3 दिन बाद फिर एक्टिव होगा मॉनसून, हफ्ते भर की देरी से पहुंचेगी दिल्ली; विदर्भ के लिए हीट वेव अलर्ट

Weather Update: दिल्ली को मॉनसूनी बौछारों से सराबोर होने के लिए जुलाई के पहले हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता हैं कि क्योंकि अभी अनुकूल परिस्थितियां बनती नजर नहीं आ रही हैं.

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मॉनसून की रफ्तार बीते कुछ दिनों से महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में स्थिर हो गई है.
PTI
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  • दिल्ली को मॉनसूनी बौछारों से सराबोर होने के लिए जुलाई के पहले हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता है.
  • IMD वैज्ञानिक ने बताया कि 23 जून के आसपास मॉनसून के फिर से एक्टिव होने की उम्मीद है.
  • 1 जून से 19 जून के बीच देश में बारिश औसत से 41% कम रिकॉर्ड की गई है.
नई दिल्ली:

Monsoon Update: जून के 20 दिन बीत चुके लेकिन बारिश का अता-पता नहीं चल रहा. मॉनसून अचानक गायब सा हो गया है. दिल्ली-यूपी से लेकर महाराष्ट्र तक लोग गर्मी से परेशान हैं. इस बीच मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मॉनसून की मौजूदा चाल को लेकर बड़ी अपडेट दी है. शनिवार को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक ने बताया कि 23 जून के आसपास मॉनसून के फिर से एक्टिव होने की उम्मीद है. IMD की इस अपडेट की माने तो 23 जून के बाद मॉनसून फिर आगे बढ़ेगा. जिसके बाद महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में बारिश का दौर लौटेगा. 

IMD के वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत ने दी जानकारी

मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशि कांत ने NDTV से कहा, 'इस बार मॉनसून सीजन के दौरान औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान है. पिछले कुछ दिनों में अरब सागर में क्लाउडिंग नहीं बन पाई है. इसकी वजह से मॉनसून की रफ़्तार महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में स्थिर हो गई है. अब उम्मीद है कि 23 जून के आसपास मॉनसून फिर सक्रिय होगा.'

1-19 जून के बीच देश में औसत से 41 फीसदी कम बारिश

भारत मौसम विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल 1 जून से 19 जून के बीच देश में बारिश औसत से 41% कम रिकॉर्ड की गई है. आमतौर पर 1 जून से 19 जून के बीच देश में औसतन 86.7 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल 1 जून से 19 जून के बीच सिर्फ 51.5 मिलीमीटर बारिश हुई है.  सबसे ज़्यादा बारिश सेंट्रल इंडिया क्षेत्र में दर्ज़ की गयी है जहाँ 01 जून से 19 जून के बीच औसत से 64% कम बारिश दर्ज़ की गई है. 

किस क्षेत्र में कितनी हुई बारिश

दूसरी सबसे ज़्यादा बारिश की कमी पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में देखी गई, जहाँ इन 19 दिनों के दौरान औसत से 45% कम बारिश हुई है. दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 22% रही.  उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश औसत से 4 % कम रिकॉर्ड की गयी है.

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विदर्भ में हीट वेव के दिन लौटे, ऑरेंज अलर्ट जारी

महाराष्ट्र में बारिश नहीं होने से विदर्भ इलाके में फिर से हीट वेव के दिन लौट आए हैं. अगले चार दिनों के लिए विदर्भ में लू (उष्णता लहर) का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. अल नीनो के मजबूत होने के कारण मानसून का कहीं अता-पता नहीं है. बारिश न होने की वजह से विदर्भ में एक बार फिर हीट वेव का प्रकोप बढ़ गया है. कहा गया कि विदर्भ को मॉनसून के लिए अभी 5 से 6 दिन और इंतजार करना होगा. नागपुर के IMD के वरिष्ठ वैभानिक डॉ. श्रीकांत टी.एस ने यह जानकारी दी.

दिल्ली में एक हफ्ते की देरी से पहुंचेगा मॉनसून

बात दिल्ली के लिहाज से करे तो राजधानी दिल्ली को मॉनसूनी बौछारों से सराबोर होने के लिए जुलाई के पहले हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता हैं कि क्योंकि अभी अनुकूल परिस्थितियां बनती नजर नहीं आ रही हैं. दिल्ली में आमतौर पर 27 जून के आसपास मॉनसून दस्तक देता है. लेकिन इस बार मॉनसून के दिल्ली पहुंचने में एक हफ्ते की करीब देरी हो सकती है. अब मॉनसून के जुलाई के पहले हफ्ते में दिल्ली पहुंचने की संभावना है.

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मॉनसून की धीमी गति के 5 मुख्य कारण, IMD ने बताया

  1. मौजूदा मानसून प्रवाह में अरब सागर से आने वाली तेज हवाओं या लहरों की कमी है. मौसम विभाग ने कहा, ‘‘इस तरह की हलचल आमतौर पर नमी बढ़ने और बड़े पैमाने पर बारिश के लिए ज़िम्मेदार होती है, जिससे मानसून आगे बढ़ता है.''
  2. मानसून के प्रवाह से जुड़ी दक्षिणी-पश्चिमी निचली हवाएं अरब सागर के ऊपर कमजोर पड़ गई हैं. इससे महाराष्ट्र के तट और अंदरूनी इलाकों की ओर नमी का बहाव कम हो गया है.
  3. पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर के ऊपर भूमध्य रेखा को पार करने वाली हवाओं का बहाव - जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए नमी का स्रोत है- हाल के समय में कमज़ोर पड़ गया है, जिसके कारण मानसून की गतिविधि में कमी आई है.
  4. मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करने वाली प्रणाली अभी मौजूद नहीं हैं. इनमें अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव वाले क्षेत्र या चक्रवाती हवाओं का घेरा, या पश्चिमी तट के पास काफी ताकत वाला ‘ऑफशोर ट्रफ' (एक बड़े इलाके में फैला कम दबाव का क्षेत्र) शामिल हैं.
  5. ‘मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन' (एमजेओ) का कमजोर दौर है. यह हवा, बादलों और दबाव की एक चलती-फिरती प्रणाली है, जो भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमते हुए बारिश लाती है.
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