- केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की रचना की 150वीं जयंती पर इसके गायन के नियम बनाने पर विचार कर रही है
- वंदे मातरम के गायन के समय खड़े होना या अनिवार्य रूप से गाना जरूरी नहीं है, जबकि जन गण मन पर ये नियम लागू हैं
- राष्ट्रीय गान जन गण मन के सम्मान के लिए संविधान के अनुच्छेद 51(ए) के तहत नागरिकों को खड़े होकर गाना अनिवार्य
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की रचना की 150वीं जयंती पर केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है. सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय में विचार हो रहा है कि क्या वंदे मातरम के गायन के समय भी वही नियम-कायदे हों जैसे कि राष्ट्रीय गान जन गण मन के गायन के समय होते हैं. हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं हुआ है.
अभी वंदे मातरम गायन के क्या नियम?
फिलहाल वंदे मातरम के गायन के समय खड़े होने, अनिवार्य रूप से गाने जैसे प्रावधान नहीं हैं. राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण कानून 1971 अभी केवल जन गण मन पर ही लागू होता है. वंदे मातरम के लिए भी ठीक वैसे ही नियम बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं. इस पर केंद्र सरकार ने यही कहा है कि ये नियम जन गण मन पर लागू होते हैं, वंदे मातरम पर नहीं.
राष्ट्रीय गान जन गण मन को लेकर ये हैं नियम
संविधान के 51 (ए) अनुच्छेद के तहत राष्ट्रीय गान जन गण मन के सम्मान का दायित्व नागरिकों पर है. इसके बारे में गृह मंत्रालय ने विस्तृत निर्देश जारी किए हैं. इनमें कहा गया है कि जन गण मन के गायन की अवधि क्या होगी, उसके गायन के समय क्या करना होगा, जिसमें सभी को खड़े होना और गाना अनिवार्य है. इसके अलावा अगर कोई राष्ट्रीय गान के समय बाधा उत्पन्न करता है और दूसरों को रोकता है तो उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है. लेकिन वंदे मातरम के गायन के समय इस तरह के निर्देश नहीं हैं. अब सरकार इस दिशा में विचार कर रही है.
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वंदे मातरम को लेकर क्या विवाद?
वंदे मातरम के गायन को लेकर विवाद होता आया है. कई मुस्लिम संगठन इसके विरोध में हैं. बीजेपी इसे लेकर कांग्रेस पर भी निशाना साधती रहती है. पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर चर्चा हुई जिसमें कांग्रेस पर निशाना साधा गया. यह कहा गया कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण के कारण वंदे मातरम के दो टुकड़े कर दिए. वंदे मातरम के छह पदों में से केवल दो ही गाए जाते हैं और पूरे वंदे मातरम का गायन नहीं होता. उधर, विपक्ष का मानना है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मोदी सरकार इस मामले को तूल दे रही है.
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