- भारत सरकार ने खरीफ सीजन के लिए जून से देश में उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने की पुष्टि की
- मार्च 2026 तक यूरिया का स्टॉक 62 लाख टन था, जो पिछले साल की तुलना में दस लाख टन अधिक है
- डीएपी का स्टॉक 25 लाख टन है, जो पिछले साल से दोगुना ज्यादा और नपीके स्टॉक 56 लाख टन है
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से देश भर के फर्टिलाइजर प्लांट्स में गैस की सप्लाई मुहैया कराने की कवायद में जुटी भारत सरकार ने साफ किया है की जून से शुरू हो रहे खरीफ सीजन के दौरान देश में जरूरत के मुताबिक उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में 13 मार्च, 2026 तक 62 लाख टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध था, जो 13 मार्च, 2025 के मुकाबले 10 लाख टन ज्यादा है.
केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक Diammonium Phosphate (DAP) का 25 लाख ton स्टॉक देश में मौजूद है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना ज्यादा है .
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक NPK फर्टिलाइजर का कुल स्टॉक देश में 56 लाख ton है जो अब तक का सबसे ज्यादा है. पिछले साल 13 मार्च, 2025 तक देश में सिर्फ 31 लाख टन NPK फर्टिलाइजर का स्टॉक उपलब्ध था.
सरकार के आंकलन के मुताबिक, अप्रैल महीने में आमतौर पर उर्वरक की डिमांड कम रहती है, और May महीने से खरीफ सीजन शुरू होने से ठीक पहले डिमांड में बढ़ोतरी होती है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में अलग-अलग उर्वरकों का प्रोडक्शन अब तक इस प्रकार रहा है: यूरिया का प्रोडक्शन हर महीने सामान्य तौर पर 25 लाख टन होता है, जबकि मार्च में इस साल 17 लाख टन यूरिया का प्रोडक्शन होने का अनुमान है.
इस बार गैस की सप्लाई में कुछ कमी की वजह से यूरिया प्लांट का एनुअल मेंटिनेस समय से पहले किया गया, जिससे मौजूद गैस के स्टॉक का बेहतर इस्तेमाल यूरिया के प्रोडक्शन के लिए किया जा सके. देश में यूरिया की उपलब्धता जरूरत के मुताबिक बहाल रखने के लिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संकट की संभावना को देखते हुए समय से पहले ग्लोबल टेंडर जारी कर दिया था.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी के मध्य तक साढे 13 लाख टन Urea के आयात के लिए आर्डर जारी कर दिए गए थे. इसका 90 फ़ीसदी तक यूरिया का स्टॉक मार्च के अंत तक भारत पहुंचने की उम्मीद है. केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्रालय के मुताबिक, रूस और मोरक्को से फर्टिलाइजर स्टॉक की सप्लाई सामान्य तरीके से जारी है... जबकि सऊदी अरब से भी 3 मिलियन टन डीएपी खाद की सप्लाई जारी है, उसकी सप्लाई में कोई badha अभी तक नहीं आई है. देश के 652 जिलों में उर्वरक की बिक्री की कड़ी निगरानी की जा रही है, और कहीं भी ब्लैक मार्केटिंग ना हो इसके लिए कारगर व्यवस्था बहस की गई है.
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