मद्रास हाईकोर्ट की अनोखी पहल, IPS को  फर्स्ट डिविजन के लिए 0.09% अधिक अंक दिलाए 

आईपीएस ने अपने एमएल पाठ्यक्रम में कुल 59.91 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, जो प्रथम श्रेणी में आने के लिए महज 0.09 प्रतिशत कम था.

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Madras High Court ने आईपीएस (IPS) को दी राहत
चेन्नई:

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने एक मामले में अनोखी पहल की है और एक आईपीएस को 0.09 प्रतिशत अतिरिक्त अंक देने का निर्देश मद्रास यूनिवर्सिटी को दिया है.  आईपीएस एमएल कोर्स में 59.91% अंक लाकर फर्स्ट डिवीजन से वंचित रह गए थे, लेकिन उनकी गुहार विश्वविद्यालय ने नहीं सुनी. आईपीएस अधिकारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मद्रास विश्वविद्यालय को 0.09 प्रतिशत अतिरिक्त अंक प्रदान करने का आदेश दिया. जस्टिस अब्दुल कुद्दुस ने हाल में आईपीएस डॉ. पा मूर्ति की एक याचिका को मंजूर करते हुए इस बाबत निर्देश दिया. आईपीएस ने अपने एमएल पाठ्यक्रम में कुल 59.91 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, जो प्रथम श्रेणी में आने के लिए महज 0.09 प्रतिशत कम था.

जज ने कहा, इस अदालत ने सभी तथ्यों पर गौर करते हुए पाया है कि याचिकाकर्ता ने एक IPS के रूप में तमाम व्यस्तताओं के बीच कड़ी मेहनत के साथ एमएल पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया और कुल 59.91 प्रतिशत अंक प्राप्त किये हैं. प्रथम श्रेणी प्राप्त करने के लिए 60 प्रतिशत अंक से महज 0.09 प्रतिशत अंक कम है. यह अदालत एकल न्यायाधीश (पूर्व में अन्य मामले में निर्णय) के विचार से सहमत है. इसलिए, मद्रास विश्वविद्यालय में एमएल डिग्री पाठ्यक्रम (निजी अध्ययन) में याचिकाकर्ता के कुल अंकों को 59.91 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत अंक करने का निर्देश दिया जाता है.

याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने 2019 में मद्रास विश्वविद्यालय में अपना एमएल पाठ्यक्रम पूरा किया. उस समय वह 54 साल के थे. आईपीएस अधिकारी ने आगे अध्ययन करने का फैसला किया और उन्होंने पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया. महज 0.09 प्रतिशत अंक के कारण प्रथम श्रेणी से वंचित रह जाने पर उन्होंने विश्वविद्यालय से इसे 60 प्रतिशत कर देने का अनुरोध किया, लेकिन इस पर विचार नहीं किया गया जिसके बाद उन्होंने याचिका दायर की. 

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