अब भारतीय नौसेना पानी में और कहर ढाएगी. ऐसा इसलिए भी क्योंकि वह समंदर में न केवल दुश्मन से दो दो हाथ करने के लिए कमर कस रही है बल्कि सामुद्रिक सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए चाक चौबंद व्यवस्था कर रही है.दरअसल,भारतीय नौसेना की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने पारंपरिक पनडुब्बियों के लिए लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल खरीदने के लिए रिक्वेस्ट फ़ॉर इन्फॉर्मेशन जारी की है. ये मिसाइलें जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर सटीक हमला करने के लिए बनाई जाती हैं. इनके शामिल होने से नौसेना की लंबी दूरी से वार करने की ताकत बढ़ेगी और दुश्मन को नष्ट करने की संभावना भी ज्यादा होगी. इससे मिसाइल युद्ध में भारत की तकनीकी बढ़त और मजबूत होगी.
हालांकि, आरएफआई में यह नहीं बताया गया है कि कितनी मिसाइलें खरीदी जाएंगी. लेकिन कंपनियों से यह जानकारी मांगी गई है कि क्या वे यही या इसी तरह की मिसाइलें किसी अन्य देश या ग्राहक को दे रही हैं.वैसे रक्षा मंत्रालय के ऑफसेट नियम के तहत कंपनियों को कुल अनुबंध मूल्य का 30 प्रतिशत भारत में निवेश या खरीद के रूप में पूरा करना होगा.
आरएफआई में दी गई शर्तों के मुताबिक मिसाइल का वजन (कैप्सूल सहित) 1,500 किलोग्राम से कम होना चाहिए, इसकी मारक दूरी 50 से 500 किलोमीटर के बीच होनी चाहिए। साफ है मिसाइल छोटी दूरी से लेकर लंबी दूरी तक के लक्ष्यों पर सटीक लगाने में इस्तेमाल होगा. इस मिसाइल को 533 मिमी पनडुब्बी ट्यूब से दागा जा सके । इसकी लंबाई 6.4 मीटर से ज्यादा न हो. साथ ही यह प्रणाली 15 से 100 मीटर की गहराई (पेरिस्कोप गहराई) से लॉन्च की जा सके. सामान्य स्थिति में पनडुब्बी की गति 6 नॉट तक और आपात स्थिति में 8 नॉट तक हो सकती है.
आरएफआई में कहा गया है कि पनडुब्बी एक साथ दो मिसाइलें दाग सके और दोनों की मार्गदर्शन प्रणाली एक-दूसरे में बाधा न डालें. मिसाइल को 8 से 10 सेकंड तक 45 डिग्री तक के झुकाव और हिलने की स्थिति सहने में सक्षम होना चाहिए. लक्ष्य की पहचान भौगोलिक निर्देशांक के आधार पर हो और यह प्रणाली भारी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की स्थिति में भी काम करती रहे.लैंड अटैक क्रूज मिसाइल में सुरक्षित उच्च-विस्फोटक वारहेड होना चाहिए, जो एकल या छोटे-छोटे बमों (सब-म्यूनिशन) के रूप में हो सकता है. इसे हवा में फटने और ज्यादा प्रभाव पैदा करने के लिए तैयार किया गया हो. वारहेड की विश्वसनीयता कम से कम 0.99 (99 प्रतिशत) होनी चाहिए.
निर्माता कंपनी को अनुबंध के तहत कम से कम 25 साल तक अपग्रेड की सुविधा भी देनी होगी।साथ ही 10 सालों तक स्पेयर पार्ट्स की सुविधा उपलब्ध करानी होगी. साफ है इस मिसाइल से लैस होने के बाद नौसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा. पानी के अंदर से हमला करने की उसकी कैपेबिलिटी बढ़ेगी और चीन और पाकिस्तान जैसे मुल्क इंडियन वाटर में कोई भी हरकत करने से पहले दासियों बार सोचना होगा.














