीब 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, जिससे इस नेटवर्क के और बड़ा होने की आशंका जताई जा रही है.
गुवाहाटी से मिजोरम गए
जांच एजेंसियों के अनुसार, ये विदेशी नागरिक पहले गुवाहाटी पहुंचे और वहां से मिजोरम चले गए. यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिजोरम जाने के लिए जरूरी RAP/PAP परमिट भी इन लोगों ने नहीं लिया था. इसके बाद ये सभी अवैध तरीके से सीमा पार कर म्यांमार पहुंच गए. मिजोरम की करीब 500 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार के चिन और रखाइन राज्यों से लगती है, जो इस पूरे नेटवर्क में एक अहम कड़ी मानी जा रही है. जांच में बड़ा खुलासा यह हुआ है कि ये विदेशी नागरिक म्यांमार के एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स (EAGs) के संपर्क में थे.
आरोप है कि ये लोग पहले से तय प्लान के तहत इन सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग दे रहे थे. ट्रेनिंग में ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली, ड्रोन जैमिंग तकनीक शामिल था. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि ये समूह भारत में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं. जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि आरोपी यूरोप से ड्रोन और उससे जुड़े उपकरण भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचा रहे थे. आशंका जताई जा रही है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल किसी बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था, जिससे मामला और ज्यादा गंभीर हो गया है.
एजेंसियों ने देश के अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर कार्रवाई करते हुए इन विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया. जिनमें से एक अमेरिकी नागरिक को नेताजी सुभाषचंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पकड़ा गया. वहीं तीन यूक्रेनी नागरिकों को चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट हिरासत में लिया गया. इसके अलावा तीन अन्य को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रोका गया. सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने यह स्वीकार किया है कि वे मिजोरम के रास्ते गैरकानूनी तरीके से म्यांमार गए थे. उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने कई बार उग्रवादी समूहों को ट्रेनिंग दी और यूरोप से ड्रोन उपकरण म्यांमार भेजने में मदद की.
कौन है मैथ्यू वैन डाइक?
अमेरिकी नागरिक Matthew Aaron VanDyke का नाम इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा में है. बताया जाता है कि वह अंतरराष्ट्रीय संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय रहा है और खुद को सुरक्षा विश्लेषक, युद्ध संवाददाता और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर बताता है. साल 2011 में लीबिया के सिविल वॉर के दौरान वह विद्रोही लड़ाकों के साथ शामिल हुआ था और कुछ समय के लिए जेल में भी रहा. बाद में उसने Sons of Liberty International (SOLI) नाम का संगठन बनाया, जो अलग-अलग देशों में सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग और रणनीतिक सलाह देने का दावा करता है.
NIA सूत्रों के मुताबिक, म्यांमार के ये सशस्त्र समूह भारत में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को हथियार, तकनीक और ट्रेनिंग देने में मदद करते हैं. ऐसे में विदेशी नागरिकों का यह नेटवर्क भारत की सीमा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता था. यह मामला सिर्फ आतंकी साजिश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है. जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं. खास तौर पर इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं.
- क्या इस नेटवर्क का भारत में कोई लोकल कनेक्शन है?
- ड्रोन और अन्य उपकरण भारत के रास्ते कैसे भेजे जा रहे थे?
- फंडिंग का सोर्स क्या है?
- सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कौन-कौन जुड़े हुए हैं?
मामले का हर पहलू तलाश रही एजेंसी
फिलहाल सभी आरोपी NIA की कस्टडी में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है. एजेंसी का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों का खुलासा हो सकता है. हालांकि, इस पूरे मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी ने इस केस को बेहद संवेदनशील बना दिया है. सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सकें.














