“मराठी भाषा जैनों की देन, महारानी ताराबाई भी जैन थीं?” बयान से महाराष्ट्र में मचा सियासी तूफान

Marathi Language Controversy: जैन मुनि आचार्य नयनपद्मसागर के मराठी भाषा और महारानी ताराबाई को लेकर दिए गए बयान ने महाराष्ट्र में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. जैन समुदाय के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं, जबकि राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
“जैन समाज से हुई मराठी भाषा की उत्पत्ति?” बयान से मचा बवाल, महाराष्ट्र की राजनीति गरम
@mieknathshinde

Marathi Language Controversy: महाराष्ट्र में इन दिनों इतिहास और भाषा को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. जैन मुनि आचार्य नयनपद्मसागर के एक ताजा दावे ने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है. आचार्य ने दावा किया है कि मराठी भाषा की उत्पत्ति जैन समुदाय से हुई है और इसका इतिहास जैन परंपराओं से गहराई से जुड़ा है.

मराठी भाषा को लेकर विवादित दावा

मुंबई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य नयनपद्मसागर ने कहा कि मराठी भाषा के मूल शब्द और उसका व्याकरण जैन मुनियों के साहित्य और प्राकृत भाषा से निकला है. उन्होंने यहां तक कहा कि प्राचीन काल में जैन विद्वानों ने ही इस भाषा को समृद्ध किया था. उन्होंने कहा, “सच कहूं तो पूरे भारत में अगर सच्चे मराठी कोई हैं तो वो सारे के सारे जैन हैं. संत ज्ञानेश्वर जी ने ज्ञानेश्वरी में लिखा है कि मराठी भाषा की रचना एक जैन आचार्य ने की है. यहां तक कि महाराष्ट्र के पाटिल जाति के लोग भी जैन धर्म का पालन करते हैं.” 

महारानी ताराबाई को बताया जैन

मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में आचार्य नयन पद्मसागर ने भाषण देते हुए कहा कि महारानी ताराबाई जैन थीं. कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के मुंबई अध्यक्ष अमित साटम भी मौजूद थे. इस बयान के बाद जैन समुदाय के भीतर ही दो फाड़ नजर आने लगी है. जैन मुनि नीलेश चंद्र महाराज ने आचार्य नयनपद्मसागर के दावों का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने कहा कि महापुरुषों और गौरवशाली इतिहास को किसी खास धर्म या जाति के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. नीलेश चंद्र महाराज ने कहा क‍ि “ऐसी टिप्पणियां समाज में दरार पैदा करती हैं और दो समुदायों के बीच के सद्भाव को बिगाड़ती हैं.”

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

विवाद बढ़ता देख मुनि नीलेश चंद्र ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है. उन्होंने मांग की है कि सामाजिक शांति भंग करने वाले बयानों पर रोक लगाई जाए. इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने वालों पर कार्रवाई हो. मराठा और जैन समुदाय के बीच भाईचारा बनाए रखा जाए. 

Advertisement

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज

इस विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के बयान महाराष्ट्र के गौरवशाली इतिहास को गुमराह करने की कोशिश हैं. उन्होंने इसे महापुरुषों और मराठा इतिहास का अपमान बताया. वहीं, शिवाजी महाराज के वंशज संभाजीराजे छत्रपति ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा क‍ि “एक मुनि द्वारा दिया गया यह बयान पूरी तरह तथ्यहीन और बेहद गैर-जिम्मेदाराना है. धार्मिक गुरुओं को इस तरह के विवादित दावे नहीं करने चाहिए.” 

Advertisement

इतिहासकारों और संगठनों का विरोध

कई मराठी संगठनों और इतिहासकारों ने भी इस दावे पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि मराठी एक स्वतंत्र और समृद्ध भाषा है, जिसका विकास सदियों में हुआ है और इसे किसी एक समुदाय से जोड़ना गलत है.

कौन थीं महारानी ताराबाई?

महारानी ताराबाई (1675-1761) मराठा साम्राज्य की पराक्रमी वीरांगना थीं. वे छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति हंबीरराव मोहिते की पुत्री और राजाराम महाराज की पत्नी थीं. सन 1700 में पति की मृत्यु के बाद उन्होंने अपने पुत्र को गद्दी पर बैठाकर स्वयं शासन और युद्ध की कमान संभाली. उन्होंने मुगल बादशाह औरंगजेब की सेना को लगातार सात वर्षों तक कड़ी टक्कर दी. अपनी सैन्य रणनीति और साहस के कारण उन्हें ‘मोगल मर्दिनी' कहा गया. कोल्हापुर की करवीर रियासत की संस्थापक के रूप में उनका नाम इतिहास में दर्ज है. 

ये भी पढ़ें- जज से ठगी... पहले 20 रुपये Google Pay कराए, फिर लगा दी 93000 ही चपत, जानिए ठगों ने कैसे फंसाया

Featured Video Of The Day
Iran Israel War BREAKING: हार मान गया America? Trump का बड़ा बयान! छोड़ेगा ईरानी सरजमीन | War News
Topics mentioned in this article