- मणिशंकर अय्यर ने केरल के सीएम पिनराई विजयन के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की बात कहकर विवाद खड़ा कर दिया है
- अय्यर की विवादित टिप्पणियों के कारण कांग्रेस नेतृत्व उन्हें काफी समय से कोई अहम भूमिका नहीं दे रहा है
- अय्यर राजीव गांधी के करीबी रहे हैं और मनमोहन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं
कांग्रेस के बुजुर्ग नेता मणिशंकर अय्यर ने बीते 10–12 वर्षों में एक से एक विवादित बयान दिए हैं. इससे अय्यर को तो सुर्खियों में आने का मौका मिल जाता है लेकिन नुक़सान कांग्रेस पार्टी को उठाना पड़ता है. ज़ाहिर है, इस वजह से पार्टी से उनकी दूरियां बढ़ती जा रही हैं. अब तो अय्यर ने अपनी बन्दूक कांग्रेस की तरफ ही मोड़ दी है.
केरल पर बयान से कराई किरकिरी
ताज़ा मामला केरल का है, जहां कांग्रेस को 10 साल बाद सत्ता में वापसी की उम्मीद है. लेकिन अय्यर ने तिरुवनंतपुरम के एक कार्यक्रम में सीपीएम सरकार की तारीफ़ करते हुए सीएम पिनराई विजयन के तीसरी बार सीएम बनने की भविष्यवाणी कर डाली. अय्यर के बयान से कांग्रेस की जबरदस्त किरकिरी हुई. पवन खेड़ा और केसी वेणुगोपाल जैसे कांग्रेस नेताओं ने अय्यर को कांग्रेस से अलग बताया तो उन्होंने इन नेताओं की भी खिंचाई कर दी.
बढ़ती उम्र, विवादों का साया
कई वर्षों से मणिशंकर अय्यर कांग्रेस के लिए ना निगलते बन रहे हैं, ना उगलते! उनकी उम्र और विवादित बयानबाज़ी के मद्देनजर कांग्रेस उन्हें कोई भूमिका नहीं दे रही. अय्यर को लगता है कि राहुल गांधी उनकी उपेक्षा करते हैं. अय्यर की ये तथाकथित खुन्नस रह–रहकर सामने आती रहती है. केरल को लेकर उनका ताज़ा बयान इसी की एक कड़ी कहा जा सकता है.
एक बार पार्टी निलंबित कर चुकी
अय्यर के विवादित बयानों के बावजूद पार्टी उनकी वरिष्ठता को ध्यान में रखकर कार्रवाई नहीं करना चाहती. हालांकि एक बार ऐसा मौका आया था, जब पार्टी उन्हें निलंबित करने पर मजबूर हो गई थी. 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी पर बेहद अभद्र टिप्पणी के कारण अय्यर को कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था. हालांकि साल भर में ही उनकी सदस्यता बहाल कर दी गई.
राजीव के करीबी, मनमोहन कैबिनेट में मंत्री
इससे पहले, मणिशंकर अय्यर मनमोहन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे. आईएफएस अधिकारी रहे अय्यर, राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते पीएमओ में जॉइंट सेक्रेटरी थे और उन्हें उस वक्त पीएम का क़रीबी माना जाता था.
आत्मकथा के विमोचन में सोनिया भी पहुंचीं
राजीव गांधी से उनकी नज़दीकी ही वजह थी कि 2023 में उनकी आत्मकथा के विमोचन के कार्यकम में सोनिया गांधी शामिल हुई थीं, जबकि इस किताब में अय्यर ने 1984 के दिल्ली सिख दंगों को लेकर राजीव गांधी पर भी सवाल उठाए थे.
मनमौजी क्यों, खुद बताया
अपनी आत्मकथा को अय्यर ने नाम दिया- “मनमौजी के संस्मरण”. जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने ख़ुद को मनमौजी क्यों बताया है तो उनका कहना था कि वो असल में मनमौजी ही हैं. अलग सोच के व्यक्ति हैं. इसी वजह से उन्होंने जीवन में चढ़ाव भी देखा और उतार भी. बहरहाल, अपने बेबाक विचारों के साथ मणिशंकर अय्यर की मनमौजी यात्रा जारी है.













