माओवाद के ख़ात्मे का मिशन–2026, जान लीजिए पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी

वर्ष 2024 में जहां 217 नक्सली मारे गए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 256 हुई और 2026 में फरवरी तक 22 उग्रवादी ढेर किए गए.तीन वर्षों में कुल 209 नक्सलियों की गिरफ्तारी और 2613 के आत्मसमर्पण ने अभियान की सफलता को मजबूत आधार दिया है.सुरक्षा बलों के ऑपरेशनों में 1031 हथियार बरामद हुए, जिनमें AK–47, SLR, इंसास, .303 राइफल और BGL लॉन्चर जैसे भारी हथियार शामिल हैं.

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बड़ी संख्या में नकस्लियों ने किया आत्मसमर्पण
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  • वर्ष 2024 से फरवरी 2026 तक उग्रवादी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी और सुरक्षा अभियानों में कई नक्सली मारे गए
  • पूना मारगेम अभियान के तहत 2024 से 2026 तक हजारों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था
  • मिशन–2026 के तहत उग्रवाद पूर्ण उन्मूलन, स्थायी शांति और दीर्घकालीन विकास के लिए सुरक्षा और विकास पर जोर दिया
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नई दिल्ली:

माओवाद से लंबे समय से जूझ रहे छत्तीसगढ़ सहित देश के कई प्रभावित क्षेत्रों में अब तेजी से बदलाव दिखाई देने लगा है.केंद्र और राज्य सरकारों की समन्वित रणनीति, सुरक्षा बलों के व्यापक अभियानों तथा स्थानीय समाज की लगातार बढ़ती भागीदारी ने यह संकेत दे दिया है कि मिशन–2026 के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में अब तेज़ी से आगे बढ़ा जा रहा है.आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2024 से फरवरी 2026 तक उग्रवादी घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है.साथ ही सुरक्षा अभियानों की तीव्रता से कई शीर्ष नक्सली ढेर हुए, रिकॉर्ड संख्या में पकड़ में आए तथा बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए.

उग्रवादी घटनाओं में भारी कमी, रिकॉर्ड बरामदगी

वर्ष 2024 में जहां 217 नक्सली मारे गए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 256 हुई और 2026 में फरवरी तक 22 उग्रवादी ढेर किए गए.तीन वर्षों में कुल 209 नक्सलियों की गिरफ्तारी और 2613 के आत्मसमर्पण ने अभियान की सफलता को मजबूत आधार दिया है.सुरक्षा बलों के ऑपरेशनों में 1031 हथियार बरामद हुए, जिनमें AK–47, SLR, इंसास, .303 राइफल और BGL लॉन्चर जैसे भारी हथियार शामिल हैं.इसके अतिरिक्त 2025 में सबसे अधिक 894 आइईडी बरामद किए गए, जिसने यह स्पष्ट किया कि सुरक्षा बल लगातार खतरों को विफल कर रहे हैं.

सुरक्षा कैंपों के विस्तार से बढ़ा भरोसा

उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सुरक्षा उपस्थिति को मजबूत करने के लिए वर्ष 2025 में 58 और 2026 में आठ नए कैंप स्थापित किए गए.इन कैंपों को ‘इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट सेंटर' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन (PDS), बिजली, बैंकिंग और अन्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं.इससे स्थानीय लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास तेजी से बढ़ा है. 2021 से अब तक विभिन्न जिलों में कुल 58 से अधिक कैंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में विकास का दायरा मजबूत हुआ है.

पूना मारगेम अभियान से बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण

पूना मारगेम या आत्मसमर्पण अभियान वर्ष 2025 में बड़ी सफलता लेकर आया.इस अभियान के तहत 1573 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. जबकि 2026 में फरवरी तक 248 नक्सली संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौट आए.वर्ष 2024 में 792 उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति अपनाई.इनमें शीर्ष नक्सली कैडर टक्कलापल्ली वासुदेव राव उर्फ सतीश, ग्रिड्डी पवनानंद रेड्डी उर्फ श्याम दादा, वेंकटेश उर्फ अडुमल वेंकटेश, राजमन मंडावी उर्फ भास्कर, रनिता उर्फ जयमती, चैतु उर्फ श्याम दादा प्रमुख हैं.केंद्रीय समिति या पोलित ब्यूरो से जुड़े नक्सलीमल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ विवेक उर्फ सोनू दादा, पुल्लुरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना और रामेश्वर उर्फ सोमा ने भी हथियार डाले.आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, रोजगार और पुनर्वास योजनाओं से जोड़ा गया है. 17 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर में 210 पूर्व नक्सलियों के सामूहिक आत्मसमर्पण कार्यक्रम ने इस नीति की प्रभावशीलता को और मजबूती दी.

नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक अभियान

वर्ष 2024–26 के दौरान सुरक्षा बलों ने कई टॉप कमांडरों को मार गिराया. दस्तावेजों के अनुसार केवल इस अवधि में 20 से अधिक शीर्ष स्तर के कमांडर मुठभेड़ों में ढेर किए गए.आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ों में DKSZCM स्तर के नक्सली सागर, जोगन्ना उर्फ चेमेला नरसिंह, रणधीर, रूपेश उर्फ शंभा गोसाई मंडावी, नीति उर्फ मिर्ज़िला पोट्टाम और रामचंद्र उर्फ कार्तिक उर्फ दसू मारे गए. इन सभी को संगठन के सक्रिय फील्ड कमांडर माना जाता था और ये लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में शामिल थे.

वर्ष 2025 नक्सल विरोधी अभियान के लिहाज से और भी निर्णायक साबित हुआ. इसी वर्ष नक्सली संगठन के जनरल सेक्रेटरी और पॉलिट ब्यूरो सदस्य बसव राजू को मुठभेड़ में मार गिराया गया, जिसे सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है. इसके अलावा CCM स्तर के कई बड़े नामों का अंत हुआ, जिनमें जयराम उर्फ चलपति उर्फ जयराम रेड्डी, विवेक उर्फ प्रयाग मांझी, फेंगटू लक्ष्मी उर्फ नरसिंह चालम उर्फ गौतम, गजराला रवि उर्फ उदय उर्फ गणेश, मनोज उर्फ मोडेम बालकृष्ण उर्फ भास्कर और सहदेव सोरेन उर्फ प्रयाग दा उर्फ प्रवेश शामिल हैं.

इसी कड़ी में राजू उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी, कोसा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी, माड़वी हिड़मा उर्फ संतोष उर्फ हिड़मान्ना और गणेश उईके उर्फ गणेश उर्फ पेत्तू दादा जैसे वरिष्ठ कमांडर भी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में ढेर किए गए. ये सभी नक्सली संगठन की रणनीतिक योजना, हथियार आपूर्ति और स्थानीय दस्तों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे.इसके अलावा, अन्य वरिष्ठ कैडर के रूप में सुधीर उर्फ सुधाकर उर्फ सोमनाथ उर्फ मुरली, कुहडामी जगदीश उर्फ बुंदरा, गुम्माडीवेली रेणुका उर्फ भानु उर्फ चेते, जग्गू नवीन उर्फ मधु और मंडुगुला भास्कर राव उर्फ अडेल्लु भी अलग‑अलग मुठभेड़ों में मारे गए. इन कार्रवाइयों से नक्सली नेटवर्क के कई सक्रिय ठिकाने ध्वस्त हुए और संगठन की गतिविधियों पर बड़ा अंकुश लगा.इन अभियानों ने नक्सल संगठन की संचालन क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर किया है.सुरक्षा बल विशेष रूप से उन इलाकों में सफलता प्राप्त कर रहे हैं जिन्हें पहले नक्सलियों का गढ़ माना जाता था.

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कल्चरल स्पोर्ट्स—‘लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने में प्रभावी पहल'

विकास और विश्वास बहाली की दिशा में सरकार द्वारा संचालित ‘क्लस्टर ओलंपिक' और ‘क्लस्टर मेला' कार्यक्रमों ने असाधारण सफलता हासिल की है.इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य युवाओं को उग्रवाद के प्रभाव से दूर करना, उन्हें खेल, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना तथा सकारात्मक भविष्य के लिए प्रोत्साहित करना है.वर्ष 2024 में 1 लाख 65 हजार से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 3 लाख 91 हजार से अधिक हो गई. मेले के माध्यम से जनजातीय परंपराएं, कला, हस्तशिल्प और लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय मंच मिला, जिससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गर्व में वृद्धि हुई.

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान, शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी

7 से 9 फरवरी 2026 तक आयोजित क्लस्टर मेला 2026 को राष्ट्रीय स्तर से सराहा गया. इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति, केंद्रीय गृहमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. इससे प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का मनोबल बढ़ा और सरकारी प्रयासों पर भरोसा और गहरा हुआ.

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मिशन–2026 : आगे की राह

दस्तावेज़ में वर्ष 2026 की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि अब लक्ष्य उग्रवाद का पूर्ण उन्मूलन, स्थायी शांति स्थापना और दीर्घकालीन विकास मॉडल को मजबूत करना है.इसमें सुरक्षा, विकास और विश्वास—इन तीन स्तंभों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने की योजना है.स्थानीय युवाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने पर विशेष बल दिया जाएगा. साथ ही प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद को और प्रभावी बनाया जाएगा ताकि भय और हिंसा के बीते दौर को पीछे छोड़कर शांति, प्रगति और स्थिरता की नींव मजबूत हो सके.

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