दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई राज्यों में मंगलवार को तेज बारिश हुई. मॉनसून की दस्तक के बाद दिल्ली में इस सीजन की सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग ने बारिश का रेड अलर्ट भी जारी किया है. दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र और गुजरात से लेकर मध्य प्रदेश, झारखंड और ओडिशा में अच्छी बारिश हुई. इसकी वजह से 1 जून से 7 जुलाई के बीच देश में बारिश की कमी घटकर 17% हो गई है.
बारिश की स्थिति में सुधार
सिर्फ 6 दिन पहले 01 जुलाई तक देश में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ने की वजह से बारिश औसत से 38% कम रिकॉर्ड की गई थी. यानी मॉनसून की स्थिति में सुधार से बारिश की कमी 6 दिन के अंदर 38% से घटकर 17% रह गई है.
राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में मंगलवार को तेज बारिश हुई, जिससे पिछले कुछ दिनों से गर्मी और उमस से जूझ रहे आम लोगों ने काफी राहत महसूस की. इसकी वजह से इस सीजन के दौरान दिल्ली में बारिश की कमी 47% से घटकर 27% रह गई है.
मॉनसून की बारिश ने पकड़ी रफ्तार
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दिल्ली-एनसीआर में तेज बारिश (सुबह 8.30 से दोपहर 2.30 बजे तक)
- नजफगढ़ - 76 mm
- पूसा - 37 mm
- गुरुग्राम - 26 mm
- नारायणा - 17 mm
- गाजियाबाद - 16 mm
- जनकपुरी - 15 mm
क्या है मौसम विभाग का पूर्वानुमान?
मौसम विभाग के मुताबिक, "आज 7 जुलाई 2026 को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुजरात के बाकी हिस्सों और राजस्थान व हरियाणा के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ गया है. अगले 2-3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बाकी हिस्सों और फिर पूरे देश में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं. 8 जुलाई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में, 7 जुलाई को कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और कर्नाटक में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. अगले 3 दिनों के दौरान उत्तर भारत में बारिश की गतिविधि बढ़ने और कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है."
कहां तक पहुंचा मॉनसून
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सीजन में पहली बार औसत से ज्यादा बारिश
मौसम विभाग की मंगलवार को जारी स्पेशल डेली वेदर रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 7 जुलाई के बीच मध्य भारत के राज्यों में पहली बार बारिश औसत से 1% ज्यादा रिकॉर्ड की गई है. 6 जुलाई तक मध्य भारत के राज्यों में बारिश की कमी 5% थी.
इस सीजन के दौरान ओडिशा में औसत से 20% ज्यादा, पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 21% ज्यादा और पूर्वी राजस्थान में औसत से 9% ज्यादा बारिश हुई. हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी अभी भी 19% बनी हुई है, जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की कमी 15% है. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कमी सबसे ज्यादा 39% है.
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