- मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक इलाकों में व्यापारियों की चिंता बढ़ी है.
- चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अनुसार युद्ध से व्यापार को 5 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है.
- ईरान से आने वाले सूखे मेवों की कीमतों में तीस से चालीस प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते महासंग्राम से दिल्ली के व्यापार और उद्योग जगत की चिंताएं गहराती जा रही हैं. UAE के प्रमुख शहर दुबई के माध्यम से पश्चिम एशिया और यूरोपीय देशों को भारतीय उत्पादों का बड़ा निर्यात होता है. इसी कारण चांदनी चौक, खारी बावली, भागीरथ प्लेस, कश्मीरी गेट, सदर बाजार जैसे प्रमुख व्यापारिक इलाकों में कारोबारी स्थिति को लेकर बेचैनी बढ़ी है.
दिल्ली और देश के व्यापारियों एवं उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बयान जारी कर कहा कि यदि युद्ध लंबे समय तक जारी रहा, तो दिल्ली के व्यापार और उद्योग जगत को करीब 5,000 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है.
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल और महासचिव गुरमीत अरोड़ा ने बताया कि ईरान समेत पश्चिम एशिया में शेरवानी सहित अन्य भारतीय परिधान काफी लोकप्रिय हैं. वहीं ईरान से आने वाले सूखे मेवे—पिस्ता, आलूबुखारा, किशमिश, अंजीर, खजूर और मामरा—की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
CTI के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गर्ग और उपाध्यक्ष राहुल अदलखा ने कहा कि कई आवश्यक कच्चे माल, केमिकल कंपोनेंट, प्लास्टिक और एल्यूमिनियम की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिला है. इसका सीधा असर दवा कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है, क्योंकि टैबलेट और सिरप के उत्पादन के साथ-साथ उनकी पैकेजिंग में भी प्लास्टिक और एल्यूमिनियम का व्यापक उपयोग होता है.
पिछले कुछ दिनों में आम दवाओं में उपयोग होने वाले कच्चे माल
- पैरासिटामोल में लगभग 47%,
- डाइक्लोफेनेक में 54%,
- डाइक्लोफेनेक पोटेशियम में 33%,
- अमॉक्सिसिलिन ट्राईहाइड्रेट में 45%,
- और सिप्रोफ्लॉक्सासिन में लगभग 60% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
CTI महासचिव रमेश आहूजा ने बताया कि सिलेंडर की कमी के कारण दिल्ली में होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट, ढाबों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. सैकड़ों लोग एलपीजी सिलेंडर न मिलने की वजह से या तो अपना काम बंद कर चुके हैं या दुकानें अनियमित रूप से खोल-बंद कर रहे हैं. CTI के अनुसार, दिल्ली में लगभग 50,000 स्ट्रीट फूड वेंडर्स हैं, जिनमें से 20–30% की दुकानें एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के कारण बंद होने की स्थिति में हैं.
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