- माता पिता की देखभाल न करने पर सैलरी से कटौती का प्रावधान.
- सरकारी और प्राइवेट दोनों कर्मचारियों पर होगा लागू.
- 60 दिन में फैसला और सीधे बुर्जुगों के बैंक खाते में आएंगे पैसा.
अगर कोई कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेगा तो उसके वेतन से पैसे काटकर उसके माता-पिता को दिया जा सकता है. तेलंगाना सरकार ने इसे लेकर एक कानून पास किया है. इसका मकसद उन कर्मचारियों को जवाबदेह बनाना जो अपने माता पिता की देखभाल नहीं करते. इस कानून के तहत कर्मचारी की सैलरी से 15 प्रतिशत तक या 10,000 रुपये तक की कटौती हो सकती है. यह नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर के कर्मचारियों पर लागू होगा. सांसद, विधायक और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि भी इसके दायरे में आएंगे.
प्रक्रिया क्या होगी?
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब तेजी से बदलती लाइफस्टाइल में बुजुर्गों की उपेक्षा एक बड़ी सामाजिक समस्या बनती जा रही है. इस कानून के तहत माता पिता सीधे शिकायत कर सकते हैं. उन्हें जिलाधिकारी के पास आवेदन देना होगा. अपनी स्थिति और आय की जानकारी देनी होी. जिलाधिकारी 60 दिनों के भीतर फैसला करेंगे.सुनवाई के बाद आदेश जारी होगा और तय रकम सीधे माता-पिता के बैंक खाते में उस कर्मचारी के वेतन से काट कर भेज दी जाएगी.
सौतेले माता-पिता भी शामिल
इस कानून की एक खास बात यह है कि यह सिर्फ जैविक माता पिता तक सीमित नहीं है. इसमें सौतेले माता-पिता भी शामिल हैं. यानी परिवार की परिभाषा को व्यापक किया गया है. यह कदम यह दिखाता है कि कानून सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी तैयार किया गया है.
CM रेड्डी ने क्या कहा?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंता रेड्डी ने इस विधेयक को पेश करने के दौरान स्पष्ट किया कि माता-पिता के अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि समाज में उनकी उपेक्षा नहीं होनी चाहिए लिहाजा हर व्यक्ति को जिम्मेदार बनना होगा.
इस कानून की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत जैसे देश में परिवार को हमेशा सबसे मजबूत संस्था माना गया है. लेकिन बदलते समय के साथ यहां संयुक्त परिवार का चलन कम होता जा रहा है और एकल परिवार की ओर लोग बढ़ रहे हैं. लोगों का शहरों में पलायन हो रहा है. ऐसे में कई परिवारों के बुजुर्ग जो शहर नहीं जाना चाहते या अपने मूल स्थान को नहीं छोड़ना चाहते वो अकेले रह जाते हैं. ऐसे कई मामलों में ये देखा गया है कि उनके बच्चे आर्थिक तौर पर उनकी मदद नहीं करते. तेलंगाना सरकार ने इसी समस्या को सुलझाने के नजरिए से बुजुर्गों की देखभाल के लिए उनके बच्चों के वेतन से 15 फीसद रकम हर महीने देने के कानून को मूर्त रूप दिया है.
पहले से मौजूद कानून
हालांकि भारत में पहले से ही माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) कानून मौजूद है, जो बुजुर्गों और माता-पिता को उनके बच्चों या रिश्तेदारों से भरण-पोषण (भोजन, आवास, स्वास्थ्य) प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है. यह कानून 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को बच्चों द्वारा उपेक्षा या दुर्व्यवहार की स्थिति में त्वरित कानूनी राहत और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करता है. लेकिन कई बार इसकी लंबी प्रक्रिया और इसे लागू करने में दिक्कतें आती हैं.
तेलंगाना सरकार ने इसे ही देखते हुए तय समय में फैसला और स्पष्ट प्रक्रिया के जरिए सीधे सैलरी से कटौती का प्रावधान रखा है. यानी इस कानून को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा.
वरिष्ठ नागरिक आयोग का प्रस्ताव
इस कानून के तहत एक वरिष्ठ नागरिक आयोग बनाने का प्रस्ताव भी है. जिसका नेतृत्व एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज करेंगे. यह कमीशन अपील और शिकायतों को देखेगा और प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा करेगा. बुजुर्गों के लिए यह एक मजबूत प्लेटफॉर्म बन सकता है.
इसके साथ ही तेलंगाना सरकार ने हेट क्राइम पर एक बड़ा कदम उठाते हुए एक अहम विधेयक पेश किया है जिसमें हेट स्पीच और हेट क्राइम पर सख्त सजा का प्रावधान है. इसमें सजा 10 साल तक की मुकर्रर की गई है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है. तेलंगाना सरकार ने एक ही दिन में दो ऐसे विधेयक पेश किए हैं जो सामाजिक मुद्दों पर उसके सख्त रुख को दिखाता है. यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है.
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