- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में 3D AM टेक्नीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे बेहद खास बनाता है.
- इस हाईवे की लखनऊ एयरपोर्ट के रनवे को सीधी कनेक्टिविटी रहेगी, जो सबसे ज्यादा फायदेमंद होगी.
- इस हाईवे का लगभग 19 किलोमीटर का हिस्सा एलीवेटेड है, यानि यह पिलर पर टिका हुआ है.
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अब आम जनता के सफर के लिए तैयार है. जिसके बाद दोनों शहरों के बीच की दूरी 35 से 45 मिनट की रह जाएगी. 63 किमी लंब यह 6-लेन एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश का पहला बैरियर-फ्री हाइवे भी है. जिसमें की ऐसी खास बातें हैं जो इसे देश के दूसरे हाईवे से बिल्कुल अलग बनाती हैं. ये एक्सप्रेसवे देश का पहला '3D एलीवेटेड' और '6-लेन है. जो केवल वाहनों को रफ्तार देगा बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और फास्ट यात्रा करवाएगा. खास बात यह है कि इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई का 30 फीसदी हिस्सा एलिवेटेड कॉरिडोर है, जो इसकी सबसे बड़ी खासियत है.
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की 4 बड़ी खासियत
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे देश का पहला '3D एलीवेटेड' और '6-लेन' हाइब्रिड एक्सप्रेसवे है. जिसका डिजाइन यूएसपी है. कुल 63 किलोमीटर लंबे इस हाईवे का लगभग 19 किलोमीटर का हिस्सा एलीवेटेड है, यानि यह पिलर पर टिका हुआ है. अमूमन एक्सप्रेसवे जमीन पर बनते हैं और आबादी वाले इलाकों में बाईपास दिया जाता है. लेकिन इसमें ऐसा नहीं है. इसका 30 फीसदी हिस्सा हवा में बनाया गया है, जिसमें ट्रैफिक की स्थिति नहीं रहेगी. यह देश में इस तरह का पहला प्रयोग है जहां इतनी लंबी दूरी का 6-लेन एलीवेटेड कॉरिडोर मुख्य एक्सप्रेसवे का हिस्सा है.
3D आटोमेट मशीन गाइडेंस
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे '3D आटोमेट मशीन गाइडेंस' टेक्नोलॉजी से भी लेस है. भारत में इस तकनीक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर पहली बार किया गया है. इसके तहत निर्माण करने वाले ग्रेडर और कंक्रीट बिछाने वाली मशीनों को सीधे जीपीएस और 3डी डिजिटल मॉडल से लिंक किया गया है. इससे इंसानी चूक की गुंजाइश खत्म हो जाती है और सड़क की फिनिशिंग इतनी सटीक और स्मूथ होती है कि गाड़ियों को हाई-स्पीड पर भी जरा सा भी झटका महसूस नहीं होता है.
लखनऊ एयरपोर्ट के रनवे को सीधी कनेक्टिविटी
शायद ही देश का कोई अन्य एक्सप्रेसवे किसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे और टर्मिनल को इस तरह इंटीग्रेट करता हो, जैसा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे करेगा. यह लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ठीक बगल से गुजर रहा है. एक्सप्रेसवे से एयरपोर्ट टर्मिनल के लिए एक विशेष रैंप दिया गया है, जिससे कानपुर या उन्नाव से आने वाले लोग बिना किसी शहर के ट्रैफिक में फंसे सीधे एयरपोर्ट के अंदर लैंड कर सकेंगे. यानि उन्हें शहर में भी नहीं जाना होगा और कोई दूसरा रास्ता भी नहीं पकड़ना होगा.
खास बोस्ट्रिंग गर्डर
उन्नाव के पास रेलवे लाइनों को पार करने के लिए इस एक्सप्रेसवे पर विशेष बोस्ट्रिंग गर्डर का इस्तेमाल किया गया है. आमतौर पर रेलवे ओवरब्रिज कंक्रीट के पिलर पर बनते हैं, लेकिन बिना ट्रेन यातायात को बाधित किए बेहद कम समय में भारी स्टील गर्डर्स को हवा में असेंबल करके यह ब्रिज तैयार किया गया है, जो आर्किटेक्चर का एक बेहतरीन नमूना है. यानि किसी तरह की रुकावट यहां भी नहीं होगी.
45 मिनट में पहुंचेंगे लखनऊ से कानपुर
लखनऊ और कानपुर को जुड़वा शहर कहा जाता है, लेकिन फिलहाल दोनों शहरों की यात्रा में 2 से 3 घंटे का समय लगता है. क्योंकि लखनऊ से कानपुर के बीच जाने में भारी जाम की स्थिति बनती है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यह दूरी महज 40 से 45 मिनट में सिमट जाएगी.
डिफेंस कॉरिडोर को रफ्तार
यह एक्सप्रेसवे यूपी के 'डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' के दो प्रमुख नोड्स, लखनऊ और कानपुर को आपस में सीधे जोड़ेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स और भारी मिलिट्री कार्गो का मूवमेंट बेहद आसान हो जाएगा. एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और बड़े पैमाने पर ग्रीन बेल्ट विकसित की जा रही है, जो इसे पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल बनाती है. इन्ही सब खासियतों की वजह से लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे खास माना जा रहा है.
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