माघ मेले में खुला राम–नाम बैंक,भगवान राम के नाम को किया जाता है डिपॉजिट

खास बात ये है कि इस शिविर का नाम है राम नाम बैंक जहां कोई कैश या जेवर नहीं डिपॉजिट होता है बल्कि भगवान राम के नाम को जमा करते है. इस बैंक का संचालन ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय और उनकी पत्नी गुंजन वार्ष्णेय द्वारा किया जा रहा है. इस बैंक का संचालन पिछले कई सालों से हर साल माघ मेले और कुंभ के दौरान किया जाता है.

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माघ मेला में खुला राम नाम बैंक
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  • प्रयागराज के संगम तट पर माघ मेले के दौरान राम नाम बैंक नामक आध्यात्मिक शिविर लगाया गया है
  • राम नाम बैंक में श्रद्धालु हाथ से राम राम लिखकर अपना खाता खोलते हैं और पासबुक प्राप्त करते हैं
  • इस बैंक का संचालन ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय और उनकी पत्नी गुंजन वार्ष्णेय द्वारा किया जाता है
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प्रयागराज:

प्रयागराज में इन दिनों संगम की रेती पर अध्यात्मिक और धार्मिक माघ मेला लगा हुआ है. 44 दिन तक चलने वाला यह मेला तीन जनवरी से शुरू हुआ है जो 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा. इस मेले में देश भर से साधु–संतों ने पहुंचकर मेले की शोभा बढ़ा दी है. वहीं इस मेले में कई ऐसी चीजें जो मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है. माघ मेले के सेक्टर एक स्थित अक्षयवट मार्ग पर ऐसे ही लगा एक शिविर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. इस शिविर में 24 घंटे राम नाम की गूंज गूंजती रहती है. ये शिविर राम नाम सेवा संस्थान की तरफ से लगाया गया है. 

खास बात ये है कि इस शिविर का नाम है राम नाम बैंक जहां कोई कैश या जेवर नहीं डिपॉजिट होता है बल्कि भगवान राम के नाम को जमा करते है.इस बैंक का संचालन ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय और उनकी पत्नी गुंजन वार्ष्णेय द्वारा किया जा रहा है. इस बैंक का संचालन पिछले कई सालों से हर साल माघ मेले और कुंभ के दौरान किया जाता है. इस राम नाम के बैंक में एकदम बैंक की तरह ही काम होता है जहां मेले में आने वाला हर श्रद्धालु इस बैंक में आता है और उसका खाता खोला जाता है. खाता धारक को बकायदा एक पासबुक भी दी जाती है जिसमें वो लाल रंग की स्याही से राम राम लिखा जाता है.

खाता धारकों को ये भी सहूलियत दी जाती है कि वो पासबुक को अपने साथ ले जाए और उसमें राम राम हाथ से लिखकर बाद में भी जमा कर सकते है. ये बैंक बाकी बैंकों से एकदम अलग है. इस राम नाम बैंक में सिर्फ अध्यात्मिक बैंक की सुविधाएं है. खाताधारकों को अकाउंट नंबर भी दिया जाता है. जो भी खाताधारक अपने हाथ से लिखी पासबुक इस बैंक में जमा करता है उसका बकायदा एक रजिस्टर भी मेंटेन किया जाता है. इस बैंक में आप सिर्फ जमा तो कर सकते है लेकिन निकासी नहीं कर सकते है.

कहा जाता है कि भगवान राम के नाम पर जो जमा हुआ फिर उसका हिसाब भी भगवान राम अपने हिसाब से ब्याज के साथ अपने भक्तों को देते है. हर साल संगम तट पर लगने वाले इस अनोखे बैंक में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ पहले भजन कीर्तन करती है और फिर भगवान राम के नाम पर उनको अपने हाथों से राम राम लिखकर जमा करना होता है. 

इस बैंक का संचालन करने वाले ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के मुताबिक हर साल मेले में आने वाले श्रद्धालु इस राम नाम बैंक में आते है और त्रिवेणी संगम के डुबकी लगाने के बाद इस बैंक में अपना खाता खुलवाते है. ईएमआई के रूप में राम–राम लिखकर जमा करते है. जो भी खाताधारक सवा लाख बार राम–राम लिखता है उसकी मनोकामना भगवान राम पूरी करते है. इस बैंक की गूंज देश–विदेश में भी है. वहीं गुंजन वार्ष्णेय  बताती है कि राम नाम बैंक का उद्देश्य भगवान राम से जुड़ी आस्था है जो श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचकर हमारे बैंक तक ले आती है. इस बैंक में कोई कैश ट्रांजैक्शन नहीं बल्कि राम के नाम को जमा किया जाता है वो भी लिखकर जो ये हर श्रद्धालु की पूंजी होती है.

इसको डिजिटल फॉर्मेट के जरिए भी जमा किया जा सकता है. राम नाम का लोन भी दिया जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालु भी इसे पुण्य का काम मानते है. सोशल नैटवर्किंग साइट पर भी राम नाम की गूंज इस समय देखने को मिल रही है. आधुनिक युवा पीढ़ी को राम नाम की भक्ति से जोड़ने के लिए राम नाम बैंक सोशल मीडिया पर पूरी तरह सक्रिय है. इसका हेड ऑफिस प्रयागराज के सबसे पॉश इलाके सिविल लाइंस है.

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