Maoist Leader Sukur Surrenders: कंधमाल जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत ओडिशा पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. जिले का मोस्ट वांटेड माओवादी नेता सुकुर, अपने चार अन्य साथियों के साथ हथियार डालकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुका है. अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम घोषित था. नक्सलियों ने एक AK‑47, एक INSAS राइफल सहित पांच हथियार भी पुलिस को सौंपे हैं. पुलिस ने इसे नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में अहम उपलब्धि बताया है.
Maoist Leader Sukur Surrenders: नक्सल मुक्त भारत अभियान को सफलता
66 लाख रुपये का कुल इनाम, पांच हथियार भी किए सुपुर्द
एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशंस) संजीव पांडा ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी माओवादियों पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम घोषित था. उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने पांच हथियार भी पुलिस को सौंपे हैं, जिनमें एक AK‑47 राइफल, एक INSAS राइफल एक सिंगल‑शॉट गन शामिल हैं.
मुख्यधारा में लौटने का स्वागत : एडीजी संजीव पांडा
एडीजी संजीव पांडा ने कहा, “आज सुकुर समेत चार अन्य माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है. हम सभी का मुख्यधारा में स्वागत करते हैं. पांचों पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम था और उन्होंने पांच हथियार भी सौंपे हैं.” उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को और तेज किए जाने की बात दोहराई.
कंधमाल में अब सिर्फ 8–9 माओवादी बचे
एडीजी पांडा ने दावा किया कि कंधमाल जिले में अब माओवादियों की संख्या सिंगल डिजिट में रह गई है. उन्होंने कहा, “अब कंधमाल में केवल 8–9 माओवादी बचे हैं. आने वाले दिनों में अभियान तेज किया जाएगा ताकि 31 मार्च की तय समयसीमा तक ठोस परिणाम सामने आ सकें.” उन्होंने शेष माओवादियों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए सरकार की सरेंडर पॉलिसी का लाभ देने का भरोसा भी दिलाया.
वरिष्ठ नेतृत्व खत्म, जल्द होगा नक्सल मुक्त जिला : एसपी हरिशा बीसी
कंधमाल के एसपी हरिशा बीसी ने विश्वास जताया कि शेष माओवादी भी जल्द आत्मसमर्पण करेंगे. उन्होंने कहा, “कंधमाल जिले का सबसे बड़ा नक्सली नेता सुकुर अब आत्मसमर्पण कर चुका है. उसके साथ चार अन्य सदस्य भी सामने आए हैं. अब कोई बड़ा नेता शेष नहीं बचा है.” एसपी ने कहा कि जब बाकी 8–9 माओवादी भी आत्मसमर्पण कर देंगे, तब जिला पूरी तरह नक्सल मुक्त हो जाएगा.
31 मार्च तक नक्स मुक्त भारत का लक्ष्य : अमित शाह
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि केंद्र सरकार 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. ताजा आत्मसमर्पण को इसी दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है.
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