ईरान के सर्वोच्‍च नेता अयातुल्‍ला अली खामेनेई की मौत का गम, राजस्‍थान के इस गांव में ईद नहीं मनाएगा शिया समुदाय

ईरान के सर्वोच्‍च नेता अयातुल्‍ला अली खामेनेई की मौत की खबर से दौराई गांव में रहने वाले शिया समुदाय के लोग शोक में हैं. यही कारण है कि इस बार शिया समुदाय के लोगों ने ईद नहीं मनाने का फैसला किया है.

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  • अजमेर के दौराई गांव में इस बार शिया समुदाय ने ईद का त्योहार नहीं मनाने का फैसला किया है.
  • ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर से पूरे शिया समुदाय में गहरा शोक है.
  • दौराई गांव की मस्जिद में मौलाना इरफान हैदर के नेतृत्व में शोक सभा आयोजित कर खामेनेई को याद किया गया.
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अजमेर से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित दौराई गांव में इस बार ईद‑उल‑फितर का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है. हर साल जहां ईद के मौके पर रौनक, खुशियां और चहल‑पहल देखने को मिलती थी, वहीं इस बार गांव में सन्नाटा पसरा है. गांव में बड़ी संख्या में रहने वाले शिया समुदाय ने इस बार ईद का त्योहार नहीं मनाने का फैसला किया है. उन्‍होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता और उनके धर्मगुरु अयातुल्ला अली खामेनेई की युद्ध के दौरान मौत की खबर के बाद पूरे समुदाय में गहरा शोक है.

ईरान के सर्वोच्‍च नेता अयातुल्‍ला अली खामेनेई की मौत की खबर से दौराई गांव के लोग शोक में हैं. शिया समुदाय के लोगों का कहना है कि जब तक खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक किसी भी तरह का जश्न मनाना उचित नहीं है. यही कारण इस बार शिया समुदाय के लोगों ने ईद को शोक के साथ बिताने का निर्णय लिया है.

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सड़कें सूनी, गुमसुम लोग 

ईद के मौके पर हर साल दौराई गांव की गलियों में रौनक रहती थी. बाजारों में खरीदारी, घरों में सेवइयां और मिठाइयां बनती थीं. बच्चों को नए कपड़े दिलाए जाते थे और सड़कों पर रंगाई-पुताई व रोशनी की जाती थी. हालांकि इस बार हालात बिलकुल उलट हैं. गांव की सड़कें सूनी पड़ी हैं और लोग अपने घरों में गुमसुम बैठे नजर आ रहे हैं. समाज के लोग काली पट्टी बांधकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्‍ला अली खामेनेई की मौत को लेकर शोक व्यक्त करने की तैयारी कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के उत्सव से दूरी बना रहे हैं. 

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शोक सभा का आयोजन

गांव की रोजा मस्जिद में मौलाना इरफान हैदर के नेतृत्व में खामेनेई की मौत को लेकर शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. इस दौरान उन्‍हें याद किया गया और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया गया. 

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मौलाना इरफान हैदर ने कहा कि यह समय जश्न का नहीं बल्कि दुख और आत्ममंथन का है, इसलिए समाज एकजुट होकर सादगी और शोक के साथ समय बिताएगा. 

इस निर्णय के बाद पूरे इलाके में ईद का उत्साह फीका पड़ गया है और हर तरफ मातम जैसा माहौल बना हुआ है. 

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