मुस्लिम कारोबारी को मिला महादेव का 10 हजार साल पुराना त्रिशूल, हजारों साल पुराना वज्र, सोने-तांबे की खान में खजाना मिला

मुस्लिम कारोबारी और शोधकर्ता शमीम हुसैन को हजारों साल पुराना त्रिशूल और इंद्र का वज्र खनन के दौरान मिला है. ये सोने तांबे की खान में मिला तो सभी हैरान रह गए.

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Trishul and Vajra
नई दिल्ली:

फिलीपींस में हिंदू धर्म के 10 हजार साल पुराने दो धार्मिक चिन्ह मिले हैं. भगवान शिव का त्रिशूल और इंद्रदेव का वज्र ऐसे दो धार्मिक प्रतीक हैं, जो यहां खुदाई के दौरान मिले हैं. रिसर्च स्पेशलिस्ट सैय्यद शमीर हुसैन को इंद्र का ये वज्र और महादेव का ये त्रिशूल मिला है. उन्होंने सनातन धर्म से जुड़े इन दुर्लभ दस्तावेजों और प्राचीन कलाकृतियों को दुनिया के सामने रखा है. शमीम हुसैन का कहना है कि भगवान शिव से जुड़ा ये त्रिशूल और इंद्र का ये मारक हथियार वज्र फिलीपींस में खनन के दौरान मिला है. उन्हें इन पौराणिक दुर्लभ अस्त्रों की खोज, उसकी उम्र और धार्मिक अहमियत से संबंधित दस्तावेज भी पेश किए जाएंगे. 

सोने-तांबे के खनन में मिली वस्तुएं

हुसैन का कहना है कि मई 2015 में फिलीपींस में तांबे और सोने की खदानों में खनन के दौरान ये पौराणिक प्रतीक मिले थे. वो 2012 से खनन कार्यों से जुड़े हुए थे. स्थानीय लोगों के सहयोग से इन कलाकृतियों को जब निकाला गया तो पहले ये अंदाजा नहीं था कि ये हिंदू धर्म के पौराणिक अस्त्र हैं. फिर जांच में पाया गया कि ये हिंदू धर्म से जुड़े त्रिशूल और वज्र हैं, इससे सब हैरान रह गए. इसे अब भारत समेत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में दिखाया जा रहा है. शमीम चाहते हैं कि किसी प्राचीन मंदिर या हिंदू संस्था को ये दान किया जाए, ताकि ये धरोहर हमेशा सुरक्षित रहे या फिर वो खुद मंदिर बनाकर उनमें ये पौराणिक वस्तुओं को सजोकर रखेंगे.

एएसआई और इंडियन म्यूजियम में मुहर

खोज के बाद उन्हें जांच के लिए साल 2016 में भारत लाया गया. उन्होंने कई सालों तक इन कलाकृतियों का अध्ययन किया और पुरातत्वविदों और धार्मिक विद्वानों समेत विशेषज्ञों से परामर्श करने में बिताए. उन्होंने दावा किया कि, त्रिशूल करीब 10,000 हजार साल पुराना हो सकता है, जबकि वज्र करीब 3000 हजार साल पुराना है. इन धार्मिक वस्तुओं को भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India), इंडियन म्यूजियम (Indian Museum) और केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) जैसे महत्वपूर्ण संस्थान ने मान्यता दी है. 

त्रिशूल को 10 हजार साल और वज्र को 3 हजार साल प्राचीन बताया गया. वर्ष 2016 में इन्हें भारत लाया गया. पुरातत्वविदों और धार्मिक विशेषज्ञों ने पाया कि ये त्रिशूल करीब 10 हजार साल पुराना है. वज्रास्त्र 3 हजार साल पुराना है. इन वस्तुओं को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कार्यालय में दर्ज कराने की तैयारी है.

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भगवान शिव का त्रिशूल

सनातन धर्म में भगवान शिव का अस्त्र त्रिशूल के तीन हिस्से निर्माण, संरक्षण और विनाश का प्रतीक हैं. वहीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वज्र एक शक्तिशाली अस्त्र है, जो एक बाहुबली हथियार के तौर पर जाना जाता है, जिसकी काट खोजना मुश्किल है. 

थाईलैंड से कंबोडिया तक हिंदू धर्म का प्रचार प्रसार

गौरतलब है कि थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया, मलेशिया जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में हिंदू धर्म का हजारों साल पुराना ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध रहा है. फिलीपींस भी इस फेहरिस्त में शामिल हो गया है. पौराणिक मंदिर और उनके अवशेष भी इस पर मुहर लगाते हैं. हिंदू के साथ बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार भी इन देशों में खूब हुआ. अंगकोरवाट मंदिर जैसे कई पुराने मंदिर इस बात की निशानी हैं. 
 

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