मुंबई बनाम गुजरात: ठाकरे ब्रदर्स का नया धमाका, क्यों हो रही है 1950 के आंदोलन की गूंज?

भाषाई आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई में 107 लोगों की जान गई थी. उनकी याद में मुंबई में स्मारक बनाया गया है. मराठी मानूस की राजनीति करने वाले नेता बार-बार इन शहीदों के बलिदान का जिक्र करते हैं. हाल ही में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया है कि मुंबई की संपत्ति को गुजरात ले जाने की गहरी साजिश हो रही है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • ठाकरे भाइयों ने मुंबई की सीमाओं को कमजोर करने और अधिकार छीनने की साजिश का आरोप लगाया है
  • 1960 में बॉम्बे राज्य को भाषा के आधार पर गुजरात और महाराष्ट्र में विभाजित किया गया था
  • संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन मराठी भाषियों के अलग राज्य की मांग पर आधारित था जो जोरदार आंदोलन बन गया था
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
मुंबई:

मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले सियासी तापमान तेजी से बढ़ रहा है. ठाकरे ब्रदर्स जो दो दशक बाद फिर साथ आए हैं ने आरोप लगाया है कि मुंबई की सीमाओं को कमजोर करने और उसके अधिकारों को छीनने की गहरी साजिश रची जा रही है. उनका कहना है कि मुंबई की स्वायत्तता पर खतरा आज उतना ही बड़ा है, जितना 1950 के दशक में संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौरान था.

इन आरोपों के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आया है 1960 का वह ऐतिहासिक फैसला, जब भाषा के आधार पर पुराने बॉम्बे राज्य को दो हिस्सों गुजरात और महाराष्ट्र में बांटा गया था.

क्या था संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन?

आजादी के बाद बने बॉम्बे राज्य में मौजूदा गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई हिस्से शामिल थे. 1956 में राज्यों का पुनर्गठन हुआ और कर्नाटक वाले हिस्से मैसूर राज्य में शामिल कर दिए गए.
राज्यों के पुनर्गठन आयोग ने 1956 में सिफारिश की थी कि गुजरात और महाराष्ट्र को मिलाकर एक द्विभाषी राज्य बनाया जाए, जिसकी राजधानी बॉम्बे हो. इस प्रस्ताव के खिलाफ मराठी भाषी लोगों ने जोरदार आंदोलन किया. उन्होंने संयुक्त महाराष्ट्र समिति के तहत एकजुट होकर अपना अलग राज्य बनाने की मांग की.

गुजरात और महाराष्ट्र का गठन कैसे हुआ?

जब संयुक्त महाराष्ट्र समिति मराठी भाषियों के लिए अलग राज्य की मांग कर रही थी, उसी समय महागुजरात आंदोलन भी जोर पकड़ रहा था. यह आंदोलन गुजराती भाषियों के लिए अलग राज्य की मांग कर रहा था. इन आंदोलनों के दबाव में संसद ने अप्रैल 1960 में कानून पास किया और दो राज्यों गुजरात और महाराष्ट्र के गठन का रास्ता साफ किया.

1 मई 1960 को बॉम्बे राज्य भंग कर दिया गया और गुजरात व महाराष्ट्र अस्तित्व में आए. बॉम्बे, जो अब मुंबई है, महाराष्ट्र की राजधानी बनी. गुजरात के लिए पहले अहमदाबाद को अस्थायी राजधानी बनाया गया और बाद में गांधीनगर विकसित किया गया.

महाराष्ट्र में भावनात्मक मुद्दा क्यों है?

भाषाई आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई में 107 लोगों की जान गई. इन्हें "हुतात्मा" कहा जाता है और उनकी याद में मुंबई में स्मारक बनाया गया है. मराठी मानूस की राजनीति करने वाले नेता बार-बार इन शहीदों के बलिदान का जिक्र करते हैं. इसी पृष्ठभूमि में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे आरोप लगा रहे हैं कि मुंबई की संपत्ति को गुजरात ले जाने की गहरी साजिश चल रही है.

Advertisement


 

Featured Video Of The Day
NDTV Power Play BMC Polls 2026: Thackeray ब्रदर्स, Marathi VS Non Marathi पर Sanjay Raut का बड़ा बयान