हम विरोध करेंगे...क्या NCP के अंदर कोई विरोधाभास है, NCP नेता प्रफुल्ल पटेल ने ऐसा क्यों कहा

शरद पवार द्वारा बनाई गई एनसीपी दो साल पहले उनके भतीजे अजित पवार के विद्रोह के बाद बंट गई थी.

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  • एनसीपी के दोनों गुटों के एक साथ आने की अफवाहों को प्रफुल्ल पटेल ने पूरी तरह से खारिज किया है
  • प्रफुल्ल पटेल ने स्पष्ट किया कि शरद पवार के गुट ने कभी भी एनडीए में शामिल होने का विचार नहीं किया था
  • अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट ने एनडीए का हिस्सा बनकर उपमुख्यमंत्री पद संभाला था
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मुंबई:

बीएमसी चुनाव के बीच इस बात की अटकलें तेज हो गयी है कि एनसीपी के दोनों गुट एक साथ आ सकते हैं. इसे लेकर लोगों के बीच चर्चा चल रही है. 'एनडीटीवी पावर प्ले' कॉन्क्लेव  में जब प्रफुल्ल पटेल से इसे लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस तरह की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया. कार्यक्रम में जब देवेंद्र फडणवीस से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह बात  प्रफुल्ल पटेल से पूछा जाए वो यहां मौजूद हैं.  प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि मैंने पहले ही कह दिया कि यह संभव नहीं है फिर भी आप उन्हें पूछ रहे हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दोनों गुट एक नहीं हो रहे हैं. 

इससे पहले मंच पर भी बातचीत के दौरान प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि एक बात में साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि हमलोगों ने कभी भी शरद पवार साहब को छोड़कर एनडीए का हिस्सा बनना कभी नहीं सोचा था. पवार साहब और सुप्रिया जी भी तैयार थी. लेकिन अंतिम समय में बदलाव हुआ. फिर हम अपनी राह पर आगे बढ़े. कहीं न कहीं उनकी सोच बदली है हमारी सोच नहीं बदली है.हम अपने रास्ते पर चल रहे हैं और अपना रास्ता बदलने वाले नहीं हैं.हमारे रास्ते पर कोई अगर आएगा तो तब की बात तब होगी. बीएमसी चुनाव को देखकर यह सवाल उठ रहे हैं लेकिन मैं भी एक जिम्मेदार नेता हूं मैं कह रहा हूं कि ऐसी कोई बात नहीं है.

बताते चलें कि इससे पहले अजित पवार ने कहा था कि दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता एकजुट होना चाहते हैं. दोनों एनसीपी अब एक हैं. हमारे परिवार में सभी तनाव समाप्त हो गए हैं.

कैसे दो फाड़ हो गई थी NCP

शरद पवार द्वारा बनाई गई एनसीपी दो साल पहले उनके भतीजे अजित पवार के विद्रोह के बाद बंट गई थी. अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट ने बाद में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल हो गए और उन्होंने उपमुख्यमंत्री का पदभार संभाला. अजित पवार ने एनसीपी के पार्टी नाम और 'घड़ी' चिन्ह पर अपना दावा जताया, जबकि शरद पवार के गुट को नया नाम, एनसीपी (शरदचंद्र पवार), और नया चिन्ह, तुरही मिला.

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