भक्ति पार्क में सांसें थमीं : मुंबई की पॉश कॉलनी बनी प्रदूषण का हॉटस्पॉट

पिछले एक साल में भक्ति पार्क का AQI एक भी दिन सुरक्षित स्तर पर नहीं रहा. इस महीने यह करीब 300 तक पहुंच गया, जो छह से आठ सिगरेट रोज पीने के बराबर है. कई लोग लगातार सांस की बीमारियों की शिकायत कर रहे हैं.

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मेट्रो लाइन-4 और कस्टम ऑफिसर्स कॉलोनी का निर्माण भी इलाके में धूल की परत को और मोटा कर रहा है.
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  • मुंबई के भक्ति पार्क में हवा की गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब हो चुकी है और AQI स्तर 300 के ऊपर पहुंच गया है.
  • इलाके में एक सीमेंट मिक्सिंग प्लांट और दो अन्य प्लांटों की गतिविधियां प्रदूषण के मुख्य कारण मानी जा रही हैं.
  • इस प्रदूषण के कारण स्थानीय निवासी लगातार सांस की बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं.
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मुंबई:

मुंबई के पूर्वी हिस्से में स्थित भक्ति पार्क एक विडंबना पेश करता है. 20 एकड़ में फैला यह पॉश रिहायशी इलाका हरे-भरे बगीचे, मल्टीप्लेक्स, समुद्र का नजारा और मैंग्रोव्स के साथ मोनोरेल, ईस्टर्न फ्रीवे और अटल सेतु जैसी बेहतरीन कनेक्टिविटी का दावा करता है. यहां रहने वालों में पूर्व न्यायाधीश, नौकरशाह, आईपीएस अधिकारी, शीर्ष बैंकर्स, वरिष्ठ पत्रकार और कुछ राजनेता शामिल हैं, जो इसे मुंबई के सबसे आकर्षक पते में से एक बनाते हैं. लेकिन इस आलीशान जीवन के पीछे एक कड़वी सच्चाई छिपी है. लोग सांस लेने के लिए तरस रहे हैं. हाल के हफ्तों में भक्ति पार्क और वडाला ट्रक टर्मिनल (टीटी) के आसपास की वायु गुणवत्ता बुरी तरह गिर गई है. AQI स्तर 300 से ऊपर पहुंच गया है, जिसे “गंभीर” श्रेणी में रखा जाता है. 

लोगों को हो रही हैं सांस संबंधी बीमारियां

महीनों से यह इलाका मुंबई के सबसे प्रदूषित स्थानों में गिना जा रहा है और कई निवासी दूषित हवा के कारण श्वसन संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं. सर्दियों की धुंध हर साल स्थिति को बिगाड़ती है, लेकिन स्थानीय लोग दो साल पहले बने सीमेंट मिक्सिंग प्लांट को संकट का बड़ा कारण मानते हैं. यह प्लांट ईस्टर्न फ्रीवे के ठीक पास, कॉलोनी के प्रवेश द्वार पर स्थित है. 230 वर्ग मीटर में फैला यह प्लांट सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और बीडीडी चॉल पुनर्विकास के लिए कंक्रीट सप्लाई करता है. मई 2024 में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) ने उल्लंघनों का हवाला देते हुए इसे बंद करने का नोटिस दिया था, लेकिन कंपनी ने नियमों के पालन का दावा कर फिर से काम शुरू कर दिया.

फ्रीवे पर भारी वाहनों पर रोक के बावजूद, सीमेंट ढोने वाले ट्रक दिन-रात चलते रहते हैं, जिससे सुरक्षा का खतरा भी बढ़ गया है. शिकायतों के बाद ट्रैफिक पुलिस ने चालान काटे, लेकिन इससे हालात नहीं बदले. निवासियों का कहना है कि एमएचएडीए बिल्डिंग्स के पास बीपीटी रोड की ओर एक और प्लांट बन रहा है. वडाला टीटी इलाके में पहले से दो सक्रिय प्लांट हैं. मेट्रो लाइन-4 और कस्टम ऑफिसर्स कॉलोनी का निर्माण भी धूल की परत को और मोटा कर रहा है.

गैरकानूनी औद्योगिक गतिविधियां समस्या को और बढ़ा रही हैं, कचरा जलाना, स्क्रैप फायर और मेटल स्मेल्टिंग आम हैं. वडाला टीटी से निकलने वाला वाहन प्रदूषण हवा को और जहरीला बना देता है. पिछले एक साल में भक्ति पार्क का AQI एक भी दिन सुरक्षित स्तर पर नहीं रहा. इस महीने यह करीब 300 तक पहुंच गया, जो छह से आठ सिगरेट रोज़ पीने के बराबर है. कई लोग लगातार सांस की बीमारियों की शिकायत कर रहे हैं.

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विडंबना यह है कि साफ हवा के लिए जूझने वालों में पूर्व एमएमआरडीए प्रमुख, पूर्व लोकायुक्त, पूर्व पुलिस आयुक्त और सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय व आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. यहां कई शीर्ष बैंकर्स और वरिष्ठ पत्रकार भी रहते हैं. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण का भी कभी यहां फ्लैट था. दिवंगत मराठा नेता विनायक मेटे भी इसी बिल्डिंग में रहते थे. सरकारी उदासीनता से परेशान होकर निवासियों ने एकजुट होकर बीएमसी, एमपीसीबी और पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन ठोस नतीजे नहीं मिले. अब आखिरी कोशिश के तौर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे शिकायत पत्र लिखने का अभियान शुरू किया है.

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