संसद में भारी तकरार, चिदंबरम, अखिलेश, ओवैसी समेत 15 से ज्यादा विपक्षी सांसदों को विदेश भेजकर हाथ बढ़ा रही सरकार?

लोकसभा अध्यक्ष के इस कदम को एक नए प्रयोग और प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.इसका कितना फायदा होगा यह तो वक्त बताएगा लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की करवाहट थोड़ी कम हो और संसद का सत्र चले.

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दुनिया के देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर.
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  • ओम बिरला ने भारत के संसदीय संबंधों को मजबूत करने के लिए 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह बनाए हैं
  • इन संसदीय मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं जो विदेश जाकर संवाद स्थापित करेंगे
  • कुल 64 देशों के लिए 11-11 सांसदों के समूह बनाए गए हैं जिनमें विपक्ष के 15 सांसद भी शामिल हैं
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नई दिल्ली:

दुनिया के देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है. यह ग्रुप भारत के सांसदों का दुनिया के सांसदों के साथ सीधा और नियमित संवाद बढ़ाएगा. इन मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं. ये सांसद विदेश जाकर वहां के सांसदों से संवाद करेंगे.

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इन देशों में जाएंगे संसदीय मैत्री समूह

जिन देशों के साथ ये मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राज़ील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्तअरब अमीरात शामिल हैं.

पक्ष-विपक्ष के ये सांसद विदेश जाएंगे 

वरिष्ठ नेताओं में श्री रवि शंकर प्रसाद, डॉ. एम. थंबीदुरई, श्री पी. चिदंबरम, प्रो. राम गोपाल यादव, श्री टी.आर. बालू, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, श्री गौरव गोगोई, सुश्री कनिमोझी करुणानिधि, श्री मनीष तिवारी, श्री डेरेक ओ'ब्रायन, श्री अभिषेक बनर्जी, श्री असादुद्दीन ओवैसी, श्री अखिलेश यादव, श्री के.सी. वेणुगोपाल, श्री राजीव प्रताप रूडी, सुश्री सुप्रिया सुले, श्री संजय सिंह, श्री बैजयंत पांडा, डॉ. शशि थरूर, डॉ. निशिकांत दुबे, श्री अनुराग सिंह ठाकुर, श्री भर्तृहरि महताब, डॉ. (सुश्री) डी. पुरंदेश्वरी, श्री संजय कुमार झा, सुश्री हेमा मालिनी, श्री बिप्लब कुमार देब, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, श्री जगदंबिका पाल, डॉ. सस्मित पात्रा, सुश्री अपराजिता सारंगी, श्री श्रीकांत एकनाथ शिंदे, श्री पी.वी. मिधुन रेड्डी और श्री प्रफुल्ल पटेल सहित कई अन्य नेता शामिल हैं

15 विपक्षी सांसदों को सरकार भेज रही विदेश

जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उन 33 में से 15 सांसद विपक्ष के हैं. इसके अलावा कुल 64 देशों के लिए 11-11 सांसदों का एक ग्रुप बनाया गया है यानि लोकसभा और राज्यसभा के लगभग सभी 795 सांसदोंका नाम शामिल हैं. हालांकि इसमें प्रधानमंत्री, मंत्रियों और लोकसभा, राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष को इससे अलग रखा गया है.

मैत्री ग्रुप बनाकर क्या संकेत देने की कोशिश?

एक ऐसे समय में जब लोकसभा और राज्यसभा में सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी चरम पर है, जहां खुद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष के सौ से ज्यादा सांसदों ने हस्ताक्षर करके उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है और जिस वजह से लोकसभा अध्यक्ष अपने आसन पर नहीं बैठ रहे हैं. जहां लोकसभा के 8 सांसद निलंबित हैं और वो संसद भवन परिसर में रोज धरना देते हैं, जिनके निलंबन वापस लेने का प्रस्ताव पर अभी भी कोई फैसला नहीं हुआ है. एक तरफ जहां लोकसभा अध्यक्ष के चैंबर में विपक्षी सांसदों के नारे लगाने का आरोप है जहां विपक्ष की महिला सांसदों पर प्रधानमंत्री का रास्ता रोकने का आरोप है, वहां इस तरह का ग्रुप बनाकर लोकसभा अध्यक्ष क्या संकेत देना चाहते हैं.

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क्या विपक्ष के साथ संबंधों को सुधारने पर जोर?

जब ऑपरेशन सिंदूर के समय इसी तरफ का ग्रुप बनाकर विदेश भेजा गया था तब सरकार की बहुत सराहना हुई थी. हालांकि तब शशि थरूर के कुछ बयानों पर कांग्रेस ने आपत्ति भी जताई थी. और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने शशि थरूर पर कार्रवाई करने की भी मांग की थी. मगर अब परिस्थिति बदल गई है. थरूर अब ठंडे पड़कर पूरी तरह से कांग्रेस आलाकमान के साथ है और इस सूची में लगभग सभी सांसदों का नाम है. इतना तो जरूर है कि लोकसभा अध्यक्ष के इस कदम को एक नए प्रयोग और प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.इसका कितना फायदा होगा यह तो वक्त बताएगा लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की करवाहट थोड़ी कम हो और संसद का सत्र चले, क्योंकि बजट सत्र का पहला भाग तो हंगामों के भेंट चढ़ गया. बजट सत्र का अगला भाग 9 मार्च से 2 अप्रैल तक होगा और सब यही चाहेंगे कि कम से कम इस सत्र में कुछ कामकाज हो.
 

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