- दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की चार्जशीट पर आज आदेश सुनाना है
- कांग्रेस के सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे को पीएमएलए के तहत आरोपी बनाया गया है
- ईडी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेताओं ने 50 लाख में एजेएल की 2000 करोड़ की संपत्ति पर नियंत्रण हासिल किया
दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत आज यह आदेश सुनाएगी कि क्या नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं. इस हाई-प्रोफाइल मामले में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे सहित अन्य को मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोपी बनाया गया है.
विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने 7 नवंबर को आदेश सुरक्षित रखे थे, जब अदालत द्वारा केस रिकॉर्ड के निरीक्षण के बाद ईडी ने अतिरिक्त स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए थे. अदालत ने उस समय कहा था कि लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों, कथित किराया रसीदों और फंड फ्लो पैटर्न की विस्तृत जांच आवश्यक है, तभी यह तय किया जा सकेगा कि अभियोजन शिकायत पीएमएलए के तहत संज्ञान लेने की कानूनी कसौटी पर खरी उतरती है या नहीं.
सिर्फ 50 लाख रुपये में नियंत्रण... ED का आरोप
ईडी का आरोप है कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने षड्यंत्र रचकर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों पर मात्र 50 लाख रुपये में नियंत्रण हासिल कर लिया. इसके लिए ‘यंग इंडियन' नाम की कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी बहुमत के हिस्सेदार हैं. ईडी ने यह भी दावा किया है कि ‘फर्जी लेन-देन' के जरिए सालों तक एडवांस रेंट पेमेंट दिखाए गए और कथित तौर पर नकली किराया रसीदों का इस्तेमाल किया गया, ताकि धन के प्रवाह को संदिग्ध तरीकों से एक दिशा में ले जाया जा सके.
एजेएल के अधिग्रहण में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात
हालांकि कांग्रेस नेताओं ने आरोपों को 'अभूतपूर्व' और 'असंगत' बताते हुए खारिज किया है, उन्होंने कहा है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उठाया गया है. नेशनल हेराल्ड से जुड़े विवाद ने 2012 में जोर पकड़ा था, जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में शिकायत दायर कर आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने एजेएल के अधिग्रहण में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात किया है. अब सबकी निगाहें शनिवार पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि ईडी की चार्जशीट पर विधिवत संज्ञान लिया जाएगा या नहीं.













